त्योहार और उपचुनाव की जल्द घोषणा की संभावना को देखते हुए शिवराज सरकार भी कर्मचारियों और पेंशनरों का महंगाई भत्ता (DA) व राहत बढ़ा सकती है। वित्त विभाग ने प्रस्ताव बनाकर मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दिया है, अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री लेंगे। अभी प्रदेश के कर्मचारियों को 12महंगाई भत्ता मिल रहा है, जबकि केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों के लिए इसे बढ़ाकर 28कर चुकी है।
मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि सरकार 7 लाख कर्मचारियों को महंगाई भत्ता और पेंशनरों को राहत भत्ता देने का आदेश जल्दी करेगी। माना जा रहा है कि सरकार कर्मचारियों को 5महंगाई भत्ता देकर कुछ राहत देगी, क्योंकि केंद्र सरकार के महंगाई भत्ता और राहत बढ़ाने के बाद कुछ राज्यों ने भी कर्मचारियों के लिए इसमें वृद्धि कर दी है। अब प्रदेश के कर्मचारी और पेंशनर भी इसे लेकर मांग कर रहे हैं। बता दें कि प्रतिशत महंगाई भत्ते में वृद्धि पर सरकार के ऊपर लगभग 350 करोड़ रुपए का वित्तीय भार आएगा, हालांकि इस बीच कर्मचारियों को वार्षिक वेतनवृद्धि का लाभ दिया जा चुका है।
माना जा रहा है कि खंडवा लोकसभा, पृथ्वीपुर, रैगांव और जोबट विधानसभा के उपचुनाव की जल्द घोषणा की संभावना है। त्योहार भी शुरू हो रहे हैं। इसे देखते हुए सरकार महंगाई भत्ता और राहत बढ़ाने का निर्णय कर सकती है। आर्थिक गतिविधियां भी अब प्रदेश में बढ़ गई हैं। राजस्व संग्रहण की स्थिति में भी तेजी से सुधार हो रहा है।
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कमलनाथ सरकार ने बढ़ाया था 5DA, लेकिन मिला नहीं
प्रदेश के कर्मचारियों को अभी 12DA मिल रहा है। इसमें 5वृद्धि कमलनाथ सरकार ने की थी, लेकिन कोरोना संकट की वजह से इसके क्रियान्वयन पर रोक लगा दी गई थी। प्रदेश के कर्मचारियों को 2019 से महंगाई भत्ते की देय किस्त नहीं मिली है।
ऐसे तय होता है DA
देश भर के करीब पौने दो करोड़ शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों का जनवरी और जुलाई के महीने में महंगाई भत्ता कितना बढ़ेगा यह प्राइज इंडेक्स के आधार पर तय होता है। देश भर के 150 जगह के प्राइज इंडेक्स संग्रहित करके इसे तय किया जाता है। मप्र से इन जगहों में भोपाल, मंडीदीप, इंदौर, पीथमपुर, ग्वालियर, मालनपुर, जबलपुर और छिंदवाड़ा शामिल हैं। इन स्थानों के प्रमुख चिह्नित बाजारों से फुटकर वस्तुएं जो रोजमर्रा के जीवन में लोगों के उपयोग में शामिल हैं। उनकी कीमतें ली जाती हैं। इन कलेक्शन को हर सप्ताह लेबर ब्यूरो शिमला भेजा जाता है। वहां, कितनी महंगाई बढ़ी, उस हिसाब से DA तय होता है। फिलहाल बेस ईयर 2001-2002 को माना गया है। इस साल में फुटकर वस्तुओं की कीमत जीरो तय कर तब से अभी तक बढ़ी महंगाई के हिसाब से मूल्य सूचकांक कितना बढ़ा, यह तय होता है।