दो धाराओं का महामिलन - इंदौर की धरा पर जब मिले दो महासागर

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राजेश जैन दद्दू 

इंदौर. पर्वाधिराज पर्युषण और चातुर्मास की पावन बेला में इंदौर में जैन धर्म के इतिहास का वह स्वर्णिम क्षण आया, जिसकी प्रतीक्षा समाज जन एवं गुरु भक्तों को  थी। दो महान धाराओं का मिलन हुआ।

धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कहा कि ज्ञान, तप और करुणा की दो दिव्य धाराएँ -श्रंमण संस्कृति के महामहिम पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज एवं समाधीप्ट आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के निर्यापक तीर्थ चक्रवर्ती महाश्रमण मुनिपुंगव 108 सुधासागर जी महाराज  एवं परम पूज्य साध्य सागर जी का मंगल मिलन मल्हारगंज स्थिति शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर मल्हारगंज में सेकंडों की संख्या में समाज जन और गुरु भक्ततो की सन्निधि। में महामंगल मिलन हुआ।

यह दृश्य देखते ही समाज जन श्रावकों की आँखें छलक उठीं और जयकारों से आकाश गूँज उठा - नमोस्तु शासन जयवंत हो। जय हो वीतराग श्रंमण संस्कृति दोनो गुरुओं के जयकारों से गूंजा उठा महामिलन। दद्दू ने बताया कि कैसे दोनों आचार्य संघों ने एक-दूसरे को नमन किया, गले मिले और धर्म प्रभावना पर चर्चा की। एक ओर विशुद्धता की धारा, दूसरी ओर सुधा की धारा - दोनों का संगम प्रयागराज से भी पवित्र बन गया। समाज जन गुरु भक्त प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गुरुदेवों ने कहा - "संघ भिन्न हो सकते हैं, लेकिन सिद्धांत एक है - आत्म कल्याण।"

इस मिलन ने यह संदेश दिया कि जैन एकता ही जिनशासन की असली शक्ति है। यह मिलन केवल दो मुनियों का नहीं, दो विचारधाराओं, दो साधना पद्धतियों और लाखों भक्तों के दिलों का महामिलन था। इस अवसर पर सामाजिक संसद अध्यक्ष आनंद  नवीन  गोधा, हर्ष  जैन प्रिंसिपल टोंग्या, राजेश पांड्या अजयपाल जैन मनमोहन झांझरी सहित सकल जैन समाज उपस्थित था।

  • प्रेषक : मीडिया प्रभारी, दिगंबर जैन समाज (सामाजिक संसद), इंदौर
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