चौथे दिन जारी प्रहलाद पाण्डेय का अनिश्चितकालीन उपवास : रीगल पर जलेगी ‘आशा की किरण’
इंदौर.
इंदौर शहर को अवैध बैनर, पोस्टर, होर्डिंग और स्वागत द्वारों से मुक्त कराने की मांग को लेकर प्रहलाद पाण्डेय का अनिश्चितकालीन उपवास आज चौथे दिन भी जारी रहा।
पाण्डेय का स्पष्ट कहना है कि सार्वजनिक स्थान किसी राजनीतिक दल, नेता या व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं हैं। यदि किसी भी व्यक्ति या संगठन द्वारा नियमों का उल्लंघन कर सार्वजनिक स्थानों पर प्रचार सामग्री लगाई जाती है, तो प्रशासन को बिना किसी भेदभाव के उसे हटाने की कार्रवाई करनी चाहिए।
“अब केवल आश्वासन नहीं, जमीन पर कार्रवाई चाहिए”
प्रहलाद पाण्डेय ने कहा कि इंदौर की जनता वर्षों से स्वच्छता और बेहतर सार्वजनिक व्यवस्था के लिए अपनी पहचान बना रही है। ऐसे में शहर की सड़कों, चौराहों और सार्वजनिक संरचनाओं पर नियमों के विपरीत लगाए गए बैनर-पोस्टर इस व्यवस्था के सामने गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर नियमों के समान और निष्पक्ष पालन की मांग करना है।
उपवास के चौथे दिन स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े
उपलब्ध जांच के अनुसार चौथे दिन :
- वजन: 55 किलोग्राम (पिछले 4 दिन में लगभग 4 किलो वजन घट गया है)
- BP: 80/120
- FBS: 59
- Pulse: 97/80
बच्चों से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक समर्थन का दावा : आंदोलन को बच्चों, विद्यार्थियों, युवाओं, परिवारों और वरिष्ठ नागरिकों सहित समाज के विभिन्न वर्गों से समर्थन मिलने की बात आयोजकों ने कही है।
रीगल चौराहे पर समर्थकों ने नारे लगाए :
● “तानाशाही नहीं चलेगी, नहीं चलेगी!”
●“व्यवस्था सड़ चुकी है, इसे बदल के रहेंगे!”
●“अवैध बैनर-पोस्टर्स तुरंत हटाओ!”
● रविवार शाम 6 बजे रीगल पर “आशा की किरण”
संगीता पाण्डेय ने इंदौर के नागरिकों से अपील की है कि रविवार शाम 6 बजे रीगल चौराहे पर महात्मा गांधी जी की प्रतिमा के पास एक-एक मोमबत्ती लेकर पहुंचें।
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम “आशा की किरण” के रूप में आयोजित किया जा रहा है।
उन्होंने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में अंतिम शक्ति जनता की होती है और नागरिकों को अपने शहर के सार्वजनिक जीवन में अपनी जिम्मेदारी, जनधर्म निभानी चाहिए।
प्रहलाद पाण्डेय की इंदौरवासियों से सीधी अपील
प्रहलाद पाण्डेय ने कहा “अपने घर से बाहर निकलकर अपने मोहल्ले और कॉलोनी के आसपास देखिए। जहां भी आपको नियमों के विरुद्ध लगा हुआ बैनर या पोस्टर दिखाई दे, उसका फोटो और वीडियो बनाइए और सोशल मीडिया पर साझा कीजिए। जनता जागेगी तो व्यवस्था को भी जवाब देना पड़ेगा।” उन्होंने नागरिकों से शांतिपूर्ण और कानूनसम्मत तरीके से इस मुद्दे को उठाने की अपील की।
मुख्य मांग : आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि इंदौर शहर में लगे सभी अवैध बैनर, पोस्टर, होर्डिंग, स्वागत द्वार एवं अन्य अनधिकृत प्रचार सामग्री की पहचान कर उन्हें हटाया जाए तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध लागू कानून एवं स्थानीय नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए। प्रहलाद पाण्डेय ने घोषणा की है कि मांग पर ठोस प्रशासनिक कार्रवाई होने तक उनका अनिश्चितकालीन उपवास जारी रहेगा।
अवैध होर्डिंग के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता प्रहलाद पांडेय की पिटाई, पुलिस ने FIR नहीं लिखी; क्या हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना है?
