आमेट. नगर के महावीर भवन में सोमवार को आचार्य भगवंत आनन्द महाराज का 124 वां जन्मदिन मनाया गया. इस अवसर पर साध्वी विनीत प्रज्ञा ने कहा की व्यक्तिगत अपेक्षाओं को गौण कर धैर्य व दूरदर्शिता के साथ श्रमणसंघ का चहुंमुखी विकास किया तथा तत्कालीन जन मानस के श्रद्धेय व वंदनीय बने.
संपूर्ण भारतवर्ष की पदयात्रा करते हुए उन्होंने भगवान महावीर के सिद्धांतों का प्रचार व प्रसार किया. आचार्य भगवन श्रुत व शील के आगार थे. प्रतिभा सम्पन्न दिव्य महापुरुष ने अपनी योग्यता व पात्रता के आधार पर नवकार महामंत्र के 3 पदों का स्पर्श कर श्रमणसंघ के उपाध्याय, प्रधानमंत्री व आचार्य सम्राट बने.
महापुरुष फूलों की तरह कोमल होते हैं. वे दुनिया में खुशबू को फैलाते हैं. प्रतिकूलता में आकूलता व्याकुलता हो जाती है. दूसरों मैं दोषारोपण करते हैं, कर्म व्यक्ति ही बांधता है. यह जीव दोष देने में आगे रहता है. घबराने से आकुलता अनुकूलता में परिवर्तित नहीं हो सकती.
मीडिया प्रभारी प्रकाश चन्द्र बडोला व मुकेश सिरोया ने बताया कि भीम से अशोक पोखरना, बेंगलुरु से ललित बोथरा सीमा बोथरा अहमदाबाद से विनोद मेरडतवाल इस धर्म सभा में उपस्थित श्री संघ ने आपका स्वागत शालमाला से किया. आचार्य सम्राट आनंद ऋषि महाराज के जन्मोत्सव पर आमेट की महिला मंडल एवं युवा मंडल ने आयबिल करके गुरुदेव के जन्मोत्सव में त्याग का सम्मान दिया. इस अवसर पर धर्म सभा मे श्रावक व श्राविकाओं की अच्छी उपस्थिति रही. इस धर्म सभा का संचालन ललित डाँगी ने किया.
M. Ajnabee, Kishan paliwal