📅 Sunday, 06 September 2026 | 01:36 PM IST
लाइव सेंसेक्स: 76,515.43 ▲ +362.53 (+0.48%) निफ्टी 50: 23,897.70 ▲ +24.30 (+0.10%) 🪙 सोना 24K (10g): ₹154,800 🥈 चांदी (1kg): ₹250,000 ⛅ इंदौर: 26°C (आंशिक बादल)
इंदौर

चंदा सहयोग है, मजबूरी नहीं...त्योहार हमारी आस्था, संस्कृति और एकता के प्रतीक

📅 06 September 2026, 11:50 AM ✍️ paliwalwani ⏱️ 2 मिनट में पढ़ें
शेयर करें:
WhatsApp Facebook Twitter Telegram Instagram
चंदा सहयोग है, मजबूरी नहीं...त्योहार हमारी आस्था, संस्कृति और एकता के प्रतीक
चंदा सहयोग है, मजबूरी नहीं...त्योहार हमारी आस्था, संस्कृति और एकता के प्रतीक
  • त्योहार हमारी आस्था, संस्कृति और एकता के प्रतीक हैं। इनके आयोजन के लिए चंदा स्वेच्छा से, अपनी सामर्थ्य के अनुसार और खुशी-खुशी दिया जाए, तो उसका महत्व और भी बढ़ जाता है। लेकिन किसी दुकानदार या नागरिक पर जोर-जबरदस्ती, मनमानी रकम या पर्ची देकर चंदा लेने की परंपरा पर विचार होना चाहिए।
  • व्यापारी को केवल चंदे के समय याद करना भी उचित नहीं। जब व्यापार बढ़ाने, ग्राहक बढ़ाने या किसी परेशानी में सहयोग की जरूरत होती है, तब भी समाज और स्थानीय संगठन आगे आएँ—सहयोग दोतरफा होना चाहिए।

    और एक महत्वपूर्ण बात—

    जनता से लिया गया चंदा जनता के प्रति जवाबदेह भी होना चाहिए।

    कितना चंदा प्राप्त हुआ, कहाँ से प्राप्त हुआ और आयोजन के बाद कितना व कहाँ खर्च हुआ—इसका स्पष्ट एवं पारदर्शी विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

    आज हर गली-मोहल्ले में अनेक आयोजन और बड़े-बड़े पंडाल होते हैं।

    ऐसे में नागरिक और दुकानदार के मन में एक स्वाभाविक सवाल उठता है—

    “सालभर में कितनी बार चंदा दें और हर बार कितना दें?”

    आइए, त्योहारों की खुशी को बनाए रखें और ऐसी व्यवस्था बनाएं जिसमें—

    चंदा स्वैच्छिक हो,

    रकम सामर्थ्य के अनुसार हो,

    कोई दबाव न हो,

    और हिसाब पूरी तरह पारदर्शी हो।

    जागरूक नागरिक • जिम्मेदार आयोजन • पारदर्शी व्यवस्था 

    📲

    पालीवाल वाणी WhatsApp चैनल से जुड़ें

    ताज़ा ब्रेकिंग न्यूज़ और समाज के सभी समाचार सबसे पहले अपने फोन पर पाएं।

    चैनल से जुड़ें →

    संबंधित खबरें

    सभी देखें →
    WhatsApp हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें