Saturday, 21 February 2026

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बांग्लादेश में सिर्फ रहेंगे मुसलमान...! 2 लाख हिंदूओं और बौद्धों को नरसंहार की खुली धमकी

paliwalwani
बांग्लादेश में सिर्फ रहेंगे मुसलमान...! 2 लाख हिंदूओं और बौद्धों को नरसंहार की खुली धमकी
बांग्लादेश में सिर्फ रहेंगे मुसलमान...! 2 लाख हिंदूओं और बौद्धों को नरसंहार की खुली धमकी

बांग्लादेश.

डेस्क बांग्लादेश (Bangladesh) में उस्मान हादी की हत्या के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. इस घटना के बाद से देश में हिंदू (Hindus) और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों (Minority Communities) में डर बढ़ गया है. हाल ही में दीपू चंद्र दास की कथित तौर पर फर्जी ईशनिंदा के आरोप में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या किए जाने से यह डर और गहरा गया है.

एक ताजा घटना में चटगांव (Chittagong) के राउजान उपजिला में एक बैनर (Banner) सामने आया है, जिसमें हिंदू और बौद्ध समुदाय (Buddhist Communities) के दो लाख लोगों को मारने की साजिश का दावा किया गया है. यह बैनर उस इलाके से बरामद हुआ है, जहां मंगलवार को हिंदू समुदाय के घरों में आगजनी की गई थी. फिलहाल पुलिस ने बैनर को जब्त कर लिया है.

बांग्लादेशी सम्मिलित सनातनी जागरण जोट के प्रतिनिधि कुशल बरुण चक्रवर्ती ने बताया कि उन्होंने हिंसा से पीड़ित हिंदू परिवारों से मुलाकात की है. उनके मुताबिक, बैनर में लिखा था कि हिंदू और बौद्ध समुदाय को पूरी तरह खत्म करने की योजना बनाई गई और इसके लिए फंडिंग भी की गई. इस पूरे मामले में इस्लामी कट्टरपंथी तत्व उस्मान हादी की हत्या के पीछे भारत का हाथ होने का बिना सबूत दावा कर अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं.

स्थानीय मीडिया और पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि बैनर में भड़काऊ और डराने वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया था. हिंदू और बौद्ध समुदाय के करीब दो लाख लोगों को मारने की साजिश का दावा किया गया. अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ खुले तौर पर हिंसा की धमकी दी गई.

इलाके को साफ करने और अस्तित्व खत्म करने जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया. संदेश का मकसद डर फैलाना और सांप्रदायिक तनाव भड़काना बताया जा रहा है. यह बैनर उसी क्षेत्र से मिला, जहां मंगलवार को हिंदू समुदाय के घरों में आग लगाकर उन्हें जिंदा जलाने की कोशिश की गई थी. ऐसे में पुलिस मान रही है कि बैनर और आगजनी की घटना आपस में जुड़ी हो सकती हैं. इस तरह से पोस्टर सिर्फ धमकी नहीं, सामूहिक हिंसा की मानसिक तैयारी की तरह हैं, जो अल्पसंख्यकों का मनोबल तोड़कर उन्हें डराती हैं.

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