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छत्तीसगढ़

महादेव ऑनलाइन सट्टा केस में सौरभ चंद्राकर की 1700 करोड़ की संपत्ति जब्त

📅 25 March 2026, 10:26 PM ✍️ paliwalwani ⏱️ 4 मिनट में पढ़ें
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महादेव ऑनलाइन सट्टा केस में सौरभ चंद्राकर की 1700 करोड़ की संपत्ति जब्त
महादेव ऑनलाइन सट्टा केस में सौरभ चंद्राकर की 1700 करोड़ की संपत्ति जब्त

रायपुर. महादेव ऑनलाइन बुक सट्टेबाजी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर की लगभग 1700 करोड़ रुपये की भारतीय और विदेशी संपत्तियों को जब्त कर लिया है। ED के रायपुर जोनल कार्यालय ने 24 मार्च 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत अस्थायी जब्ती आदेश (PAO) जारी किया।

इस कार्रवाई के तहत दुबई (UAE) में स्थित 18 अचल संपत्तियां और नई दिल्ली में स्थित 2 अचल संपत्तियां जब्त की गई हैं। इन संपत्तियों का कुल बाजार मूल्य लगभग 1700 करोड़ रुपये आंका गया है। जब्त की गई विदेशी संपत्तियां दुबई के प्रमुख और पॉश इलाकों में स्थित हैं, जिनमें दुबई हिल्स एस्टेट (हिल्स व्यू, फेयरवे रेजिडेंसी, सिदरा), बिजनेस बे, SLS होटल एंड रेजिडेंस और प्रतिष्ठित बुर्ज खलीफा में स्थित लक्जरी अपार्टमेंट और विला शामिल हैं।

ED की जांच में खुलासा हुआ है कि ये सभी संपत्तियां महादेव ऑनलाइन बुक सट्टेबाजी एप्लिकेशन से जुड़े अवैध कारोबार से अर्जित धन से खरीदी गई थीं। ये संपत्तियां सौरभ चंद्राकर द्वारा नियंत्रित विभिन्न कंपनियों और सहयोगियों के नाम पर दर्ज थीं, जिनमें विकास छपारिया, रोहित गुलाटी, अतुल अरोड़ा, नितिन टिबरेवाल और सुरेंद्र बागड़ी जैसे नाम शामिल हैं।

ED ने यह जांच छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। इन एफआईआर में IPC 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत महादेव ऑनलाइन बुक, Skyexchange जैसे अवैध सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म से जुड़े लोगों और कुछ सरकारी अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

जांच में यह भी सामने आया कि महादेव ऑनलाइन बुक एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी सिंडिकेट के रूप में कार्य कर रहा था। यह नेटवर्क Tiger Exchange, Gold365 और Laser247 जैसे कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डोमेन के माध्यम से संचालित होता था। इस पूरे ऑपरेशन को “पैनल” या “शाखा” आधारित फ्रेंचाइजी मॉडल पर चलाया जा रहा था, जिसमें देशभर में फैले ऑपरेटर शामिल थे।

इस सिंडिकेट का संचालन मुख्य रूप से दुबई से किया जा रहा था, जहां से सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल पूरे नेटवर्क को नियंत्रित करते थे। जांच में सामने आया कि कुल मुनाफे का 70-75 प्रतिशत हिस्सा प्रमोटरों के पास रहता था, जबकि बाकी हिस्सा पैनल ऑपरेटरों में बांटा जाता था।

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