Saturday, 21 February 2026

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नगर निगम की आँख-मिचौली, पुलिस की खामोशी और ‘दुल्हन’ की तरह सजा अवैध बाजार : कानून का खुला मज़ाक

Ravindra Arya
नगर निगम की आँख-मिचौली, पुलिस की खामोशी और ‘दुल्हन’ की तरह सजा अवैध बाजार : कानून का खुला मज़ाक
नगर निगम की आँख-मिचौली, पुलिस की खामोशी और ‘दुल्हन’ की तरह सजा अवैध बाजार : कानून का खुला मज़ाक

गाजियाबाद में हर रविवार लगने वाला अनियंत्रित संडे बाजार बना सुरक्षा और व्यवस्था का संकट

विशेष रिपोर्ट: रविंद्र आर्य

गाजियाबाद/आसपास

गाजियाबाद में हर रविवार लगने वाला अनियंत्रित संडे बाजार अब केवल अवैध व्यापार का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह शहर की सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और प्रशासनिक निष्क्रियता का प्रतीक बन चुका है। शहर के विभिन्न इलाकों में बिना किसी अनुमति, पंजीकरण और नियंत्रण के लगने वाला यह बाजार स्थानीय व्यापारियों, आम नागरिकों और राहगीरों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बन रहा है।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि वर्षों से लाइसेंस, टैक्स और नियमों के तहत एनओसी प्राप्त व्यापार करने वालों का कारोबार इस अवैध बाजार के कारण बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। सड़कों पर अव्यवस्थित ठेले, अस्थायी दुकानें, अवैध कब्जे और भारी भीड़ के कारण हर रविवार लंबा जाम लगना आम बात हो गई है। आपातकालीन सेवाओं तक का रास्ता बाधित हो जाता है।

प्रशासन मौन, व्यापारियों का फूटा गुस्सा राजू छाबड़ा का प्रशासन पर सीधा आरोप

व्यापारी नेता राजू छाबड़ा ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस अवैध बाजार को लेकर नगर निगम और पुलिस प्रशासन से कई बार शिकायत की गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला, कार्रवाई नहीं। प्रशासन की यह चुप्पी व्यापारियों के गुस्से को और भड़का रही है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह केवल व्यापार का मुद्दा नहीं है, बल्कि शहर की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा खतरा है। इन बाजारों में बाहरी लोग बड़ी संख्या में आते हैं, जिनकी न पहचान होती है, न कोई रिकॉर्ड। इससे चोरी, छेड़छाड़, जेबकतरी और अन्य आपराधिक घटनाओं की आशंका बनी रहती है।

सबसे चौंकाने वाली स्थिति तब सामने आई जब नगर निगम ने संडे बाजार को अवैध बताते हुए कुछ घंटों के लिए रोक लगाने का दिखावा किया, लेकिन कुछ ही समय बाद वही बाजार पहले से अधिक सजा-धजा कर फिर से लग गया—मानो दुल्हन की तरह सजाकर कानून को मुँह चिढ़ाया गया हो। यह दृश्य नगर निगम और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

व्यापारियों का आरोप है कि नगर निगम और पुलिस के बीच जिम्मेदारी टालने का खेल चल रहा है—कागज़ों में कार्रवाई और ज़मीन पर मौन। इसका सीधा नुकसान ईमानदार व्यापारियों और आम जनता को उठाना पड़ रहा है।

राजू छाबड़ा ने नगर निगम और पुलिस प्रशासन से मांग की है कि अवैध बाजारों पर स्थायी और सख्त कार्रवाई की जाए, नियमित व्यापारियों को संरक्षण दिया जाए और शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारा जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो व्यापारी समुदाय आंदोलन के लिए मजबूर होगा।

सवाल सिर्फ संडे बाजार का नहीं, सवाल यह है—कानून चलेगा या अराजकता?

लेखक: रविंद्र आर्य

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