दिल्ली की घटना ने "नारी सम्मान" और "बेटी बचाओ" के खोखले नारों की पोल खोल कर : भाजपा के असली चरित्र को कर दिया है उजागर : शोभा ओझा
दिल्ली प्रदर्शन में पुलिस द्वारा छात्राओं के साथ की गई अश्लील और अक्षम्य हिंसात्मक हरकतों से देश हुआ शर्मसार
पुलिस के वेश में छिपे ऐसे दरिंदों को तुरंत बर्खास्त कर, उन पर हो कठोर दंडात्मक कार्रवाई
भोपाल.
जैसा कि हम सब जानते हैं, दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान पुलिसिया बर्बरता ने अपनी सभी हदें पार कर दी हैं। नीट पेपर लीक के बाद पूरे देश में 21 छात्र-छात्राओं द्वारा हताशा में अपनी जान दे देने के बाद फूटे छात्रों के आक्रोश को स्वर देने के लिए जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विशाल आंदोलन शुरू हुआ, तब वहां बड़ी संख्या में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने पहुंचे प्रदर्शनकारियों की भीड़ से बौखलाई मोदी सरकार ने अपने नाकारा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेने की बजाय, आंदोलनकारियों पर ही अपना गुस्सा उतार दिया।
बर्बरता का ऐसा नग्न तांडव इतिहास में पहली बार देखा गया
गुस्से से पागल जनरल 'डायर' ने दिल्ली पुलिस, सीआरपीएफ के जवानों के साथ ही भाड़े के गुंडो को भी कीलों भारी लाठियों, शाॅक स्टिक्स, ट्रक में लदे पत्थरों, आंसू गैस के गोलों और पैलेट गनों के साथ जंतर-मंतर पर भेजा और उसके बाद जो तांडव शुरू हुआ वह मंजर बेहद खौफनाक था। छात्रों के सिर, चेहरे, पैर कुछ नहीं देखा गया, बर्बरता का ऐसा नग्न तांडव इतिहास में पहली बार देखा गया।
इससे भी अधिक शर्मनाक घटनाक्रम जिसके कारण आज मैं यह पत्रकार वार्ता लेने को मजबूर हुई हूं, वह यह है कि वहां मौजूद छात्राओं को भी नहीं बख्शा गया, उनके साथ हुई हिंसा ने, न केवल उन्हें शारीरिक जख्म दिए बल्कि उनके साथ सभी तरह के पाशविक कृत्य, छेड़छाड़, अश्लील हरकत, गाली गलौज -क्या नहीं किया गया! वह खौफ़नाक मंजर साफ बता रहा था की "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" का नारा वास्तव में कितना खोखला था!
डायर की सेना ने कीलों भरी लाठियों से लड़कियों को मारा, उनके साथ अश्लील हरकतें, गाली गलौज सहित निकृष्टता की सारी हदें पार करते हुए, केवल उन्हें शारीरिक रूप से ही जख्मी नहीं किया, बल्कि उन्हें कभी न भर पाने वाला मानसिक जख्म भी दिया और सोशल मीडिया पर आए ऐसे तमाम वीडियोज़ के कारण पूरे देश की महिलाओं को आघात पहुंचा है, सदमा लगा है।
आप लोग भी देखिये ...वह खौफनाक मंज़र कैसा था!
यह कभी ना भुलाया जा सकने वाला ऐसा मंजर है, जिसने हमारे मन में मणिपुर, उन्नाव, हाथरस, प्रज्वल रेवन्ना कांड और महिला पहलवानों के साथ हुए घिनौने यौन शोषण की यादों को भी ताजा कर दिया है।
इस निंदनीय घटना के दोषी पुलिस कर्मियों को चिन्हित कर उन्हें दंड देने की बजाय, सरकार ने उनकी पहचान छिपाने के लिए उनके नेम प्लेट ही हटवा दी थी, जिससे वह खुलकर अपनी मनमानी कर सकें और कोई उन्हें पहचान न सके।
अब तो साफ लग रहा है कि केंद्र में बैठी सरकार और उसके नुमाइंदे यह सब इसलिए कर पा रहे हैं क्योंकि उनका मुखिया ही घोर महिला विरोधी है। उस मुखिया ने हमारी सर्वोच्च नेता को "कांग्रेस की विधवा" एक सम्मानित नेता की पत्नी को "50 करोड़ की गर्लफ्रेंड" जैसे शब्द तो इस्तेमाल किये ही, उसे पर लड़की की जासूसी करवाने के गंभीर आरोप भी लग चुके हैं। यह वही मुखिया है जिसका नाम जब एप्स्टीन की फाइलों में आया तो भारत पूरी दुनिया के सामने शर्मसार हुआ।
साफ लग रहा है कि बृजभूषण शरण सिंह, कुलदीप सेंगर, प्रज्ज्वल रेवन्ना जैसे लोगों को संरक्षण ही इसलिए मिल रहा है क्योंकि उनका मुखिया भी इसी मानसिकता से ग्रस्त है। भाजपा के लोगों ने गोलवलकर के बाद अब आसाराम जैसे रेपिस्टों और राम रहीम जैसे दुराचारियों को अपना नया आध्यात्मिक गुरु बना लिया है, ये वही तो लोग हैं, जिन्होंने बिल्किस बानो के बलात्कारियों को जेल से छूटने के बाद मालाएं पहनाईं थीं, सम्मान किया था! ये किस मुंह से नारी सम्मान की बातें करते हैं! क्या इनका ज़मीर मर गया है! क्या ये जनता को मूर्ख समझते हैं! क्या इन्होंने अपने शर्म बेच खाई है।
दिल्ली की घटना ने भी एक बार फिर सिद्ध कर दिया है की "नारी शक्ति वंदन", "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" जैसे इनके नारे कितने खोखले हैं! बेटी पढ़ने जा रही है तो यह पेपर लीक करवा रहे हैं और बेटी जब उस पेपर लीक का विरोध कर रही है तो ये उसे लाठियों से पिटवा रहे हैं, उसकी इज्जत और सम्मान को तार-तार कर रहे हैं।
महिला विरोधी इसी सोच से ग्रसित भाजपा ने महिला आरक्षण बिल पास होने के बाद भी उसे लागू नहीं किया, वो नहीं चाहते कि महिलाएं शासन में आएं, इस देश की नीतियों का निर्धारण करें। उनके वैचारिक पितृ पुरुष और आर एस एस के पूर्व सर संघ चालक गुरु गोलवलकर ने तो यहां तक लिखा है कि -"इतिहास साक्षी है कि जहां कहीं महिलाओं ने शासन किया है, वहां अराजकता इस प्रकार फैली है कि इसका उल्लेख नहीं किया जा सकता!"
