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कमलनाथ सरकार में पटरी पर थी अर्थव्‍यवस्‍था, मोहन सरकार में क्‍यों बिगड़े हालात?

आपकी कलम Published by: paliwalwani Updated Fri, 30 Jan 2026 10:50 PM
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  • आर्थिक रूप से दोहरी मार झेल रही मप्र की मोहन सरकार

केन्‍द्र सरकार ने रोके लगभग 35 हजार करोड़ रूपये

4.21 लाख करोड़ के बजट वाला मध्यप्रदेश 4.65 लाख करोड़ के कर्ज में

दो साल में मोहन सरकार ने लिया करीब एक लाख करोड़ का कर्जा

विजया पाठक, एडिटर, जगत विजन

  • कर्ज में गले तक डूबी मोहन सरकार में मध्य प्रदेश की जनता भाजपा की डबल इंजन सरकार से डबल मुसीबत में फँस गई है। एक तरफ़ प्रदेश के ऊपर कर्ज़ का बोझ बढ़ता चला जा रहा है तो दूसरी तरफ़ केंद्र सरकार राज्य को उसके हिस्से का पैसा नहीं दे रही है। हक़ीक़त यह है कि मध्य प्रदेश के 25 विभागों के लिए केंद्र सरकार ने 01 अप्रैल 2025 से 20 जनवरी 2026 के बीच में एक रुपया नहीं दिया है।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के किसान कल्याण, कृषि विकास और ग्रामीण विकास विभाग से ही 7774.54 करोड़ रुपए नहीं मिल सके हैं। केंद्र सरकार से मध्‍यप्रदेश को चालू वित्त वर्ष में 44,355.83 करोड़ रुपए मिलने थे। अब तक 10 माह बीतने पर भी सिर्फ 9753.05 करोड़ रुपए ही मिल सके हैं। इस तरह सिर्फ 22 फीसदी फंड ही दिल्ली से आया है।

पीएचई विभाग को जल जीवन मिशन के लिए 8561.22 करोड़ दिए जाने हैं लेकिन दस माह में एक रुपए भी नहीं दिए गए। मेडिकल कॉलेजों में पीजी पाठ्यक्रम के लिए 150 करोड़ और नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए 250 करोड़ रुपए देने के लिए कहा है लेकिन एक रुपए भी नहीं दिए गए। दुर्भाग्य की बात है कि केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार होने के बावजूद प्रदेश सरकार केंद्र से अपने हिस्से का पैसा प्राप्त नहीं कर पा रही है।

स्पष्ट है कि केंद्र सरकार मध्य प्रदेश के साथ भेदभाव कर रही है और प्रदेश के भाजपा नेता प्रदेश की जनता के हित को पार्टी हित के सामने गिरवी रख रहे हैं। यही स्थिति बनी रही तो पहले से ही वित्तीय संकट से गुज़र रहा मध्य प्रदेश भारी आर्थिक संकट में फँस जाएगा। सोचने वाली बात है कि आखिरकार मोहन सरकार अपनी ही केन्‍द्रीय सरकार से अपने हिस्‍से का पैसा निकलवाने में असमर्थ क्‍यों है।

कमलनाथ सरकार ने नहीं बिगड़ने दी अर्थव्‍यवस्‍था

प्रदेश में भले ही कमलनाथ सरकार ने केवल 15 महीने शासन किया लेकिन सरकार ने प्रदेश की वित्‍तीय स्थिति को कमजोर नहीं होने दिया। वित्‍तीय दायरे में ही रहकर प्रदेश को आगे चलाया। जबकि उसी समय प्रदेश के लाखों किसानों का कर्जा भी माफ किया था। तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री कमलनाथ ने दूरगामी सोच और नीतिगत फैसले लेकर राज्‍य की गति प्रदान की। लेकिन वर्तमान सरकार के पास ऐसा कोई विजन नहीं है।

