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उदयपुर

सिटी पैलेस में हुआ ‘हिंदू सुरत्राण : महाराणा कुंभा का भव्य-विमोचन

📅 25 July 2026, 10:02 AM ✍️ paliwalwani ⏱️ 4 मिनट में पढ़ें
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सिटी पैलेस में हुआ ‘हिंदू सुरत्राण : महाराणा कुंभा का भव्य-विमोचन
सिटी पैलेस में हुआ ‘हिंदू सुरत्राण : महाराणा कुंभा का भव्य-विमोचन

राजेंद्र पानेरी

उदयपुर. मेवाड़ के राजपरिवार के शंभू निवास सिटी पैलेस में 23 जुलाई 2026 को श्रीजी हजूर डॉ. लक्षराज सिंह मेवाड़ के कर-कमलों से वरिष्ठ साहित्यकार कुसुम अग्रवाल की ऐतिहासिक चरित काव्य कृति ‘हिंदू सुरत्राण : महाराणा कुंभा’ का गरिमामय विमोचन सम्पन्न हुआ.

समारोह के प्रारंभ में कमल अग्रवाल ने श्रीजी हजूर को पगड़ी पहनाकर तथा कुसुम अग्रवाल ने शॉल ओढ़ाकर उनका सम्मान किया. इसके पश्चात उपस्थित अतिथियों ने उपरणा ओढ़ाकर उनका अभिनंदन किया. अपने संबोधन में डॉ. लक्षराज सिंह ने कहा कि महाराणा कुंभा के जीवन एवं कृतित्व पर आधारित यह कृति नई पीढ़ी को मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी. उन्होंने लेखिका को बधाई देते हुए अपनी शुभकामनाएँ व्यक्त करते उनके उज्जवल भविष्य की कामना की.

लेखिका कुसुम अग्रवाल ने दोहों से अपनी बात की शुरुआत करते हुए कहा : 

कुसुम के सौभाग्य की बात कहूँ क्या और, पुस्तक विमोचन आज है, राजमहल है ठौर।

कुंभा चरित विशाल है, शासक थे अनमोल, बूँद समान ही लिख सकी, श्रद्धा के दो बोल।

उन्होंने बताया कि वे पिछले 40 वर्षों से साहित्य-सृजन में सक्रिय हैं तथा उनकी अब तक 38 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, उन्होंने कहा कि इस पुस्तक के लेखन का उद्देश्य महाराणा कुंभा के बहुआयामी व्यक्तित्व को जनसाधारण तक पहुँचाना है. वे केवल अद्वितीय योद्धा ही नहीं, बल्कि न्यायप्रिय शासक, कुशल वास्तुकार, शिल्पी, संगीतज्ञ, साहित्यकार एवं कला-प्रेमी भी थे.

मेवाड़ के दुर्गों एवं स्थापत्य के विकास में उनका योगदान अविस्मरणीय है. उनके व्यक्तित्व में वीरता के साथ क्षमा, दया और उदारता जैसे मानवीय गुण भी विद्यमान थे. उन्होंने कहा कि पुस्तक दोहों और चौपाइयों जैसी लोकप्रिय काव्य-विधा में सरल भाषा में लिखी गई है तथा इसे पाठकों की सुविधा के लिए 23 सर्गों में विभाजित किया गया है. इनमें मंगलाचरण, मेवाड़ की महिमा, सिसोदिया वंश, महाराणा मोकल, महाराणा कुंभा का जन्म, शिक्षा-दीक्षा, राज्याभिषेक, व्यक्तित्व, कृतित्व एवं जीवन की प्रमुख घटनाओं का क्रमबद्ध वर्णन है.

उन्होंने कहा कि मेवाड़ के इतिहास और संस्कृति के प्रति अपने गहरे अनुराग से प्रेरित होकर यह कृति लिखी गई है, ताकि पाठक महाराणा कुंभा के आदर्शों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में नई दिशा प्राप्त कर सकें. समारोह में डॉ. लक्षराज सिंह मेवाड़, उनके मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मयंक गुप्ता, डॉ. कुंजन आचार्य, कमल अग्रवाल, तरुण दाधीच, दिनेश श्रीमाली, नारायण सिंह राव तथा पुस्तक के प्रकाशक राजेंद्र पानेरी सहित कई गणमान्य साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे.

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