अतरा क ई निरमोला वेईग्या : राजेन्द्र सनाढ्य राजन
आपकी कलम
Published by: paliwalwani
Updated Fri, 10 Jan 2025 12:28 AM
कदी तो म्हणेंई दिल ऊँ,
कर लिया करो रे आद,
आल्तक तो जीवीं रो हूँ,
वाट नाळूँ दन- रात।
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अतरा क ई दुनियाँ री,
चकाचौंध मा आंधा वेईग्या,
नोटा सिवाय क ई नी दिखी रो,
अतरा क ई निरमोला वेईग्या।
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आपां लारे मोटा विया रे,
अर लारे कीदी भणाई,
म्हणें तो सब आद हैं,
आप सब भूली ग्यां क ई।
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क ई लारे नी आवें ला,
मन करी लो भोळा,
मसाणा मा वेरा वेईस,
मोटा- मोटा टोळा।
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कोई कंडोई भूखों नी,
सब खाई रा दाळ- रोटी,
बाकि तो ओ कळजुग हैं,
वातां तो वैती रे छोटी- मोटी।
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दिल रेवें जंडो मोटो,
अर हाथ रेवें हमेसा खोळा,
भगवान विने न्याल करे,
भरे हमेसा वंडा झोळा।
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परेम वना क ई कोई नी,
थौड़ों परेम रो राखों भर,
अठै किराया री झौंपड़ी,
ऊपरे असली घर।
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राजन रे चाई रा भाईड़ा,
खाली दो मीठा बोल,
आई न,नी मल सको तो,
कदी कर दो मिस-कोल।
कदी कर दो मिस-कोल।।
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राजेन्द्र सनाढ्य राजन
व्याख्याता- रा उ मा वि नमाना नि-कोठारिया, जि-राजसमंद
(राजस्थान) 99829807774
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