- इंदौर में सामाजिक कार्यकर्ता प्रहलाद पांडेय (प्रल्हाद पाण्डेय) पर बुधवार शाम मरीमाता चौराहे पर अवैध होर्डिंग, बैनर और पोस्टर के खिलाफ वीडियो बनाने और आवाज उठाने के दौरान कथित तौर पर भाजपा विधायक गोलू शुक्ला के करीब 15 समर्थकों ने हमला किया। पांडेय का आरोप है कि हमलावरों ने उन्हें घेरकर मारपीट की, मोबाइल छीना, वीडियो डिलीट करवाए और रिकॉर्डिंग डिवाइस तोड़ दिया। घटना के बाद बाणगंगा थाने में FIR दर्ज नहीं हुई। पांडेय पत्नी संगीता पांडेय के साथ रीगल चौराहे स्थित गांधी प्रतिमा के नीचे उपवास/धरने पर बैठ गए हैं।
पांडेय ने भावुक वीडियो जारी कर कहा कि वे पिछले तीन महीनों से सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग और अवैध होर्डिंग-पोस्टर के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे थे। उन्होंने कहा, “मैं चौराहे पर खड़े होकर बता रहा था कि जनता ने जिन विधायकों को चुना है, वे सरकारी संपत्ति पर कब्जा करते हैं। आवाज उठाने पर 15 लोग आए, मारपीट की, फोन छीना और डिवाइस तोड़ दिया।” उन्होंने मामले को जनता के फैसले पर छोड़ दिया। विधायक गोलू शुक्ला (इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 3) की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पांडेय बाणगंगा थाने गए लेकिन पुलिस ने तुरंत FIR दर्ज नहीं की। शिकायत ली गई और कहा गया कि जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी। इसके बाद दंपत्ति गांधी प्रतिमा के नीचे बैठ गए। कई सामाजिक कार्यकर्ता और संस्थाएं समर्थन में पहुंच रही हैं। पांडेय का कहना है कि जब तक शहर से अवैध होर्डिंग-पोस्टर नहीं हटते, वे उपवास जारी रखेंगे।
यह दंपत्ति पहले भी चर्चा में रहा है। कुछ महीने पहले नगर विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के आवास के बाहर संविधान की प्रति लेकर प्रदर्शन करने पर पुलिस ने उन्हें उठा लिया था और जेल भेजा गया था।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ अवैध होर्डिंग, यूनिपोल और बैनर के मामले में पिछले कई महीनों से सख्त रुख अपनाए हुए है। मार्च 2026 में न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने सुदेश गुप्ता की जनहित याचिका पर अंतरिम आदेश देते हुए इंदौर नगर निगम आयुक्त को निर्देश दिया था कि डिवाइडर और फुटपाथ पर नियमों के विपरीत लगे होर्डिंग्स की पहचान कर कानून के अनुसार कार्रवाई करें। मध्य प्रदेश आउटडोर एडवर्टाइजमेंट मीडिया रूल्स 2017 के तहत डिवाइडर और फुटपाथ पर होर्डिंग लगाना प्रतिबंधित है।
बाद में कोर्ट ने शिकायत मिलने पर 24 घंटे के भीतर कार्रवाई और दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश भी दिए। निगम ने समितियां बनाईं और कुछ कार्रवाई भी की, लेकिन कार्यकर्ता का आरोप है कि अवैध होर्डिंग अभी भी शहर में लगे हुए हैं और उनके खिलाफ आवाज उठाने वाले को निशाना बनाया जा रहा है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अदालत के स्पष्ट आदेशों के बावजूद अवैध होर्डिंग बने रहना और उन पर कार्रवाई न होना प्रशासनिक लापरवाही हो सकती है। किसी नागरिक को सिर्फ इसलिए पीटना कि वह इन उल्लंघनों को उजागर कर रहा है, अदालत की गरिमा और आदेशों के क्रियान्वयन को कमजोर करने वाला माना जा सकता है। पुलिस द्वारा FIR न लिखना दिशानिर्देशों के विपरीत भी देखा जा सकता है।
हाईकोर्ट को अनुच्छेद 215 और अवमानना अधिनियम के तहत स्वतः संज्ञान लेने का अधिकार है, खासकर जब उसके अपने आदेशों का पालन न हो रहा हो, पुलिस निष्क्रिय दिखे और सार्वजनिक हित का मुद्दा हो। कई मामलों में हाईकोर्ट ने पुलिस निष्क्रियता, अदालती आदेशों की अवहेलना और कार्यकर्ताओं पर हमलों पर स्वतः संज्ञान लिया है। यह मामला इंदौर खंडपीठ के समक्ष लाया जा सकता है या कोर्ट स्वयं नोटिस ले सकता है।