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पेट्रोल-डीजल पर 10 रुपए एक्साइज कटौती: तुरंत राहत नहीं, मगर ऐसे मिलेगी जनता को राहत

दिल्ली Published by: Paliwalwani Updated Fri, 27 Mar 2026 01:59 PM
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नई दिल्ली. सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपए प्रति लीटर की कटौती की है। इस फैसले के बाद पेट्रोल पर ड्यूटी 13 रुपए से घटकर 3 रुपए प्रति लीटर रह गई है, जबकि डीजल पर इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इस कदम का उद्देश्य बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बीच घरेलू बाजार में ईंधन दरों को नियंत्रित रखना है।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल बना मुख्य कारण
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े हालात के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। क्रूड ऑयल 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच गया है, जिससे तेल कंपनियों पर भारी दबाव बना है।

तेल कंपनियों पर बढ़ा घाटे का दबाव
बढ़ती लागत के कारण तेल कंपनियां पेट्रोल पर करीब 24 रुपए और डीजल पर लगभग 30 रुपए प्रति लीटर तक का नुकसान उठा रही हैं। ऐसी स्थिति में कंपनियों के पास कीमतें बढ़ाने का विकल्प था, लेकिन सरकार की टैक्स कटौती से फिलहाल राहत मिली है।

तुरंत सस्ता नहीं होगा पेट्रोल-डीजल
एक्साइज ड्यूटी घटने के बावजूद उपभोक्ताओं को तुरंत कीमतों में कमी देखने को नहीं मिल सकती। देश में पेट्रोल-डीजल के दाम तेल कंपनियां तय करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय कीमतों, डॉलर की दर और अपने मुनाफे के आधार पर निर्णय लेती हैं। ऐसे में कंपनियां पहले अपने घाटे की भरपाई कर सकती हैं।

मुनाफे का गणित हुआ कमजोर
कच्चे तेल की कीमतों में हर 1 डॉलर की बढ़ोतरी से ईंधन की लागत करीब 50-60 पैसे प्रति लीटर बढ़ जाती है। हालिया उछाल के चलते कंपनियों का मुनाफा लगभग खत्म हो गया है और कई मामलों में यह नुकसान में बदल गया है।

आगे कीमतों की दिशा अनिश्चित
भविष्य में पेट्रोल-डीजल की कीमतें पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर रहेंगी। यदि कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं या सप्लाई प्रभावित होती है, तो घरेलू कीमतों में भी बढ़ोतरी संभव है। ऐसे में सरकार की यह कटौती केवल आंशिक राहत देगी।

सरकार के राजस्व पर पड़ेगा असर
एक्साइज ड्यूटी में कमी से केंद्र सरकार के राजस्व में गिरावट आएगी। हालांकि, यह फैसला उपभोक्ताओं को महंगाई से राहत देने के उद्देश्य से लिया गया है।

राज्यों के फैसले पर टिकी अतिरिक्त राहत
अब निगाहें राज्य सरकारों पर हैं। यदि राज्य भी वैट में कटौती करते हैं, तो उपभोक्ताओं को पेट्रोल पंप पर वास्तविक राहत मिल सकती है।

अंडर-रिकवरी का असर भी अहम
विशेषज्ञों के अनुसार, जब कच्चा तेल महंगा होता है तो कंपनियां तुरंत कीमतें नहीं बढ़ातीं और घाटा सहती हैं। बाद में जब कीमतें कम होती हैं, तो वे उसी घाटे की भरपाई करती हैं। इसके अलावा टैक्स ढांचा, रुपए-डॉलर की दर और पुराने स्टॉक की लागत भी कीमतों को प्रभावित करते हैं।

सरकार का रुख: उपभोक्ताओं को राहत प्राथमिकता
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस फैसले को उपभोक्ताओं के हित में बताया है। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव का बोझ आम जनता पर कम से कम पड़े, यही प्राथमिकता है।

प्रधानमंत्री की राज्यों के साथ बैठक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया की स्थिति को गंभीर बताते हुए संकेत दिया है कि इसके आर्थिक प्रभाव हो सकते हैं। इसी को लेकर वे राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा करेंगे, ताकि मिलकर रणनीति बनाई जा सके।

ईंधन की उपलब्धता पर सरकार का आश्वासन
सरकार ने साफ किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कोई कमी नहीं है। भारत के पास पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिससे सप्लाई प्रभावित नहीं होगी।

 

क्या है एक्साइज ड्यूटी
एक्साइज ड्यूटी एक अप्रत्यक्ष कर है, जो देश में उत्पादित वस्तुओं पर लगाया जाता है। पेट्रोल-डीजल के मामले में यह टैक्स रिफाइनरी स्तर पर लगाया जाता है। सरकार इसे घटाकर या बढ़ाकर सीधे तौर पर कीमतों और अपने राजस्व को प्रभावित कर सकती है।

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