राहुल गांधी मानहानि केस में बरी : ज्ञानेश कुमार को हटाएं, 30 सेकंड में आंदोलन रुक जाएगा
राहुल गांधी ने कोर्ट में क्या कहा...
उत्तर प्रदेश. कांग्रेस नेता राहुल गांधी के वकील काशी शुक्ला ने बताया कि याचिकाकर्ता पीड़ित यानी अग्रीव्ड व्यक्ति नहीं थे, ये इस केस में जीत का बड़ा आधार बना. इसके अलावा राहुल गांधी ने जो कहा था, उसको तोड़ मरोड़कर कोर्ट में पेश किया गया. इसके अलावा भी कुछ बिंदु थे, जिनके आधार पर उन्होंने कोर्ट में केस लड़ा.
उन्होंने कहा कि कोर्ट के फैसले के बाद राहुल गांधी ने कोर्ट का धन्यवाद देते हुए सफ़ाई दी कि उन्होंने किसी को बदनाम करने की नीयत से ऐसा कुछ नहीं कहा था. काशी शुक्ला ने फैसले को चुनौती देने के याचिकाकर्ता के बयान पर कहा कि वो स्वतंत्र हैं और वो चुनौती देंगे तो हम ऊपर की अदालत में लड़ने के लिए तैयार हैं.
हम गांधीवादी रास्ते पर चलकर, प्रेम, करुणा और दृढ़ता के साथ इन्हें हराएंगे. सत्यमेव जयते.''
राहुल गांधी ने रामलीला मैदान में रैली को लेकर किया पोस्ट
मानहानि मामले में बरी होने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रामलीला मैदान में रैली पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने व्यापारियों के विरोध के बीच कहा, ''दिल्ली के हर व्यापारी से: हम आपसे प्यार करते हैं, आपकी बात सुन रहे हैं. मेट्रो सरकार ने बंद की, सड़कें सरकार ने सील की, राजधानी पर ताला सरकार ने लगाया. जब वोट ही चोरी हो जाए, तो कुछ भी सुरक्षित नहीं - न आपकी दुकान, न आपकी बचत, न आपके बच्चों का भविष्य. मोदी जी से कहिए - आरोपी नंबर 4, ज्ञानेश कुमार को हटाएं, 30 सेकंड में आंदोलन रुक जाएगा.''
मामले से जुड़ी मुख्य बातें :
• मामला क्या था: मई 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान बेंगलुरु में एक जनसभा/प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
• शिकायतकर्ता: सुल्तानपुर के स्थानीय बीजेपी नेता और जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी।
• अदालत का फैसला: विशेष न्यायाधीश शुभम वर्मा ने करीब 8 साल पुराने इस मामले में राहुल गांधी को दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट ने मुख्य रूप से तीन आधारों पर यह फैसला सुनाया:
1. राहुल गांधी द्वारा कोर्ट में पेश की गई पूरी बयान की CD को एक मजबूत सबूत माना गया, जिसमें उनका इरादा किसी की मानहानि करना नहीं था।
2. अदालत ने शिकायतकर्ता विजय मिश्रा को 'पीड़ित पक्ष' नहीं माना, क्योंकि राहुल गांधी के बयान से विजय मिश्रा का कोई सीधा लेना-देना नहीं था।
3. कोर्ट ने विजय मिश्रा के आरोपों को मानहानि की श्रेणी में नहीं पाया।
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