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आपकी कलम / रोज खुलता है किताबों में...

रोज खुलता है किताबों में...
Lucky nimesh June 04, 2017 04:45 PM IST

यहाँ हर ख्वाब सजता है किताबो में !
सुकूँ हर रोज मिलता है किताबों में !!
नहीं भटको कहीं पे तुम चले आओ !
कि रस्ता रोज खुलता है किताबों में !!
निराशा भी नही फटके तेरे दिल में !
कि सूरज रोज उगता है किताबों में !!
यही तो है जमाने भर कमाया जो !
छिपाके इल्म रखता है किताबो में !!
अमीरी देख लो मासूम बच्चे की !
हजारो ख्वाब बुनता है किताबो में !!
सलामी दूँ तुझे इस बात पे मैं भी !
सुबह से शाम करता है किताबो में !!

Lucky nimesh

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