ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: भारत में शक्ति प्रदर्शन, आर्थिक चुनौती और कूटनीतिक मंथन
भारत आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए पूरी तरह से तैयार है, जो वैश्विक मंच पर देश की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है। इस महत्वपूर्ण आयोजन में सदस्य देशों के शीर्ष नेता भाग ले रहे हैं, जिनमें ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन भी शामिल हैं। भारत पहुंचने से पहले, राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन ने भारत को एक महत्वपूर्ण राजनयिक केंद्र बताया, जो इस शिखर सम्मेलन के रणनीतिक महत्व को और बढ़ा देता है। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था कई जटिल चुनौतियों का सामना कर रही है, जिससे इस मंच की प्रासंगिकता और बढ़ गई है।
शिखर सम्मेलन से पहले, भारत के हवाई क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है, खासकर ईरानी विमानों की आवाजाही पर कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटा जा सके। सदस्य देशों के बीच पश्चिम एशिया के मुद्दों पर मतभेद सामने आए हैं, जिन्हें दूर करने और एक संयुक्त बयान पर सहमति बनाने के लिए शेरपा लगातार गहन विचार-विमर्श कर रहे हैं। आर्थिक मोर्चे पर, पिछले पांच वर्षों में ब्रिक्स देशों के साथ भारत का व्यापार दोगुना हुआ है, लेकिन ₹226 अरब डॉलर का व्यापार घाटा चिंता का एक बड़ा विषय बना हुआ है, जिस पर इस सम्मेलन में गहन चर्चा और समाधान की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली में ब्रिक्स नेताओं का विशेष स्वागत संदेश के साथ अभिनंदन किया, जो इस "शक्ति प्रदर्शन" को और भी महत्वपूर्ण बनाता है। यह शिखर सम्मेलन न केवल सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है, बल्कि वैश्विक शासन और आर्थिक स्थिरता में ब्रिक्स की भूमिका को भी नए सिरे से परिभाषित करेगा। भारत इन जटिल चुनौतियों के बीच संतुलन साधते हुए अपनी कूटनीतिक पकड़ मजबूत करने और अपने आर्थिक हितों को साधने का प्रयास करेगा, ताकि एक न्यायपूर्ण और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का मार्ग प्रशस्त हो सके और वैश्विक शांति व समृद्धि सुनिश्चित हो।
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