ज्योतिषी
धनु संक्रांति/ खरमास 16 दिसंबर शुरू होकर 14 जनवरी 2026 तक रहेगा : बाबू लाल शास्त्री
paliwalwani
सूर्य का धनु राशि में प्रवेश (धनु संक्रांति) एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटना है, जो खरमास की शुरुआत करती है। यह खरमास 16 दिसंबर 2025 से शुरू होकर 14 जनवरी 2026 तक रहेगा।
सूर्य देव जो राजा हेअपने गुरु वृहस्पति देव की धनु राशि के स्वामी गुरु से मन्त्रणा करने एवं गुरु का आशीर्वाद लेने से गुरु का प्रभाव कम हो जाता है। और गुरु का प्रभाव कम होने की वजह से इस माह में शुभ कार्य पर रोक लग जाती है। क्यो कि राजा एव राज गुरु दोनो सृष्टि के संचालन मे विचार विमर्श करते है, मनु ज्योतिष एव वास्तु शोध सस्थान टोक के निदेशक बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि,सुर्य देव राजा का देव गुरु वृहस्पति की राशि मे प्रवेश राजा का गुरु से आशीर्वाद लेने एवं सृष्टि संचालन मे विचार-विमर्श मार्ग दर्शन लेने से
सूर्य ग्रह का धनु राशि में प्रवेश खरमास की शुरुआत करता है, सूर्य जब तक धनु राशि में गोचर करता है तो इस समय के दौरान शुभ कार्य करना जैसे शादी विवाह, ग्रहप्रवेश आदि कार्य रुक जाते हैं।
लेकिन खरमास मे स्नान, जप- तप, दान और सूर्य पूजा के लिए शुभ होता है।
सूर्य ग्रह का धनु राशि में प्रवेश अलग- अलग राशि पर अलग- अलग प्रभाव (जैसे धनु, मेष, सिंह) को धन लाभ, सम्मान और सफलता मिल सकती है।
कर्क, तुला वृश्चिक, कुम्भ मीन राशि वालो को मध्यम वृषभ, मिथुन, कन्या, मकर, ) को सावधानी रखनी
चाहिए और ग्रह- नक्षत्र अनुसार उपाय करने चाहिए।
धनु संक्रांति 16 दिसंबर 2025, मंगलवार को मनाई जाएगी, जिसका पुण्यकाल सुबह 07:09 बजे से दोपहर 12:23 बजे तक रहेगा, और महा पुण्यकाल सुबह 07:09 बजे से सुबह 08:53 बजे तक है, जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेंगे और खरमास की शुरुआत होगी और यह खरमास 14 जनवरी 2026 मकर संक्रांति तक रहेगा बाबू लाल शास्त्री ने बताया कि
सूर्य देव को हर सुबह स्नान के बाद जल अर्पित करें और 'ॐ सूर्याय नमः' का जाप करें।
दान-: तिल, गुड़, कंबल, जूते, या ऊनी वस्त्र दान करना शुभ होता है।धार्मिक कार्य-: मंत्र जप- नाम जप, श्रीहनुमान चालीसा का पाठ, श्री विष्णु सहस्त्रनाम व श्री गीता के पाठ करना लाभकारी होता है। धनु संक्रांति एक परिवर्तन का समय है जो जहां शुभ कार्यों पर रोक लगाता है, वहीं आध्यात्मिक उन्नति और सूर्य की कृपा पाने का अवसर भी देता है।





