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संसद का मॉनसून सत्र बारिश में धुल गया : राहुल बोले-मोदी और शाह की नींद उड़ा दी

📅 14 August 2026, 12:42 AM • ✍️ paliwalwani • ⏱️ 7 मिनट में पढ़ें
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संसद का मॉनसून सत्र बारिश में धुल गया : राहुल बोले-मोदी और शाह की नींद उड़ा दी
संसद का मॉनसून सत्र बारिश में धुल गया : राहुल बोले-मोदी और शाह की नींद उड़ा दी

नई दिल्ली. संसद का मॉनसून सत्र शुक्रवार को हंगामे के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। पूरे सत्र में विपक्ष के विरोध और नारेबाजी का मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा।

दोनों सदनों के निर्धारित कामकाज का करीब 80 फीसदी समय हंगामे की भेंट चढ़ गया। इस दौरान जनता के करीब 142 करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर विस्तार से चर्चा नहीं हो सकी। हालांकि, सरकार ने अपने विधायी कामकाज का बड़ा हिस्सा पूरा किया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के मुताबिक, विपक्ष के हंगामे के बावजूद सरकार ने 12 विधेयक पारित कराए। उन्होंने कहा कि नुकसान उन सांसदों का हुआ जो अपने क्षेत्रों के मुद्दे उठाना और गंभीर चर्चा करना चाहते थे।

आखिरी दिन भी हंगामा, फिर सिर्फ वंदे मातरम्

सत्र के आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत एनडीए के कई बड़े नेता सदन में मौजूद थे। इसके बावजूद सदन के बाहर विपक्षी सांसदों का विरोध जारी रहा। सुबह 11 बजे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सदन में पहुंचे। विपक्षी सांसदों ने करीब एक मिनट तक नारेबाजी की। इसके बाद वंदे मातरम् के गायन के लिए सभी सांसद खड़े हुए।

करीब 3 मिनट 10 सेकेंड में 6 छंदों का गायन पूरा हुआ और इसके तुरंत बाद लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। प्रियंका गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सिर्फ वंदे मातरम् गाने के लिए सदन में आए। उनका कहना था कि अगर सरकार पहले सदन में आकर बयान देती तो शायद इतना हंगामा नहीं होता।

संसद के बाहर कांग्रेस का ‘मंकी टॉय’ प्रदर्शन

सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस के कुछ सांसदों ने संसद परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रदर्शन किया। राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उनके हाथ में बंदर का खिलौना था और कुछ अन्य सांसद भी खिलौने लेकर पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ नारेबाजी की गई। समाजवादी पार्टी के कुछ सांसद भी इसमें शामिल हुए। करीब 10-15 मिनट बाद प्रदर्शन खत्म हो गया। बीजेपी ने इस प्रदर्शन को संसद की गरिमा और राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी प्रदर्शन की आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस सांसद इस तरह के प्रदर्शन से नेता को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं। रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी को अपरिपक्व, अनुशासनहीन, उद्दंड और अहंकारी बताया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं और उन्हें संसदीय परंपराओं और संसद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए।

राहुल बोले, 'मोदी और शाह की नींद उड़ा दी'

बीजेपी की आलोचना के बावजूद राहुल गांधी ने शाम को कांग्रेस के एक कार्यक्रम में अपने तेवर और तीखे कर दिए। ‘रचनात्मक सम्मेलन’ में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह और आरएसएस पर निशाना साधा और मजाक उड़ाया। राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से कहा कि उन्होंने मोदी की नींद उड़ा दी है और अमित शाह को इतना दबाव में ला दिया कि वह संसद में आने की हिम्मत नहीं कर पा रहे। उन्होंने दावा किया कि जब तक मोदी इस्तीफा नहीं देते और अमित शाह की कुर्सी नहीं जाती, तब तक उन्हें चैन से सोने नहीं दिया जाएगा।

बीजेपी रही शांत, कांग्रेस के भीतर से हुआ विरोध

बीजेपी की ओर से इन बयानों पर ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं दी गई। उत्तर प्रदेश के मंत्री एके शर्मा ने राहुल गांधी की राजनीतिक समझ पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी समझ को लेकर देश में पहले से धारणा बनी हुई है और इसी वजह से लोग उन्हें गंभीरता से नहीं लेते। राहुल गांधी और कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर पार्टी के भीतर से भी असहमति सामने आई।

कांग्रेस नेता तारिक अनवर ने कहा कि सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद होना लोकतंत्र में सामान्य बात है, विरोध भी होना चाहिए, लेकिन उसकी एक न्यूनतम मर्यादा होनी चाहिए। पवन खेड़ा के प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि वह इस तरीके से सहमत नहीं हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात के दौरान अपनी राय रखेंगे।

राहुल ने बताई अपनी जीत, बीजेपी ने कहा- ‘नुकसान विपक्ष का’

राहुल गांधी ने संसद में सरकार के कामकाज को रोकने को अपनी रणनीति की सफलता बताया। उनका दावा है कि विपक्ष के दबाव के कारण सरकार को कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर आगे बढ़ने में मुश्किल हुई। लेकिन बीजेपी का कहना है कि यह जीत नहीं बल्कि विपक्ष की रणनीतिक हार है। सवाल उठा कि अगर सरकार के विधेयकों पर बहस ही नहीं हुई तो विपक्ष ने अपनी बात जनता के सामने रखने का मौका क्यों गंवाया? खास तौर पर विपक्षी सांसदों के लिए प्रश्नकाल अहम होता है।

इसके जरिए वे अपने क्षेत्र की समस्याएं मंत्रियों के सामने रख सकते हैं और सरकार पर दबाव बना सकते हैं। अब ऐसे सांसदों के सामने अपने क्षेत्रों में जाकर जनता को जवाब देने की चुनौती होगी।

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