आपकी कलम
भागीरथपुरा 'देशव्यापी मुद्दा बना : इन्दौरी अफ़सरों की मनमानी ने पुरे देश में करा दी सरकार की बदनामी : खरगे, राहुल, उमा बिफ़ऱे, मुख्यमंत्री हुए सख़्त
नितिनमोहन शर्मा
सब कुछ लुटाकर होश में आये
- 'ज़हरीले जल' से हुई मौत के जिम्मेदार अफ़सरों को मुख्यमंत्री ने दी सज़ा, एक का तबादला, दो सस्पेंड
- अफ़सरों की लापरवाही से प्रदेश ही नहीं, केंद्र सरकार भी घिरी, नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री को घेरा
- अफ़सरों के समक्ष बेबसी दिखाने वाले इंदौरी नेताओं को पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने लगाई फ़टकार
- 'घण्टा' लेकर कांग्रेस ने किया नगर निगम पर उग्र प्रदर्शन, दोषियों पर आपराधिक मुकदमे की मांग
नितिनमोहन शर्मा
...आखिरकार सरकार को उन अफ़सरों को इंदौर से हटाना ही पड़ा, जिन पर ' सरकार ' का आंख-कान-नाक होने के आरोप लग रहे थे। देर से ही सही, लेक़िन सरकार के कड़े एक्शन को इंदौर के हित मे माना जा रहा हैं। अफ़सरों की बेदखली को दिल्ली दरबार से भी जोड़ा गया हैं, जिस तक ज़हरीले जल की आंच पहुँच गई थी। इसके पहले की इस कांड की आंच से जबरिया ' बड़ी सरकार ' घेरे में आये, ' छोटी सरकार ' ने सख़्ती बरती।
बावजूद इसके इंदौर का मामला देशव्यापी मुद्दा बनने से बच नही पाया। लगातार पांचवे दिन इंदौर, राष्ट्रीय स्तर के मीडिया की सुर्खियां बना रहा। राहुल, खड़गे, अखिलेश ही नही, उमा भारती में भी मुखरता से जल से मौत को धिक्कारा। ये सब औसत इन्दौरी को भी खूब अखर रहा है कि जिस भाजपा पर आंख मीचकर इतना भरोसा किया, उसके नेताओ ने ये क्या दिन दिखाए? लेक़िन वो इन्दौरी ही कैसा, जो उम्मीद छोड़ दे। लिहाज़ा अहिल्या नगरी में उम्मीद हैं कि इंदौर नगर निगम के ' क्षितिज ' से एक नया सूर्योदय होगा और अब नेताओ को ये कहना न पड़ेगा कि अफ़सर सुन नही रहें।
- 68 साल पहले प्रेम धवन द्वारा लिखा गया औऱ रवि के संगीत में तलत महमूद के स्वर से आज के शीर्षक के शब्द गढ़े गए हैं- सब कुछ लुटाकर होश में आये तो क्या किया...दिन में चिराग जलाए तो क्या किया...आंखों से अब ये परदे हटाये तो क्या किया...??

लगता नहीं कि तलत साहब ने जैसे ये हमारे इंदौर की मौजूदा हालात को जैसे 5 सदी पहले ही भांप लिया था और अपना स्वर दिया? बाद में इन्हीं शब्दों को स्वर कोकिला लता मंगेशकर व रफ़ी साहेब ने भी स्वर दिए लेकिन सबसे पहले प्रेम धवन में ही 1957 में इस गीत को रच दिया जो ' भागीरथपुरा ' के कलंक के बाद के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के सख़्त एक्शन से जुड़ गया। वे सब अफ़सर एकमुश्त हटा दिए गए जो पीने के दूषित जल से एक दर्जन निर्दोषों के असमय काल कवलित होने के जिम्मेदार थे।
जिनकी लापरवाही ने इंदौर के साथ प्रदेश सरकार की देशभर में घर बैठे बदनामी करवा दी। जिनकी आत्ममुग्धता ने ' भागीरथपुरा ' को देशव्यापी मुद्दा बना दिया औऱ केंद्र की मोदी सरकार को भी असहज कर दिया। लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष से लेकर देश के सबसे बड़े विपक्षी दल कांग्रेस के अध्यक्ष, सपा मुखिया आदि विपक्ष को भाजपा के ख़िलाफ़ हमलावर कर दिया। अफ़सरों की इसी सुस्ती ने घर के बाहर यानी प्रतिपक्ष ही नही, घर के अंदर भी नाराजगी भर दी और कमलदल की ही फ़ायर ब्रांड पूर्व मुख्यमंत्री को भी गुस्से से भर दिया।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने आखिरकार इन अफ़सरों को कड़ी सज़ा दी। जिस नगर निगम की ये पूरी जवाबदेही थी, उसके मुखिया दिलीप यादव को निगमायुक्त पद से हटाकर इंदौर से भोपाल पंचायत व ग्रामीण विभाग में बुला लिया गया। यादव का ' एटिट्यूड ' काफ़ी चर्चा में था। लिहाज़ा वे महज सौ-सवा सौ दिन में इंदौर से बिदा हो गए। जो अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया शहर के राजनीतिक नेतृत्व को ठेंगें पर रख आधा दर्जन से ज़्यादा महकमों के मुखिया बने थे, वे निलंबन का शिकार हो गए। सिसोनिया के प्रति तो इतना गुस्सा था कि प्रभावित इलाक़े में जनता ने उनके पुतले तक जला दिए थे।