गुरु गोलवलकर ने केवल यही नहीं लिखा, उनके महिला विरोधी विचारों से उनकी किताबें भरी पड़ी हैं, शायद इसीलिए सन् 1925 से लेकर 2026 तक अपने 101 वर्षों के इतिहास में आरएसएस ने कभी किसी महिला को अपना सर संघ चालक नहीं बनाया! 1952 से लेकर 1980 तक अपने 28 वर्षों के इतिहास में जनसंघ में किसी महिला को अपना अध्यक्ष नहीं बनाया और 1980 से लेकर 2026 तक अपने 46 वर्षों के अब तक के इतिहास में भारतीय जनता पार्टी ने भी किसी महिला को अपना अध्यक्ष नहीं बनाया है -क्या इसी से सारी बात नहीं समझ आ जाती।
परिसीमन बिल की आड़ में महिला आरक्षण को भी लटकाए रखना भाजपा की इसी मानसिकता का परिणाम है...
दुर्भाग्य से आज महिला विरोधी ऐसी मानसिकता से ग्रसित भाजपा आज कई राज्यों में शासन कर रही है और इसीलिए कोई आश्चर्य नहीं है कि वहां महिला अपराधों की संख्या बेतहाशा बढ़ रही है, यदि हम अपने मध्य प्रदेश के आंकड़ों पर ही गौर करें तो यहां रोजाना औसतन 20 बलात्कार और 33 महिलाओं के अपहरण हो रहे हैं। अनुसूचित जाति/जनजाति की महिलाओं के विरुद्ध औसतन 41 अपराध रोज दर्ज हो रहे हैं, जिसमें से 7 मामले बलात्कार और सामूहिक बलात्कार के होते हैं।
पिछले वर्ष के जो आंकड़े सामने आए हैं, उनमें जनवरी 2024 से लेकर जून 2025 के बीच 21,175 महिलाएं और नाबालिग लड़कियां लापता हुईं। इस अवधि में 10,840 बलात्कार के मामले दर्ज हुए, जिनमें 4805 महिलाएं और 6035 नाबालिग थीं । एनसीआरबी के आंकड़ों में भी मध्य प्रदेश महिला अपराधों के मामले में शीर्ष राज्यों में शुमार है लेकिन भाजपा सरकार महिलाओं, बेटियों और बहनों की सुरक्षा की जगह "नारी सम्मान" और "बेटी बचाओ" जैसे जुमले देती रहती है।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, जंतर मंतर पर हिंसा करने वाले दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई और प्रधानमंत्री छात्रों से माफी मांगें
यह भी आश्चर्यजनक और शर्मनाक है कि प्रदेश सरकार के जिस मंत्री विजय शाह ने हमारी बहादुर सैनिक बहन सोफ़िया कुरैशी का अपमान किया, वह आज भी मंत्रिमंडल में कायम है! क्या प्रदेश के मुख्यमंत्री यह बताने का कष्ट करेंगे कि ऐसे मंत्री को अब तक मंत्रिमंडल से बर्खास्त क्यों नहीं किया गया? आज तक उन्हें मंत्री बनाए रखने के पीछे आखिर कौन से "नारी सम्मान" की "गुप्त भावना" छिपी हुई है, जो किसी को दिखाई नहीं दे रही है!
साफ है कि मध्य प्रदेश से लेकर दिल्ली तक भाजपा की सरकारों का महिला विरोधी चेहरा अब पूरी तरह से बेनकाब हो चुका है और इसलिए छात्रों की जो मांगे हैं और जिनको देश के करोड़ों युवाओं की उम्मीद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष माननीय राहुल गांधी जी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी जी ने अपना स्वर और समर्थन दिया है.
-धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, जंतर मंतर पर हिंसा करने वाले दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई और प्रधानमंत्री छात्रों से माफी मांगें, उसके साथ ही यह भी सुनिश्चित हो कि जिन पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिलाओं पर लाठियां बरसाई हैं, उनके साथ अश्लील, शर्मनाक और अक्षम्य हिंसात्मक हरकतें की हैं, उन्हें तत्काल चिन्हित करें, हिरासत में लें, बर्खास्त करें और उन पर ऐसी कठोर दंडात्मक कार्रवाई करें, जो नज़ीर बन सके! अगर ऐसा नहीं होता है तो देश यह मानने को बाध्य होगा कि भाजपा न कभी महिला हितैषी थी, न है और न ही कभी हो सकती है!
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