दतिया. मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी के आशुतोष तिवारी कांग्रेस के घनश्याम सिंह से हार गए हैं. सभी 15 राउंड की गिनती के बाद कांग्रेस के घनश्याम सिंह को 66757 मत मिले जबकि आशुतोष तिवारी को 60741 वोट मिले हैं. नरोत्तम मिश्रा का भविष्य अंधकार में...! समर्थकों ने दिखाई असली ताकत.
वहीं मध्य प्रदेश की दतिया सीट से नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिए जाने की भी खूब चर्चा रही. पार्टी के इस फ़ैसले के बाद उनके समर्थकों में नाराज़गी भी देखी गई थी. दिल्ली के साथ ही देश के कई इलाक़ों में युवाओं और स्टूडेंट्स के आंदोलन के ठीक बाद इन सीटों पर उपचुनाव के लिए वोट डाले गए थे. इन उपचुनावों को प्रदर्शनों के असर के नज़रिए से भी देखा जा रहा है.
दतिया विधानसभा उपचुनाव के 15वें और अंतिम राउंड की गिनती के बाद कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह विजयी घोषित किए गए. उन्होंने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,053 वोटों के अंतर से हरा दिया है, अंतिम राउंड में कांग्रेस को 1,973 और भाजपा को 1,974 वोट मिले, लेकिन कुल मतों के आधार पर घनश्याम सिंह ने जीत दर्ज कर दतिया सीट कांग्रेस के नाम कर दी.
शुरुआती दो राउंड के रुझानों में भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी बढ़त बनाए हुए हैं. पहले राउंड में आशुतोष तिवारी को 4651 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के घनश्याम सिंह को 3367 वोट मिले. दूसरे राउंड के बाद भाजपा के आशुतोष तिवारी 875 वोटों से आगे चल रहे हैं. उन्हें 8253 वोट, कांग्रेस के घनश्याम सिंह को 7378 और आजाद समाज पार्टी के दामोदर यादव को 3529 वोट मिले हैं. दतिया उपचुनाव के तीसरे राउंड की मतगणना के बाद मुकाबला बेहद कांटे का हो गया है.
भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी 139 वोटों की बढ़त के साथ आगे चल रहे हैं. अब सभी की नजर अगले राउंड के नतीजों पर है. दतिया विधानसभा उपचुनाव की मतगणना चौथे राउंड में पहुंच गई है. कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने तीसरे राउंड के बाद कांग्रेस की 33 वोटों की बढ़त का दावा करते हुए कहा कि भीतरघात के कारण लीड कम रही. उन्होंने 12 हजार से ज्यादा वोटों से जीत का भरोसा जताया है. इसके अलावा पूर्व मंत्री पीसी शर्मा दतिया में मौजूद हैं और उन्होंने कहा कि पार्टी प्रशासनिक अधिकारियों के संपर्क में है ताकि मतगणना प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी न हो.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार मुकाबला बेहद करीबी रहा है. मतदान के बाद सामने आए राजनीतिक संकेतों और कार्यकर्ताओं के दावों के कारण यह सीट चर्चा का केंद्र बनी हुई है. भाजपा का कहना है कि सरकार की योजनाओं और संगठन की मजबूती का लाभ उसे मिलेगा. वहीं, कांग्रेस का दावा है कि जनता ने बदलाव के पक्ष में मतदान किया है और उसे जीत मिलेगी.