आपकी कलम
सोशल मीडिया पर IncomeTax की नजर..और इस पर मेरा नजरिया.... देखिए आज सुबह सवेरे में...
indoremeripehchan.in
विश्वास व्यास, इंदौर
सोशल मीडिया पर पोस्ट "कर"
कल पढ़ा कि आयकर विभाग लोगों के सोशल मीडिया पर नजर रखेगा। कर चोरी का पता लगाएगा. मैं यह विचार सुनकर ही बौरा गया हूं. मेरे सोशल मीडिया प्रोफाइल को कुछ प्यारे दोस्तों, पड़ोसियों, रिश्तेदारों और चंद जल कुकड़ो के सिवाय आज तक किसी ने देखा नहीं था.
आगे से खुद सरकार देखेगी. कितना मजा आएगा जब आयकर भवन के सुनसान, रहस्यमयी गलियारों में मेरी रिल्स देखी जाएंगी. रिटर्न के बजाय रिल्स का असेसमेंट होगा. आज तक मुझ पर किसी ने नजर डाली ही नहीं. आखिर सरकार ने मुझ आम आदमी का दर्द समझा.
- मन झूम कर गा रहा है, अब जा कर आया मेरे बैचैन दिल को करार!
- मेरी बनाई रिल्स का स्तर कितना ऊंचा हो गया है. इन्हें फुरसत में बैठे टाइमपासूओ की बजाय साहब लोग देखेंगे.
- जिन्होंने दिनरात मेहनत कर के यू पी एस सी पास की है.
- वैसे सही मायने में साहब लोगों के साथ सामाजिक न्याय अब हुआ है. इतनी मेहनत के बाद धूल भरी फाइल्स देखने से कितना अच्छा होगा सोशल मीडिया प्रोफाइल्स देखना!
- वैसे अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि आयकर वाले किस प्लेटफॉर्म को देखेंगे?
क्योंकि इसका डिटेल प्रोसिजर नोटिफिकेशन आया नहीं है. हो सकता है, अलग अलग प्लेटफॉर्म्स के लिए कुछ उपविभाग बना दिए जाए. बताते है ऐ आई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किया जाएगा. मै तो कह रहा हूं जब आपने इतने काबिल अफसर यानी एक्चुअल इंटेलिजेंस कुर्सी पर बैठा है, तो आर्टिफिशियल काम क्यों करना??
- कितना मनोरम दृश्य होगा. जब रिटर्न्स के मनहूस, बेमजा आंकड़ों की भीड़ में,
- एक बाला की रील, "तेनु काला चश्मा लगदा है"
- देखकर साहब चश्मा उतारकर स्क्रीन के पास झुकते हुए क्लर्क को बोलेंगे,
- "हम्म... ये चश्मे का खर्च तो डिक्लेयर नहीं किया इसने!"
- कुल मिलाकर कर संग्रह की दृष्टि से ये महान विचार है. मेरे इस मामले में कुछ सुझाव है.
- इसके लिए कुछ नई पोस्ट बनाई जा सकती है. जैसे रील इंस्पेक्टर, स्टेटस चेकर, ट्वीट एनालिस्ट!
- इनके ऊपर एक "आई टी ओ" मतलब "इंस्टाग्राम ट्विटर ऑफिसर" भी बनाया जा सकता है.
नए बजट में फॉलोवर्स की संख्या पर भी टैक्स लगाया जा सकता है. कमेंट्स और लाइक्स ज्यादा होने पर कुछ छूट का प्रावधान कर दे. 80 जी वाले दान और कर बचाने वाले निवेश की जगह "एस आई पी" यानी "स्टेटस इन्वेस्टमेंट स्कीम" लानी चाहिए.
नाचने गाने वाली रील को अधिक छूट दी जा सकती है. लेकिन ज्ञान बांटू पोस्ट को हॉयर स्लैब में रखना आवश्यक होगा.
रिटर्न के फॉर्म में सेल्फ डिक्लेरेशन पोस्ट अटैच करने की सुविधा दी जानी चाहिए. सोशल मीडिया के अतिरिक्त व्यक्तिगत रूप से भेजे जा रहे वीडियो को "अन्य स्त्रोत से आय" शीर्षक में रखा जाए. अधिक शेयर या डिलीट कर दी गई पोस्ट को "टी डी एस (ट्रांसफर्ड एंड डिलीटेड सोशल पोस्ट)" मानकर कर लेना चाहिए. रोज पोस्ट न करने वालों पर पेनल्टी लगाई जाए. और आखिरी में एक सोशल मीडिया पोस्ट ट्रिब्यूनल बनाया जाए. जिसमें इन्फ्लूएंसर मित्रों की नियुक्ति हो.
- खैर सुझावों के बाद कुछ बात परेशानी की भी कर लेते है.
- थोड़ी सी दिक्कत बेचारे सी ए यानी कर सलाहकारों के लिए जरूर हो सकती है.
- इन्हें अब आर्टिकल की जगह आर्टिस्ट रखने पड़ सकते है. जो लोगों को टैक्स की बजाय पोस्ट में लिखे जाने वाले टैक्स्ट की सलाह दे.
सी ए लोगों को बैलेंस शीट में "प्रॉफिट" मैनेज करने के बजाए लोगों की "प्रोफाइल" मैनेज करना होगी. कर्मचारियों को "टेली" जैसे अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर की जगह "बैली" डांस सीखना पड़ सकता है. क्योंकि ज्यादातर शॉर्ट्स उसी के आते है. एक्सेल शीट्स के साथ डीजे बिट्स की जानकारी भी रखना होगी.
- यह तय करना मुश्किल रहेगा कि पोस्ट देखकर अधिकारी खुद लाइक कर दे तो कैपिटल गेन शॉर्ट टर्म होगा या लॉन्ग टर्म?
- यदि विश्वास व्यास की पोस्ट पर वह सिर खुजाने लगे तो टैक्स कितना लगेगा?
- वैसे इन छोटी मोटी परेशानियों से कोई फर्क नहीं पड़ेगा. आखिर सरकार सोशल काज के लिए सोशल मीडिया का उपयोग कर रही है.
- सीधा सा फंडा है कि बेटा, जीवन में कुछ कर या मत कर, तुझसे हम ले रहेंगे "कर"!
- कितनी अच्छी बात है कि अभी तक फालतू समझा जा रहा सोशल मीडिया पोस्ट राष्ट्रनिर्माण में योगदान देगा.
- आपके हैंडल से मुफ्त सुविधाएं देने की योजनाएं हैंडल होगी. इससे बड़ा पुण्य क्या होगा?
इसलिए आप और कुछ करे न करे, सोशल मीडिया अपडेट करते रहे. मैने ये लिखने से पहले ही गोल्ड लोन का आवेदन दे दिया है. मुझे पता है, यह लेख पोस्ट होते ही वायरल हो जाएगा और पीछे पीछे नोटिस आता ही होगा! पर देश के लिए कुर्बानी देना ही होती है और मैं तैयार हूं.





