📅 Monday, 26 October 2026 | 03:48 AM IST
लाइव सेंसेक्स: 73,123.83 ▼ -125.57 (-0.17%) • निफ्टी 50: 22,600.00 ▼ -87.70 (-0.39%) • 🪙 सोना 24K (10g): ₹140,810 • 🥈 चांदी (1kg): ₹200,000 • ☀️ उज्जैन: 22°C (साफ आसमान)
उज्जैन

महाकाल मंदिर उज्जैन की संपत्ति पहली बार आई सामने: 472 करोड़ की एफडी, 16 करोड़ नकद, 90 एकड़ जमीन

📅 13 July 2026, 12:29 AM • ✍️ paliwalwani • ⏱️ 5 मिनट में पढ़ें
शेयर करें:
WhatsApp Facebook Twitter Telegram Instagram
महाकाल मंदिर उज्जैन की संपत्ति पहली बार आई सामने: 472 करोड़ की एफडी, 16 करोड़ नकद, 90 एकड़ जमीन
महाकाल मंदिर उज्जैन की संपत्ति पहली बार आई सामने: 472 करोड़ की एफडी, 16 करोड़ नकद, 90 एकड़ जमीन

उज्जैन.

उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति हर वर्ष श्रद्धालुओं से प्राप्त नकद और ऑनलाइन दान का ब्यौरा सार्वजनिक करती रही है, लेकिन पहली बार मंदिर समिति की कुल वित्तीय और स्थायी संपत्तियों की तस्वीर सामने आई है।

समिति के पास वर्तमान में करीब 472 करोड़ रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी), लगभग 90 एकड़ बेशकीमती जमीन और सोना-चांदी पर्याप्त मात्रा में है। मंदिर समिति की 472 करोड़ रुपए की एफडी यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ इंडिया में जमा है। इसके अलावा विभिन्न बैंक खातों में करीब 16 करोड़ रुपए की नकद राशि भी उपलब्ध है। हालांकि श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या के कारण मंदिर समिति का वार्षिक खर्च भी तेजी से बढ़कर करीब 135 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।

11 अक्टूबर 2022 को प्रधानमंत्री द्वारा श्री महाकाल लोक का लोकार्पण किए जाने के बाद मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ। पहले प्रतिदिन जहां 40 से 50 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए आते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर डेढ़ से दो लाख प्रतिदिन तक पहुंच गई है। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ मंदिर की आय और दान राशि में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।

मंदिर समिति को वित्तीय वर्ष 2025-26 (1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026) के दौरान रिकॉर्ड 142 करोड़ रुपए की आय हुई। इसमें केवल दान मद से ही 78 करोड़ रुपए प्राप्त हुए, जो पिछले छह वर्षों का सबसे अधिक दान है। यह राशि पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में करीब 27 करोड़ रुपए अधिक रही।

महाकाल लोक बनने से पहले मंदिर परिसर का क्षेत्रफल 2.82 हेक्टेयर था, जो अब बढ़कर 47 हेक्टेयर हो चुका है। वर्तमान में मंदिर समिति में 306 कर्मचारी कार्यरत हैं। इनके वेतन, सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई, रखरखाव, निर्माण कार्य, अन्नक्षेत्र, गोशाला, महाकालेश्वर वैदिक शोध संस्थान, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पर्व-त्योहारों की व्यवस्थाओं पर हर वर्ष लगभग 135 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। पहले मंदिर का मासिक खर्च करीब 2.5 करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 11 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है।

वर्ष 2025 के दौरान लगभग 6 करोड़ श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचे। इस अवधि में मंदिर को 107 करोड़ रुपए का दान प्राप्त हुआ, जिसमें 43 करोड़ रुपए दान पेटियों से, 64 करोड़ रुपए शीघ्र दर्शन टिकट एवं रसीदों से प्राप्त हुए।

इसी दौरान श्रद्धालुओं ने मंदिर को 592.36 किलो चांदी और 1.48 किलो सोना भी दान किया। वर्ष 2024 की तुलना में चांदी का दान लगभग 193 किलो अधिक रहा, जबकि सोने का दान मामूली रूप से कम दर्ज किया गया।

मंदिर समिति के पास वर्तमान में सोना-चांदी भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद है। इसकी अनुमानित कीमत लगाना बाकी है। इसके अलावा समिति के स्वामित्व में लगभग 90 एकड़ जमीन है, जिसकी कीमत भी करोड़ों रुपए में है। हालांकि इन जमीनों से जुड़े कुछ मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं।

मंदिर समिति को लड्डू प्रसादी की बिक्री से 65 करोड़ रुपए की आय प्राप्त हुई। इसके अतिरिक्त श्रद्धालुओं ने वर्षभर में करोड़ों रुपए मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण भी भगवान महाकाल को समर्पित किए, जिससे मंदिर समिति की संपत्ति में लगातार वृद्धि हो रही है।

बता दें कि महाकाल मंदिर में दान किए सोना-चांदी पर ने एक दिन पहले ही खबर दिखाई थी जिसके बाद संपत्ति के बारे में पता चला है। हालांकि सोना-चांदी कुल कितना है इसे सार्वजनिक तौर पर अभी भी घोषित नहीं किया गया है।

📲

पालीवाल वाणी WhatsApp चैनल से जुड़ें

ताज़ा ब्रेकिंग न्यूज़ और समाज के सभी समाचार सबसे पहले अपने फोन पर पाएं।

चैनल से जुड़ें →

संबंधित खबरें

सभी देखें →
WhatsApp हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें