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माहेश्वरी सेवा सदन पुष्कर में फिर घमासान : भूतड़ा के अध्यक्ष बने रहने के विरोध में 7 पदाधिकारियों का इस्तीफा

राजस्थान Published by: S.P.MITTAL BLOGGER Updated Tue, 14 Apr 2026 02:34 AM
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इस बार विरोधियों को पूर्व अध्यक्ष श्यामसुंदर बिड़ला और जुगल किशोर बिड़ला का समर्थन मिला

अयोध्या के भवन का लोकार्पण होने के साथ ही अध्यक्ष पद छोड़ दूंगा-रामकुमार भूतड़ा

पुष्कर. 

देश भर के माहेश्वरीयों की राष्ट्रीय प्रतिनिधि संस्था अखिल भारतीय माहेश्वरी सेवा सदन पुष्कर में एक बार फिर घमासान शुरू हो गया है। इस संस्था के राष्ट्रीय महत्व का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों पर धर्मशालाएं बनी हुई है। 30 हजार सदस्यों वाली इस संस्था के अध्यक्ष रामकुमार भूतड़ा के विरोध में 12 अप्रैल 2026 को सात पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया।

इस संस्था का मुख्यालय पुष्कर स्थित माहेश्वरी धर्मशाला में है। हालांकि भूतड़ा को अध्यक्ष पद से हटाने के लिए पिछले छह माह से धरना प्रदर्शन हो रहा है, लेकिन 12 अप्रैल को विरोधियों को संस्था के पूर्व अध्यक्ष श्यामसुंदर बिडला और जुगल किशोर बिड़ला का भी समर्थन मिला। 12 अप्रैल को जब संस्था के पुष्कर स्थित कार्यालय में इस्तीफा देने वाले वरिष्ठ उपाध्यक्ष कैलाश सोनी, मंत्री मुरलीधर, गोपाल बंग संजय जैथलिया, भगवान बंग, सोहन लाल मूंदड़ा और प्रचार मंत्री भागीरथ भूतड़ा पहुंचे तब दोनों पूर्व अध्यक्ष के साथ साथ वेणी गोपाल मंत्री, राजेश ईनाणी, सुभाष काबरा, आदि भी मौजूद थे।

इन सभी ने कहा कि भूतड़ा का कार्यकाल गत वर्ष दिसंबर माह में ही समाप्त हो गया, लेकिन भूतड़ा अपने व्यक्तिगत स्वार्थों के कारण अभी तक भी पद पर बने हुए हैं। भूतड़ा का दावा है कि उनका कार्यकाल एक वर्ष के लिए साधारण सभा में बढ़ाया है, लेकिन नाथद्वारा में हुई जिस साधारण सभा में कार्यकाल बढ़ाए जाने का दावा किया जा रहा है, उस साधारण सभा के एजेंडे में कार्यकाल बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं था।

भूतड़ा ने कुल्हाड़ी में गुड फोड़ने वाली कहावत चरितार्थ कर कार्यकाल बढ़वाने का प्रस्ताव पास करवा लिया। भूतड़ा अब कह रहे हैं कि पूर्व में जुगल किशोर बिड़ला भी पांच वर्ष चार माह तक अध्यक्ष रहे। यह बात कह कर भूतड़ा अध्यक्ष पद पर बने रहना चाहते है। जबकि हकीकत यह है कि वर्ष 2016 से 2020 तक जब बिड़ला अध्यक्ष रहे, तब कोरोनाकाल रहा। बिड़ला ने पहले अपना इस्तीफा संस्था के संविधान के मुताबिक मार्गदर्शक मंडल को सौंपा, लेकिन तब कोरोना संक्रमण को देखते हुए चुनाव करवाना संभव नहीं था, इसलिए मार्गदर्शक मंडल की सहमति से कार्यकाल में वृद्धि की गई।

कोरोना काल में सभी संस्थाओं का कार्यकाल सरकार के निर्देश पर बढ़ाया गया। वर्ष 2021 में रामकुमार भूतडका को निर्विरोा अध्यक्ष भी कोरोना काल के कारण ही चुना गया। जहां तक अयोध्या में निर्माणाधीन भवन का सवाल है तो ऐसा कई बार हुआ है कि जब निर्माण कार्य एक अध्यक्ष के कार्यकाल में शुरू हुआ और लोकार्पण दूसरे अध्यक्ष के कार्यकाल में हुआ।

सवाल उठता है कि आखिर भूतड़ा अयोध्या के भवन के लोकार्पण तक अध्यक्ष क्यों बने रहना चाहते हैं? क्या भवन निर्माण में कोई वित्तीय अनियमितता हो रही है? खुद भूतड़ा ने सार्वजनिक तौर पर घोषणा की थी कि भले ही उनका कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ाया गया हो, लेकिन वे मार्च 2026 में अयोध्या भवन का लोकार्पण करवा कर चुनाव की घोषणा कर देंगे।

ऐसा प्रतीत होता है कि लोकार्पण में विलंब करवा कर भूतड़ा अध्यक्ष पद पर बने रहना चाहते हैं। जब प्रबंध कार्यकारिणी के अधिकांश सदस्य इस्तीफा दे रहे हैं, तब भूतड़ा को अध्यक्ष पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है। जहां तक 15 अप्रैल को पुष्कर में नवनिर्मित कृष्ण भवन के लोकार्पण समारोह का सवाल है तो समारोह में बाधा उत्पन्न करने की कोई मंशा नहीं है, लेकिन अच्छा हो कि भूतड़ा इसी समारोह में चुनाव की घोषणा कर दें।

अयोध्या में भवन बनना बड़ी उपलब्धि:

वहीं मौजूदा अध्यक्ष रामकुमार भूतड़ा ने 7 पदाधिकारियों के इस्तीफे और कुछ लोगों के विरोध को दरकिनार करते हुए कहा कि 30 हजार सदस्यों वाली संस्था में कुछ लोगों का विरोध कोई मायने नहीं रखता है। विरोध वो लोग कर रहे हैं जो विकास कार्यों में सहयोग नहीं करते। आज जो लोग इस्तीफा दे रहे हैं या विरोध कर रहे हैं वे सभी नाथद्वारा की उस साधारण सभा में मौजूद थे, जिसमें कार्यकाल बढ़ाने का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ था।

मैं तीसरी बार अध्यक्ष बना हंू, इसलिए मेरा अध्यक्ष पद से कोई मोह नहीं है। भूतड़ा ने कहा कि अयोध्या में 150 कमरों वाली धर्मशाला बनना एक बड़ी उपलब्धि है। इस धर्मशाला का निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में है। मुझे पूरी उम्मीद है कि जून माह में नए भवन का लोकार्पण हो जाएगा। में अपने इस वादे पर कायम हूं कि अयोध्या भन के लोकार्पण के साथ ही चुनाव की घोषणा कर दूंगा।

भूतड़ा ने कहा कि विरोध करने वालों को यह समझना चाहिए कि अयोध्या में जो भूमि कुछ करोड़ों रुपए में खरीदी गई उसकी कीमत आज 80 करोड़ रुपए हो गई है। भगवान राम के जन्म स्थान वाले अयोध्या शहर में माहेश्वरीयों की धर्मशाला बनना पूरे समाज का सम्मान बढ़ाती है। इस धर्मशाला के निर्माण में डीमार्ट के मालिक दमानी का विशेष योगदान रहा है।

करीब 80 हजार वर्ग फीट वाली हमारी धर्मशाला राम मंदिर से मात्र दो किलोमीटर दूर है। अयोध्या में जहां अब एक इंच जमीन मिलना भी मुश्किल है, वहां संस्ािा के पास 80 हजार वर्ग फीट भूमि है। भूतड़ा ने कहा कि कुछ लोगों को मेरे कार्यकाल में हुई उपलब्धियां पच नहीं रही है, इसलिए विरोध किया जा रहा है। विरोधी जब इस मामले को न्यायालय में ले गए है, तब बार बार इस्तीफे की मांग करना बेकार की बात है। विरोधियों को अब अदालत पर भी भरोसा नहीं रहा है।

समाज के हित में इस्तीफा देंगे-बिड़ला

संस्था के पूर्व अध्यक्ष जुगल किशोर बिड़ला ने कहा है कि बदली हुई परिस्थितियों में रामकुमार भूतड़ा को अध्यक्ष पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे देना चाहिए। संविधान में व्यवस्था है कि अध्यक्ष के इस्तीफे के बाद मार्गदर्शक मंडल सभी कार्यों को संपन्न करवाएंगा। उन्होंने कहा कि भूतड़ा ने अब अधिकांश सदस्यों का विश्वास खो दिया है। भूतड़ा को इस घमंड में नहीं रहना चाहिए कि उनके दम पर ही अयोध्या में धर्मशाला बन रही है।

संस्था किसी एक व्यक्ति के भरोसे नहीं चलती है। संस्था में सामूहिकता से काम होता है। माहेश्वरी समाज का हर व्यक्ति काबिल है और अयोध्या के अधूरे कार्य को पूरा करवा सकता है। बिड़ला ने आरोप लगाया कि अब भूतड़ा अपने राजनीतिक स्वार्थ के कारण अध्यक्ष पद पर बने हुए हैं। माहेश्वरी समाज के इस घमासान के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9414111384 पर जुगल किशोर बिड़ला तथा 9414052337 पर कैलाश सोनी से ली जा सकती है। 

S.P.MITTAL BLOGGER 

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