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उज्जैन

उज्जैन: खड़े हनुमान मंदिर विवाद गरमाया, उमा भारती ने सीएम को लिखा पत्र, संतों का विरोध जारी

📅 10 September 2026, 05:34 PM ✍️ Paliwalwani ⏱️ 3 मिनट में पढ़ें
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उज्जैन: खड़े हनुमान मंदिर विवाद गरमाया, उमा भारती ने सीएम को लिखा पत्र, संतों का विरोध जारी
उज्जैन: खड़े हनुमान मंदिर विवाद गरमाया, उमा भारती ने सीएम को लिखा पत्र, संतों का विरोध जारी

उज्जैन. उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर को हटाने का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ रहा है। गुरुवार को साधु-संतों ने मंदिर स्थल पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने और बीच का रास्ता निकालने की अपील की है। प्रशासन के विस्थापन के फैसले के खिलाफ देशभर के श्रद्धालु और संत समाज एकजुट हो गए हैं, जिससे यह मुद्दा गरमा गया है।

इस विवाद के बीच, प्रयागराज कुंभ में चर्चित साध्वी हर्षानंद गिरी सहित कई प्रमुख संत गुरुवार को खड़े हनुमान मंदिर पहुंचे। उन्होंने प्रतिमा के समक्ष पूजन-पाठ कर प्रशासन के विस्थापन निर्णय का पुरजोर विरोध किया। साध्वी हर्षानंद गिरी ने कहा, "सनातनियों की आस्था भगवान हनुमान में है। मंदिर को हटाने के बजाय स्थायी रूप से भव्य बनाया जाना चाहिए।" पूर्व सीएम उमा भारती ने सीएम मोहन यादव को पत्र लिखकर मंदिर की बढ़ती ख्याति और भक्तों की आस्था का हवाला देते हुए इसे हटाने का विचार त्यागने की अपील की है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि वह साधु-संतों और भक्तों की भावनाओं का सम्मान करे। जिला प्रशासन ने पूर्व में कहा था कि पुजारी, संतों और संगठनों से चर्चा के बाद ही विस्थापन पर निर्णय होगा और किसी की आस्था को ठेस नहीं पहुंचाई जाएगी। हालांकि, संत समाज और विश्व हिंदू परिषद ने स्पष्ट कर दिया है कि वे चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन मंदिर को उसके वर्तमान स्थान से हटाने के पक्ष में नहीं हैं।

खड़े हनुमान मंदिर की ख्याति लगातार बढ़ रही है, जहां महाकाल दर्शन करने आने वाले भक्त भी अब इस चमत्कारी प्रतिमा के दर्शन को पहुंच रहे हैं। भक्तों का कहना है कि मंदिर को इसी स्थान पर और भव्य बनाया जाना चाहिए। इस बढ़ते जनसमर्थन और साधु-संतों के कड़े रुख के बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या नया रास्ता निकालता है, जिससे आस्था और विकास के बीच संतुलन बन सके।

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