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हिन्दी तेरी यही कहानी

📅 13 September 2018, 03:00 AM ✍️ Barun Kumar Singh ...✍️ ⏱️ 5 मिनट में पढ़ें
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हिन्दी तेरी यही कहानी
हिन्दी तेरी यही कहानी

हिन्दी तेरी यही कहानी
हम भारत के लोग!
देववाणी की भाषा ‘संस्कृत’ भूल चुके हैं
राष्ट्रभाषा हिन्दी पर राजनीति जारी है
इंसाफ की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीमकोर्ट में
आज भी राष्ट्रभाषा में बहस बेमानी है
इंसाफ की तराजू पर राष्ट्रभाषा हारी है
हिन्दी दिवस और हिन्दी पखवाड़ा
राष्ट्रभाषा के नाम पर सिर्फ निशानी है
नारा हिन्दी के नाम पर लगानी है
बच्चों को हिन्दी नहीं पढ़ानी है।
आज हिन्दी का हाल है बेहाल
रोजगार के नाम पर सिर्फ बेमानी है
आज राष्ट्रभाषा की यही कहानी है
नेताओं ने यह ठानी है!
भाषा के नाम पर जनता को उल्लू बनानी है
भाषा के नाम पर अपनी राजनीति चमकानी है।
आज हिन्दी जड़ से कट गया है
आज हिन्दी बिल्कुल बदल गया है
हैलो! हाय! बाय! हम बोलते हैं
अपनी आवाज को, अपनों के साथ
अपनी भाषा में, नहीं बोलते हैं
राष्ट्रभाषा होने पर भी
आज हिन्दी तेरी यही कहानी है!
आज मोबाइल जेनरेशन हिन्दी को
ऐसी-तैसी करने को ठानी है
हिन्दी वर्तनी को सबक सिखानी है
तेरे नाम की तो खिचड़ी पकानी है
तेरे नाम को अपडेथ वर्जन का
यूथ जेनरेशन ने सबक सिखानी है
आज के मैकाले तुम्हें
रोमन हिन्दी के नाम से जानते हैं
आज की पीढ़ी तूझे ऐसी गत बनाते हैं
हिन्दी को हिंगलिश बनाकर चिढ़ाते हैं
आज हिन्दी तेरी यही कहानी है!
आज अपनी भाषा और संस्कृति में
पिछड़ापन नजर आता है
आज की यंग जेनरेशन ने
हिन्दी को प्रतीक्षा सूची में रखा है
अपने लाडले को क, ख, ग... पढ़ाने में
गंवारापन का बोध होता है
बच्चा अपने को हीन समझता है
आज का बच्चा अपवाद में भी नहीं
माँ! माताजी! पिता! बाबूजी! नहीं बोलता
लेकिन आज माँ! पिताजी सुनना कौन चाहते?
ए. बी. सी. और फिरंगी अंग्रेजी पहले सीखता है
पापा! पोप! पे-पे! डैड! और डेड!
मम्मी! ममी! मम! और में-में! मिमियानी है!
एडवांस समझी जानी है
बच्चा जन्म से तो हिन्दुस्तानी
और भाषा और संस्कार से फिरंगी होनी है
फिरंगी भाषा और संस्कार की अमिट निशानी है
माॅर्डन एजुकेशन में अपडेट जेनरेशन ने
मम! डैड! को ओल्डऐज होम में रख
फिरंगी भाषा की फर्ज निभानी है।
मैकाले की भविष्यवाणी व्यर्थ नहीं जानी है
उसे साकार करने हम हिन्दुस्तानी ने ठानी है
आज हिन्दी तेरी यही कहानी है!
अपनी राष्ट्रभाषा बोलने पर
अंग्रेजी स्कूल में डांट खानी है
राष्ट्रभाषा में नहीं पढ़ने की ठानी है।
आज भारतीयता कहां से आनी है
भारतीयता की सिर्फ गीत गानी है
चंद सिक्के पर अपने को बिक जानी है
पहले सिक्के को कैसे पानी है,
इसकी तरकीब पहले लगानी है
भारतीयता तो कल को अपनानी है
सब सुधर जाए, हमें नहीं सुधरना
यहीं तो हमने ठानी है
आज हिन्दी तेरी यही कहानी है!
चंद सिक्कों के लोभ में
इंसान को बिक जानी है
इंसानियत धर्म को नहीं निभानी है
आज हर इंसान की यही कहानी है
तुम पहले सुधरो!
हमने तो बाद में सुधरने को ठानी है।
आज हिन्दी तेरी यही कहानी है।

paliwalwani

-बरुण कुमार सिंह
ए-56/ए, प्रथम तल
लाजपत नगर-2
नई दिल्ली-110024
मो. 9968126797
ई-मेल: barun@live.in

पालीवाल वाणी ब्यूरो-Barun Kumar Singh ...✍️
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