पुष्यमित्र भार्गव जी को महापौर पद का दायित्व संभालते हुए 4 साल पूरे : भ्रष्टाचार खत्म हुआ...4 साल में नगर निगम में एक भी कांड नहीं हुआ...!

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पुष्यमित्र भार्गव जी को महापौर पद का दायित्व संभालते हुए 4 साल पूरे हों गए। मैं भी रात 3 या 3.30 बजे सपने में गुलदस्ता लेकर मिलने पहुंच गया। गुलदस्ता दिया। फोटो खींचवाया। इतने में महापौर के ढाबा संचालक मित्र (सुना है जो अभी नगर निगम के बड़े ठेकेदार हैं) ने कहा कि महापौर जी के सम्मान में दो शब्द आप भी कह दो। वो भी विपक्ष से लिफाफा लिए हुए पत्रकार की तरह नहीं।।

स्ट्रीट लाइट के चकाचौंध प्रकाश ने चोरों की रोजी रोटी छीन ली

बुरा तो लगा भाई की बात का। फिर अपन तो अपन ठहरे। शुरू हो गए। बोला... महापौर जी के राज में इंदौर पूरी तरह संवर गया है। सड़के चकाचक है। कांच जैसी। भले आप अपनी शक्ल देख लो। चौराहे सिग्नल फ्री हो गए। जाम तो कही लग नहीं रहा है। 

जलुद से नर्मदा का पर्याप्त पानी आ रहा है। सभी टंकियां लबालब भरती है। 24 घंटे तक फुल प्रेशर से नल आ रहे हैं। साफ पानी ने लोगों की सेहत सुधार दी है। रही सही कसर हर वार्ड में बने संजीवनी क्लिनिक और वहां मिल रहे उत्तम स्वास्थ्य व्यवस्था ने पूरी कर दी। कई निजी अस्पतालों पर ताले लगने की नौबत आ चुकी है। हर प्लॉट साफ हैं।

बगीचे हरेभरे। स्ट्रीट लाइट के चकाचौंध प्रकाश ने चोरों की रोजी रोटी छीन ली। पुलिस के पास काम नहीं। सभी एसटीपी बन गए। नदी साफ हो गई। किशनपुरा में नाव चल रही है। 10 रुपए की टिकट के साथ सैलानियों की भीड़ लगी है। नदी में डुबकी लगाकर मेरा भी मन प्रसन्न हो गया। नाक से कपड़ा हटाकर बिना मुंह सिकोड़े सूर्य देव भी आचमन स्वीका रने लगे। अवैध काम बंद हो गए। भ्रष्टाचार खत्म हुआ। 4 साल में नगर निगम में एक भी कांड नहीं हुआ। लोग बोलते हैं और उनका काम हो जाता है।

अवैध कॉलोनी कटना बंद हो गई। बुलडोजर के डर से लोगों ने अवैध निर्माण बंद कर दिए। लोग अब जोनल कार्यालय पर नहीं जाते। घर बैठे ही एक क्लिक पर  जन्म प्रमाण पत्र बन रहे हैं। मृत्यु और विवाह प्रमाण पत्र बन रहे हैं। हाइटेक सिटी बसों ने सफर को आसान कर दिया । 

बस इतना कहकर मैंने अपनी बात समाप्त कर दी..। सामने से कोई रिएक्शन नहीं था..। मैं भी हैरान हो गया..। इससे ज्यादा क्या अच्छा बोल दूं..। तभी ढाबे वाले भैया बोले मुद्दे की बात तो करी नी दादा... क्या फालतू बात कर रहे हो। मैंने मासूमियत के साथ पूछा... भैया शुरू किसने किया था।

विपक्ष से लिफाफा लिए हुए पत्रकार की तरह नहीं

(विनोद शर्मा जी  एडिटर हिन्दुस्तान मेल की FB से)

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