जोधपुर
कानून के खिलाफ बजा बिगुल...! सवर्ण समाज ने 1 फरवरी को भारत बंद का बड़ा ऐलान
paliwalwani
जोधपुर.
जोधपुर में UGC कानून के विरोध में सवर्ण समाज ने 1 फरवरी 2026 को भारत बंद का आह्वान किया. जहां व्यापारिक संगठनों और 36 कौमों के समर्थन का दावा किया गया. तो वहीं अलवर में वक्ताओं और कठूमर में युवाओं ने ज्ञापन देकर नियमों में बदलाव और पारदर्शिता की मांग उठाई.
आगामी 1 फरवरी 2026 को भारत बंद...
UGC कानून के विरोध में सवर्ण समाज के पदाधिकारियों ने प्रेस वार्ता करते हुए कहा कि यदि यह काला कानून वापस नहीं लिया गया, तो आगामी 1 फरवरी 2026 को भारत बंद किया जाएगा. वक्ताओं ने कहा कि इस आंदोलन को लेकर व्यापारिक संगठनों से बातचीत हो चुकी है. उन्होंने पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है. इसके साथ ही 36 कौमों के लोग इस आंदोलन से जुड़कर इसे सफल बनाएंगे. ब्राह्मण महासभा प्रदेश उपाध्यक्ष कन्हैयालाल पारीक ने बताया कि यूजीसी के अंतर्गत हाल ही में कुछ ऐसे प्रावधानों में बदलाव किए गए हैं, जो समानता के नाम पर लागू किए गए, लेकिन वास्तव में वे समाज को अंदर ही अंदर विभाजित करने का कार्य कर रहे हैं.
इन बदलावों से हिंदू समाज को अलग-अलग वर्गों में बांटने की कोशिश की जा रही है. इसी कारण हम इस काले कानून का विरोध करते हैं और इसके खिलाफ 1 फरवरी 2026 को जोधपुर बंद तथा देशव्यापी भारत बंद का आह्वान करते हैं. उन्होंने कहा कि वे सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, सामाजिक संगठनों और समाज के 36 कौम के बंधुओं से अपील करते हैं कि वे इस भारत बंद में सहयोग करें, ताकि हम सब एकजुट रह सकें. कुछ राजनीतिक नेता अपने स्वार्थ के लिए समाज को बांटना चाहते हैं, जिसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा.
एक साथ आएँ, भाईचारे को मजबूत करें
पारीक ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी एक वर्ग का नहीं है. ओबीसी, एससी, एसटी, ब्राह्मण, बनिया, जैन, माहेश्वरी सहित सभी समाजों से आग्रह है कि वे एक साथ आएँ, भाईचारे को मजबूत करें और देश की एकता को बनाए रखें. राष्ट्रीय स्तर पर संवाद को लेकर उन्होंने बताया कि विभिन्न संगठनों से बातचीत चल रही है. करणी सेना, ब्राह्मण समाज के बड़े संगठन, माहेश्वरी समाज सहित कई सामाजिक संगठनों से संपर्क में. सभी मिलकर आगे की रणनीति तय कर रहे हैं. ओबीसी वर्ग और 36 कौम के लोग भी इस आंदोलन में शामिल होंगे.
युवाओं ने यूजीसी कानून में बदलाव को लेकर सौंपा ज्ञापन, दुरुपयोग रोकने की उठाई मांग
कठूमर उपखंड मुख्यालय पर सामान्य वर्ग के युवाओं द्वारा यूजीसी कानून में प्रस्तावित बदलावों को लेकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा गया. यह ज्ञापन एसडीएम श्याम सुंदर चेतीवाल एवं तहसीलदार भानू प्रताप सिंह के माध्यम से दिया गया.
ज्ञापन में युवाओं ने बताया कि देश में जातिगत भेदभाव को एकजुटता के साथ समाप्त किया जाना चाहिए और किसी भी कानून का उद्देश्य साफ नीयत से होना चाहिए, न कि सियासी नजरिए से. उन्होंने कहा कि देश में पहले से ही भारतीय न्याय संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता, एंटी रैगिंग नियम एवं एससी/एसटी एक्ट जैसे सख्त कानून मौजूद हैं.