इंदौर में अंगद जैसे 15 बरस से जमे, जल आपूर्ति से जुड़े अफ़सर संजीव श्रीवास्तव भी सस्पेंड कर दिये गए। अब श्रीवास्तव के पूरे कार्यकाल व कार्यकलापों के साथ उनकी संपति की जांच की भी मांग बुलंद हो गई हैं। मुख्यमंत्री ने तुरत फुरत तीन नए अफ़सर भी निगम में तैनात भी कर दिए ताकि जनहित के कामकाज प्रभावित न हो। ख़बर लिखे जाने तक नए निगमायुक्त की नियुक्ति भी कर दी गई। आइएएस क्षितिज सिंघल को नया निगम आयुक्त बनाया गया हैं। मुख्यमंत्री के इस एक्शन के बाद अब ये उम्मीद की जा सकती हैं कि अफ़सरों व जनप्रतिनिधियों के बीच की जंग थम जाएगी और जनता के काम से जुड़ी फ़ाइल्स रफ़्तार पकड़ लेंगी।
भागीरथपुरा कांड इंदौर नगर निगम तक सीमित नही रहा। पहले इसने शहर की सीमा लांघ मध्यप्रदेश की मोहन सरकार को चपेट में लिया और शुक्रवार तक ये कांड केंद्र की मोदी सरकार तक जा पहुँचा। पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मामले में लम्बा ट्वीट किया और पानी के नाम पर ज़हर बाटने का आरोप लगाकर पूरी भाजपा को ट्रिपल इंजन सरकार के नाम पर घेरा।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे तो एक कदम आगे निकल गए और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जल गंगा मिशन याद दिलाते हुए जवाब मांगा। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव भी मौका लपकने से नही चुके ओर 2027 के यूपी चुनाव को ध्यान में रखते हुए भाजपाई शासन प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया।

भाजपा को सबसे बड़ा झटका सूबे की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के बयान से मिला
भाजपा को सबसे बड़ा झटका सूबे की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के बयान से मिला। भारती ने घटना के जिम्मेदारों के लिए दंड व प्रायश्चित की बात कर प्रदेश व इंदौर के राजनीतिक नेतृत्व की नेतृत्व क्षमता पर सवालिया निशान लगा दिया। गौरतलब है कि इंदौर महापौर सहित विधायक, पार्षद व सांसद ने अफ़सर नही सुनने की शिकायतें की थी।
- लिहाज़ा साध्वी ने फटकार लगाई कि फ़िर बजाय बिसलेरी का पानी पीने के इस्तीफे क्यों नही दिये? उधर स्थानीय कांग्रेस ने भी नगर निगम पर उग्र प्रदर्शन कर दोषियों के ख़िलाफ़ हत्या का मुक़दमा दर्ज करने की मांग बुलंद की। प्रदर्शन में मंदिर में बजाने वाला घन्टा सबसे ज़्यादा चर्चा में रहा जिसे पुलिस को ज़ब्त तक करने को मजबूर होना। कांग्रेस का कहना हैं कि सिर्फ अफ़सरों की जवाबदेही तय कर सरकार नेताओ को बचा रहीं हैं।






