इंदौर
शोक संदेश : पालीवाल समाज के वरिष्ठ समाज सेवी श्री शंकरलाल जी जोशी (भैयाजी) का 103 वर्ष की आयु में निधन
Paliwalwani
इंदौर. पालीवाल समाज 44 श्रेणी इंदौर के वरिष्ठ समाजसेवी, जगन्नाथ विद्यालय छावनी के पूर्व प्राचार्य और आरएसएस के पूर्व वरिष्ठ स्वयं सेवक श्री शंकरलाल जी जोशी (भैयाजी) ग्राम. टांटोल का आज दिनांक 6 जनवरी 2026 मंगवार को 103 वर्ष की आयु में निधन हो गया है, जिनका अंतिम संस्कार आज दिनांक आज दिनांक 6 जनवरी 2026 मंगवार को प्रातः 11.00 बजे रामबाग मुक्तिधाम पर संपन्न हुआ.
आप सर्वश्री नरेंद्र जोशी, लक्ष्मीकांत जोशी और सुरेंद्र जोशी के पूजनीय पिताजी थे. उक्त जानकारी पालीवाल ब्राह्मण समाज 44 श्रेणी इंदौर के कोषमंत्री श्री शिवलाल जी पालीवाल. समाजसेवी श्री हितेश जी व्यास ने पालीवाल वाणी को दी.
- निवास :18 सोमानी नगर (60 फीट रोड-राहुल स्टेशनरी के पीछे) इंदौर
दुःख की इस घड़ी में पालीवाल वाणी मीडिया समूह की संवेदनाएं जोशी परिवार के साथ हैं, ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान तथा शोकाकुल परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें....
ॐ शांति ॐ
यू चले जाने, समाज को अपूरणीय क्षति, मन दुखी कर गया-आत्मीय भावपूर्ण श्रद्धांजलि
- पालीवाल ब्राह्मण समाज 44 श्रेणी इंदौर के कोषमंत्री श्री शिवलाल जी पालीवाल ने पालीवाल वाणी को बताया कि समाज के वयोवृद्ध समाज सेवी हमारे आदर्श मार्गदर्शक सच्चे समाजसेवी लोकप्रिय हस्ती श्री शंकर लाल जी जोशी टाटोल को भावपूर्ण श्रद्धांजलि.
यह अत्यंत दुःखद समाचार है कि हमारे समाज के वरिष्ठ वयोवृद्ध समाजसेवी, लोकप्रिय हस्ती जगन्नाथ विद्यालय के प्राचार्य, आरएसएस के वरिष्ठ स्वयंसेवक, सर्वगुण-संपन्न, सहज, सरल तथा धर्म-कर्म, संस्कृति और संस्कार के मर्मज्ञ 103 वर्षीय श्री शंकर लाल जी जोशी टाटोल का आकस्मिक निधन हो गया. उनके जाने से न केवल परिवार बल्कि सम्पूर्ण समाज को अपूरणीय क्षति पहुँची है.
श्री शंकर लाल जी का जीवन सादगी, अनुशासन और सेवा का जीवंत उदाहरण था. उन्होंने शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखते हुए उसे संस्कारों से जोड़ा। एक प्राचार्य के रूप में उन्होंने पीढ़ियों को दिशा दी और एक स्वयंसेवक के रूप में समाज को जोड़ने का कार्य किया. उनकी लोकप्रिय छवि किसी पद या प्रचार की देन नहीं थी, बल्कि उनके आचरण, व्यवहार और निस्वार्थ सेवा का परिणाम थी.
धर्म, संस्कृति और राष्ट्रभाव उनके जीवन की धुरी थे, वे कहते नहीं थे, जीकर सिखाते थे. ऐसे वरिष्ठतम श्रेणी के मार्गदर्शक का चला जाना निश्चित रूप से हमारे संस्कार और सांस्कृतिक धरोहर में आई एक बड़ी कमी का संकेत है, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है, हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोक संतप्त परिवार व समाज को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें.
शंकर लाल जी जोशी टाटोल का जीवन हम सबके लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा. ब्रह्मलीन पुण्य आत्मा श्री शंकर लाल जी जोशी साहब के लिए एक शेर आद आता है की
!! यूं तो मुंह देख की बात करते हैं, सब कोई बात तो तब है कि मेरे जाने के बाद भी मेरी बात करें कोई !!
इस कहावत को हमारे आदर्श मार्गदर्शन ब्रह्म लीन पुण्य आत्मा ने चरितार्थ किया.
- भावपूर्ण श्रद्धांजलि : समस्त पालीवाल समाजजन समाज समस्त प्रबंध कार्यकारिणी, सभी पालीवाल समाज के धार्मिक, सांस्कृतिक मंडलों, सोशल मीडिया के महानुभावों की तरफ से भावपूर्ण श्रद्धांजलि शत-शत नमन...!