बजट से ज्‍यादा हो गया मध्‍यप्रदेश का कर्जा

वर्तमान समय में मध्‍यप्रदेश इतिहास के सबसे बड़े आर्थिक संकट से जूझ रहा है। हालात इतने खराब हो गये हैं कि सरकार को कर्ज का ब्‍याज चुकाने के लिए भी कर्ज लेना पड़ रहा है। 4.21 लाख करोड़ के बजट वाला मध्य प्रदेश 4.65 लाख करोड़ के कर्ज में चल रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ का आरोप है कि मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार लगातार कर्ज लेकर ठेका देने और कमीशन बटोरने में लगी रहती है और जनता पर कर्ज का बोझ बढ़ता जाता है।

कमलनाथ ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार कर्ज का ब्याज चुकाने के लिए भी कर्ज ले रही है। यह गलत आर्थिक नीतियों और अपरिपक्व निर्णयों की देन है। उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सुझाव देते हुए कहा कि प्रदेश की जनता को और ज्यादा कर्ज के बोझ में दबाने की बजाय प्रदेश पर मौजूदा कर्ज को चुकाने और कर्ज मुक्त मध्य प्रदेश बनाने की दिशा में पहल करें।

मुफ्त की रेवड़ी बांटने में बढ़ रहा कर्जा

प्रदेश में मोहन सरकार की वर्तमान स्थिति तो यह बता रही है कि सरकार की आमदनी अठन्‍नी है और खर्चा रूपैया है। बावजूद इसके मोहन सरकार मुफ्त की रेवडि़या बांटने में कसर नहीं छोड़ रही है। खासकर लाड़ली बहना योजना की किस्‍त डालने के लिए हर माह कर्ज लेती है। हालात इतने बदतर हो गये हैं।

सोचन वाली बात है कि जब सरकार की स्थिति खराब है तो ऐसी योजनाओं को चलाने का क्‍या मतलब है। तत्‍कालीन वाहवाही लूटने के चक्‍कर में सरकार प्रदेश को गर्त में ले जा रही है। आज प्रदेश का प्रत्‍येक नागरिक लगभग 30 हजार का कर्जदार है। उसके बाद भी सरकार अपनी आमदनी बढ़ाने के बजाय फिजूलखर्ची कर रही है।

हालात ये हैं कि सरकार अपनी ब्रांडिंग करने के लिए करोड़ों रूपये फूंकने में एक बार भी नहीं सोचती है। पिछले दो साल में ही सरकार ने इंवेस्‍टर्स मीट के नाम पर अरबों रूपये खर्च किये हैं। विभिन्‍न शहरों में आयोजित आयोजनों में केन्‍द्रीय नेतृत्‍व को खुश करने के चक्‍कर में मोहन सरकार ने पैसों को पानी की तरह बहाया है। जिसका नतीजा आज तक जमीन पर नहीं दिखा है। इसके अलावा शासकीय आयोजनों की भव्‍यता, दिव्‍यता पर खर्च अलग से है। आखिर बीजेपी सरकार का यह कौनसा कल्‍चर है।

गलत नीतियों के चलते कर्ज के दलदल में मोहन सरकार

प्रदेश को समृद्ध और विकसित प्रदेश बनाने का मध्‍यप्रदेश सरकार का कोई रोडमेप नहीं है। आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए सरकार के पास न कोई नीति है और न ही नियत है। यदि सरकार के पास सही और सटीक नीतियां होती तो आज प्रदेश की यह स्थिति नहीं होती। नीतियां भी ऐसी बनाई जा रही है जो सिर्फ दिखावा भर हों। क्‍या दिखावे से प्रदेश का विकास होता है। विकास का दिखावा है और आर्थिक तरक्‍की की जुमलेबाजी हैं।

  • न किसानों पर, न नौजवान बेरोजगारों पर और न ही गरीबों के कल्‍याण पर फोकस है। पूरा सिस्‍टम कमीशनखोरी और भ्रष्‍टाचार में लिप्‍त है। सरकार पर अफसरशाही हावी हो रही है। सरकार के प्रशासनिक मुखिया तक को कहना पड़ रहा है कि कलेक्‍टर बगैर कमीशन के काम नहीं करते हैं। इससे बड़ा सबूत और क्‍या हो सकता है।
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