Sunday, 05 July 2026

धर्मशास्त्र

संन्यास : घर-परिवार, रिश्ते-नाते सबको तिलांजलि

paliwalwani
संन्यास :  घर-परिवार, रिश्ते-नाते सबको तिलांजलि
संन्यास : घर-परिवार, रिश्ते-नाते सबको तिलांजलि

जापान में नानहेन नामक एक परम ज्ञानी फकीर थे। एक दिन एक व्यक्ति उनके पास पहुँचकर बोला- "मैं संन्यास लेना चाहता हूँ। इसके लिए मैंने अपने घर-परिवार, रिश्ते-नाते सबको तिलांजलि दे दी है।" फकीर ने पूछा- "क्या तुम सचमुच बिलकुल अकेले हो ?" व्यक्ति बोला- "हाँ, आप देख लीजिए।"

फकीर बोले- "जाओ, सामने वटवृक्ष की छाया में बैठकर कुछ देर आँखें बंद करके अपने अंदर देखो कि कहीं तुम्हारे भीतर कोई और तो नहीं।" वह व्यक्ति वृक्ष की छाया में बैठकर अपने मन में देखने लगा तो उसमें उसे पूरे परिवार की छवि दिखाई दी।

उस व्यक्ति ने घबराकर आँखें खोल दीं। उसने फकीर को सामने खड़ा पाया। व्यक्ति फकीर से बोला- "मैं सब पीछे छोड़ आया था, पर मेरे भीतर तो सबकी छवि घूम रही है।" इस पर फकीर बोले- "ध्यानमग्न होकर इन व्यक्तियों को अपने अंदर से निकालने का प्रयत्न करो। कुछ देर बाद मेरे पास आना।"

युवक ने कुछ समय बाद फकीर का दरवाजा खटखटाया तो फकीर बोले- "कौन है?" युवक बोला- "मैं हूँ।" फकीर बोले- "अभी भी तुम अकेले नहीं हो। तुम्हारा 'मैं' तुम्हारे साथ है। यदि तुम इस मैं और भीड़ को छोड़ सको तो फिर संन्यास की जरूरत नहीं रह जाएगी।" व्यक्ति ने फकीर की बात समझ ली।

  • अखण्ड ज्योति : नवंबर, 2025
whatsapp share facebook share twitter share telegram share linkedin share
Related News
Latest News
Trending News