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Google पर कार्रवाई से भड़के ट्रंप, बोले- यूरोप को “बहुत बड़ी कीमत” चुकानी पड़ेगी

📅 26 July 2026, 01:12 AM ✍️ indoremeripehchan.in ⏱️ 5 मिनट में पढ़ें
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Google पर कार्रवाई से भड़के ट्रंप, बोले- यूरोप को “बहुत बड़ी कीमत” चुकानी पड़ेगी
Google पर कार्रवाई से भड़के ट्रंप, बोले- यूरोप को “बहुत बड़ी कीमत” चुकानी पड़ेगी

अमेरिका.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय संघ (EU) को कड़ी चेतावनी दी है. ट्रंप ने कहा कि गूगल पर 1 अरब डॉलर का जुर्माना लगाने के बाद यूरोप को इसकी “बहुत बड़ी कीमत” चुकानी पड़ेगी. उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ लगा सकता है और उनके खिलाफ नई व्यापारिक जांच भी शुरू कर सकता है.

दरअसल, यूरोपीय आयोग ने गुरुवार को गूगल पर करीब 1 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया. आयोग का कहना है कि गूगल ने डिजिटल मार्केट्स एक्ट (DMA) का उल्लंघन किया है. आरोप है कि गूगल अपने सर्च इंजन में अपने ही शॉपिंग, ट्रैवल और दूसरी सेवाओं को ज्यादा प्राथमिकता देता है, जबकि दूसरी कंपनियों की सेवाओं को पीछे दिखाता है.

इसके अलावा, यूरोपीय आयोग ने कहा कि गूगल अपने प्ले स्टोर पर ऐप डेवलपर्स को ग्राहकों को दूसरे प्लेटफॉर्म पर बेहतर ऑफर दिखाने से भी रोकता है. आयोग का मानना है कि इससे बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है. यूरोपीय संघ ने गूगल को 60 दिनों का समय दिया है ताकि वह अपने काम करने के तरीके में बदलाव करे. अगर कंपनी ऐसा नहीं करती है, तो उस पर रोजाना के कारोबार का 5% तक अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है.

इस कार्रवाई से नाराज राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका यूरोप की “गुल्लक” नहीं है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी टेक कंपनियों पर इस तरह का जुर्माना लगाना गलत और भेदभावपूर्ण है. ट्रंप ने आरोप लगाया कि यूरोप जानबूझकर अमेरिकी कंपनियों को निशाना बना रहा है. ट्रंप ने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में ऐसी कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

ट्रंप ने चेतावनी दी कि अमेरिका सेक्शन 301 के तहत यूरोपीय संघ के खिलाफ जांच शुरू कर सकता है. यह अमेरिका का ऐसा कानून है, जिसके जरिए किसी देश की कथित अनुचित व्यापारिक नीतियों की जांच की जाती है. जांच पूरी होने के बाद अमेरिका उस देश पर अतिरिक्त टैरिफ भी लगा सकता है. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की जांच पूरी होने में कई महीने लग सकते हैं, लेकिन अगर ट्रंप चाहें तो टैरिफ पहले भी लागू किए जा सकते हैं.

यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष टेरेसा रिबेरा ने इस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि बाजार में किसी भी कंपनी को केवल इसलिए फायदा नहीं मिलना चाहिए क्योंकि वह बड़ी कंपनी है. उनका कहना है कि हर कंपनी को बराबरी का मौका मिलना चाहिए. वहीं, गूगल के वरिष्ठ अधिकारी केंट वॉकर ने यूरोपीय संघ के फैसले की आलोचना की. उन्होंने कहा कि यह फैसला गूगल के उत्पादों को कमजोर करेगा और इसका नुकसान ग्राहकों को भी उठाना पड़ेगा.

यह पहली बार नहीं है जब यूरोप ने गूगल पर कार्रवाई की है. 2017 से अब तक यूरोपीय संघ कई बार गूगल पर अरबों डॉलर का जुर्माना लगा चुका है. इसमें एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम और ऑनलाइन विज्ञापन कारोबार से जुड़े मामले भी शामिल हैं. इस नए विवाद ने एक बार फिर अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ा दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों पक्ष सख्त रुख अपनाते हैं, तो इसका असर वैश्विक व्यापार, टेक कंपनियों और निवेशकों पर भी पड़ सकता है.

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