नई जातिगत व्यवस्थाओं के कारण समाज में भेदभाव और वैमनस्यता बढ़ने की आशंका
युवाओं का कहना था कि यदि प्रस्तावित यूजीसी नियम लागू होते हैं, तो इससे नई जातिगत व्यवस्थाओं के कारण समाज में भेदभाव और वैमनस्यता बढ़ने की आशंका है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई सवर्ण छात्र जातिगत भेदभाव करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन यदि किसी को आपसी रंजिश के चलते झूठे मामलों में फंसाया जाता है, तो ऐसे मामलों में फंसाने वाले के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए.
ज्ञापन में सवाल उठाया गया कि यदि कोई ओबीसी वर्ग का छात्र एससी/एसटी वर्ग के साथ भेदभाव करता है, तो उसके खिलाफ समान कार्रवाई का प्रावधान क्यों नहीं है. नए नियमों में ओबीसी वर्ग को पीड़ित पक्ष में शामिल किया गया है, जिससे यह प्रतीत होता है कि सामान्य वर्ग को पहले से ही दोषी मान लिया गया है.
युवाओं ने कहा कि जातिगत भेदभाव देश के लिए नासूर है. ऐसे मामलों में दोषी को कड़ी सजा मिलनी चाहिए, लेकिन निर्दोष को बचने का पूरा अवसर भी मिलना चाहिए. उन्होंने 2012 के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि उस समय गलत आरोप या दुर्भावना से मामला दर्ज कराने पर जुर्माने का प्रावधान था, जिसे नए नियमों में हटाया गया है.
सरकार से मांग की गई कि सामान्य वर्ग की भावनाओं को समझते हुए और संविधान की आत्मा से छेड़छाड़ किए बिना ऐसा कानून बनाया जाए जो समानता की भावना से प्रेरित हो. साथ ही यूजीसी कानून के तहत गठित होने वाली जांच समिति में सवर्ण समाज के प्रतिनिधि को शामिल करने और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने की मांग भी की गई.
जोधपुर बंद तथा देशव्यापी भारत बंद का आह्वान
इन बदलावों से हिंदू समाज को अलग-अलग वर्गों में बांटने की कोशिश की जा रही है. इसी कारण हम इस काले कानून का विरोध करते हैं और इसके खिलाफ 1 फरवरी 2026 को जोधपुर बंद तथा देशव्यापी भारत बंद का आह्वान करते हैं. उन्होंने कहा कि वे सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, सामाजिक संगठनों और समाज के 36 कौम के बंधुओं से अपील करते हैं कि वे इस भारत बंद में सहयोग करें, ताकि हम सब एकजुट रह सकें. कुछ राजनीतिक नेता अपने स्वार्थ के लिए समाज को बांटना चाहते हैं, जिसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा.
ज्ञापन में युवाओं ने बताया कि देश में जातिगत भेदभाव को एकजुटता के साथ समाप्त किया जाना चाहिए और किसी भी कानून का उद्देश्य साफ नीयत से होना चाहिए, न कि सियासी नजरिए से. उन्होंने कहा कि देश में पहले से ही भारतीय न्याय संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता, एंटी रैगिंग नियम एवं एससी/एसटी एक्ट जैसे सख्त कानून मौजूद हैं.
युवाओं का कहना था कि यदि प्रस्तावित यूजीसी नियम लागू होते हैं, तो इससे नई जातिगत व्यवस्थाओं के कारण समाज में भेदभाव और वैमनस्यता बढ़ने की आशंका है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई सवर्ण छात्र जातिगत भेदभाव करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन यदि किसी को आपसी रंजिश के चलते झूठे मामलों में फंसाया जाता है, तो ऐसे मामलों में फंसाने वाले के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए.





