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भूमि अधिग्रहण करने के लिए वास्तु पूजन

ज्योतिषी Published by: paliwalwani Updated Sat, 15 Feb 2025 02:42 AM
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भूमि अधिग्रहण करने के लिए वास्तु पूजन
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वास्तु पूजन... 

  • भूमि अधिग्रहण करने के लिए वास्तु पूजन किया जाता है. 
  • जब हम कोई भी भूमि क्रय करते हैं तब हम उस भूमि का मूल्य देकर दस्तावेज में लिखा पढ़ी करके भूस्वामी बन जाते हैं भूमि विक्रय करने वाले ने उचित मूल्य पर भूमि विक्रय की और हमने भूमि क्रय की उसके पश्चात् कागजों में मालिक बन गये.
  • भूमि क्रय करने के पश्चात् भूमि का अधिग्रहण किया जाता है उस समय भूदेवता (वास्तु पुरुष ) से आग्रह किया जाता है कि हमें इस भूमि में कार्य करने की अनुमति प्रदान करें.
  • भूमि अधिग्रहण कर निर्माण कार्य करने का शुभारंभ करने की प्रक्रिया को ही भूमि पूजन अर्थात शिलान्यास कहते हैं. 
  • भूमि पूजन करते हुए भूदेवता (वास्तु पुरुष) से आग्रह करते हैं कि भवन निर्माण करने की अनुमति प्रदान करें भवन निर्माण करते समय भूमि को बहुत से कार्यों और उपकरणों के उपयोग से कष्टों का सामना करना होगा अतः इस निर्माण कार्य हेतु किये गये कार्यों से उत्पन्न होने वाले कष्टों के लिए क्षमा प्रदान करते हुए निर्विघ्न रूप से कार्य सिद्धी का आशीर्वाद प्रदान करें. 
  • भूमि पूजन करते समय यह कामना की जाती है कि दृश्य - अदृश्य रूप में रहने वाली सभी शक्तियां इस स्थान को त्याग कर भवन निर्माण की आज्ञा प्रदान करें.
  • भूमि पर भवन निर्माण का कार्य जबतक चलेगा तब तक भूमि के गर्भ से लेकर आकाश तक वातावरण विभिन्न रूपों से असंतुलित होगा अतः भवन निर्माण के समय उत्पन्न होने वाली हानिकारक प्रभाव को शून्यता प्रदान करते हुए कार्य सिद्धि हेतु आशीर्वाद प्रदान करें.
  • भूमि के भूस्वामी के स्वरूप भूदेव (वास्तु पुरुष) की संकल्पना की गई है इसलिए भूमि पूजन के समय‌ भू-स्वामी की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है ऐसा माना जाता है कि भूमि पूजन करते समय यदि भूस्वामी के किसी भी अंग में कष्ट उत्पन्न होता है तो भूमि का वह अंग भी दूषित होगा जिसका निराकरण करना आवश्यक हो जाता है. 
  • भूमि पूजन सही समय पर सही मूहूर्त पर करना चाहिए. 
  • भूमि पूजन ईशान जोन, उत्तर जोन, पूर्व जोन या ब्रह्म स्थान पर भी किया जा सकता है क्योंकि भूखंड के यह सभी जोन सकारात्मक ऊर्जा के क्षेत्र माने जाते हैं. 
  • भूमि पूजन के लिए चयन किये गये स्थान को शुद्ध होना चाहिए. 
  • भूमि पूजन किये गये स्थल पर कोई भी कालम नहीं आने चाहिए. 
  • एक गलत धारणा है कि भवन निर्माण के समय कालम के लिए खोदे गये गढ्ढे में नाग नागिन का जोड़ा/ सोने या चांदी का सिक्का डाल देना चाहिए यह सरासर हानिकारक क्रिया है. 
  • जुड़ाई के समय फर्श लेबल तक आ जाने पर कालम में शुद्ध तांबे के स्वास्तिक स्थापित कर देना चाहिए 
  •  कालम की संख्या समय रखना लाभकारी होता है. 
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