महापौर अपमान विवाद : ज्ञापन के बाद गरमाई राजनीति, आज मौन धरने पर बैठेंगे मेयर

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​उज्जैन. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के रोड-शो के दौरान उज्जैन के महापौर मुकेश टटवाल को स्वागत रथ से नीचे उतारे जाने का विवाद अब बड़े राजनीतिक और सामाजिक संग्राम में बदल गया है। बैरवा समाज द्वारा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर उच्चस्तरीय जांच की मांग के बाद इस मामले में कई बड़े अपडेट्स सामने आए हैं।  

​महापौर खुद बैठेंगे मौन धरने पर

सार्वजनिक उपेक्षा से आहत महापौर मुकेश टटवाल ने 20 सितंबर को सुबह 11 बजे से फ्रीगंज स्थित संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष मौन धरने पर बैठने का ऐलान कर दिया है। महापौर का कहना है कि वे शहर के प्रथम नागरिक हैं और पार्टी पदाधिकारियों (जिला प्रभारी व कार्यक्रम प्रभारी) के कहने पर ही रथ पर सवार हुए थे, लेकिन उन्हें अचानक नीचे उतार दिया गया। वे बाबा साहेब की प्रतिमा के सामने बैठकर अपमान सहने की शक्ति और जनसेवा के संकल्प के लिए प्रार्थना करेंगे।  

​प्रोटोकॉल सूची और बीजेपी में अंदरूनी गुटबाजी पर उठे सवाल

घटनाक्रम के बाद अब रथ पर सवार होने की प्रोटोकॉल सूची को लेकर बहस छिड़ गई है। सूत्रों के मुताबिक, हेलीपैड से रवाना हुए रथ के लिए तय सूची में महापौर का नाम शामिल नहीं था, जबकि मुख्य मंच की सूची में उनका नाम था। हालांकि, कार्यक्रम प्रभारी जयपाल सिंह चावड़ा ने माना कि महापौर रथ पर चढ़े थे, लेकिन उन्हें किसने और क्यों उतारा, इसकी जानकारी संगठन को भी स्पष्ट नहीं है। वहीं, स्थानीय राजनीति में इसे भाजपा की अंदरूनी खींचतान के रूप में भी देखा जा रहा है।  

​विपक्ष हमलावर, सार्वजनिक माफी की मांग

मामला तूल पकड़ते ही कांग्रेस भी पूरी तरह हमलावर हो गई है। तराना से कांग्रेस विधायक महेश परमार और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने इसे भाजपा का दलित विरोधी चरित्र करार देते हुए कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे शहर के प्रथम नागरिक और दलित समाज का अपमान है। कांग्रेस ने घटना के जिम्मेदार नेताओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।

धन्यवाद मेरा उज्जैन-आप सभी को प्रणाम

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