म्हणे तड़पातोंईस रेई : राजेन्द्र सनाढ्य राजन
म्हूँ विने पूरो घी री,
कोठी मा उतारी देऊँ,
तोई वो म्हणे आकोदन,
गाळ्याईस देतों रेई।
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म्हूँ वंडे सवागत मा,
पळक-पावड़ा विछाई देऊँ,
तोई वो म्हारी बुराया रा,
पावड़ा बोलतोंईस रेई।
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म्हूँ म्हारी दोई आँखा,
वंडे हाथ मा देई देऊँ,
तोई वो वणाऊँ रे-रेन,
गोट्यां खेलतोईस रेई।
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म्हूँ म्हारी नरम चामड़ी रा,
विने जूता पेराई देऊँ,
तोई वो म्हारी चामड़ी ने,
हर टेम उधेड़तोंईस रेई।
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म्हूँ म्हारों काळजों वंडे,
हामें काड न मेली देऊँ,
तोई वो पगा ऊँ वंडे,
ठोकरा मेलतोईस रेई।
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म्हूँ कदी वंडे वास्ते,
म्हारी जाण देई देऊँ,
तोई वो डींटों ऊबों-ऊबों,
जोर-जोर ऊं हँसतोंईस रेई।
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म्हूँ जाणी रूं हूँ राजन,
म्हूँ क ई भी करी देऊँ,
तोई वो म्हारों कदी नी वे,
वो म्हणे तड़पातोंईस रेई।
वो म्हणे तड़पातोंईस रेई।।
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राजेन्द्र सनाढ्य राजन
वाइस प्रिंसिपल : रा उ मा वि नमाना
नि-कोठारिया, जि-राजसमंद, राजस्थान
रचणां नं- 4392
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