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राजस्थान

पौत्र आशुतोष को भी डॉक्टर के रूप में देखना रमेश क्षेत्रपाल के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि रही

📅 29 October 2026, 12:23 AM • ✍️ paliwalwani • ⏱️ 5 मिनट में पढ़ें
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पौत्र आशुतोष को भी डॉक्टर के रूप में देखना रमेश क्षेत्रपाल के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि रही
पौत्र आशुतोष को भी डॉक्टर के रूप में देखना रमेश क्षेत्रपाल के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि रही

मात्र 10 रुपए में आंखों की जांच करते थे डॉक्टर रमेश क्षेत्रपाल

30 अक्टूबर को सायं साढ़े चार बजे अजमेर के अग्रवाल स्कूल में होगी श्रद्धांजलि सभा

अजमेर. 

अजमेर ही नहीं राजस्थान के जाने माने नेत्र चिकित्सक डॉक्टर रमेश क्षेत्रपाल का 26 अक्टूबर 2026 की रात को निधन हो गया। 88 वर्षीय डॉ. क्षेत्रपाल का अंतिम संस्कार 27 अक्टूबर को अजमेर के पुष्कर रोड स्थित मोक्षधाम में किया गया। निधन के चौथे दिन 30 अक्टूबर को सायं साढ़े चार बजे अजमेर के अग्रवाल स्कूल में श्रद्धांजलि सभा रखी गई है।

राजस्थान के नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में क्षेत्रपाल परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। डॉ. रमेश क्षेत्रपाल ने कोई 60 वर्ष पहले सेवा की भावना से नेत्र चिकित्सा का काम शुरू किया था। आज डॉक्टर क्षेत्रपाल के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि उनके पोते आशुतोष क्षेत्रपाल का नेत्र चिकित्सक बनना है। एक डॉक्टर के लिए यही सबसे बड़ी उपलब्धि है कि उसकी आंखों के सामने पोता भी डॉक्टर के रूप में खड़ा हो। एक समय था जब डॉ. रमेश क्षेत्रपाल मात्र 10 रुपए शुल्क लेकर आंखों की जांच करते थे।

अजमेर की संत कंवरराम कॉलोनी निवासी गंगाधर मोइनानी ने बताया कि डॉक्टर रमेश क्षेत्रपाल जब कचहरी रोड पर जिंदल भवन के परिसर में सिर्फ टेबल कुर्सी लगाकर अंाखों की जांच करते थे, तब उन्होंने 10 रुपया फीस देकर आंखों की जांच करवाई। डॉ. क्षेत्रपाल ने नेत्र चिकित्सा का कार्य सेवा की भावना से किया। इसी भावना से ग्रामीण क्षेत्रों में निशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर भी लगाए।

कुछ समय अजमेर के जेएलएन अस्पताल में नौकरी की और फिर 1978 में कचहरी रोड पर ही स्वयं का नेत्र चिकित्सालय बनाया। इसके बाद डॉ. क्षेत्रपाल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। साठ वर्षों के डॉक्टरी कार्यकाल में रमेश क्षेत्रपाल ने 2 लाख से ज्यादा लोगों की अंाखों के मोतियाबिंद के ऑपरेशन किए। कचहरी रोड वाला अस्पताल जब पूरी तरह पुत्र अरुण क्षेत्रपाल ने संभाल लिया, तब 11 वर्ष पूर्व डॉक्टर क्षेत्रपाल ने अजमेर के पंचशील में बहुउद्देशीय बड़ा अस्पताल बनाया।

अजमेर के चिकित्सा क्षेत्र में क्षेत्रपाल का यह अस्पताल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। हाल ही में पंचशील के अस्पताल में कैंसर यूनिट की शुरुआत भी की गई है। अब कैंसर रोग से पीडि़त लोगों को इलाज के लिए जयपुर या अन्य शहरों में नहीं जाना पड़ता। रमेश क्षेत्रपाल के पुत्र अरुण क्षेत्रपाल ने पिता द्वारा तैयार किए गए, साम्राज्य को पूरी तरह संभाल लिया है।

सबसे खास बात यह है कि मिलनसारिता और मधुर व्यवहार डॉ. अरुण क्षेत्रपाल को विरासत में मिला है। पिता की तरह अरुण क्षेत्रपाल भी मिलनसार डॉक्टर हैं। मरीज से पूरी आत्मीयता के साथ संवाद करते हैं। इस व्यवहार के कारण ही क्षेत्रपाल अस्पताल में सरकारी कर्मचारी निशुल्क इलाज करवा लेते हैं। क्षेत्रपाल अस्पताल के प्रेसीडेंट आलोक शर्मा ने बताया कि डॉ. अरुण क्षेत्रपाल के पुत्र आशुतोष और पुत्रवधू अदिति भी नेत्र चिकित्सक हैं। यानी परिवार की तीसरी पीढ़ी सेवा के कार्य में जुट गई है। दिवंगत डॉ. रमेश क्षेत्रपाल के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9001094091 पर आलोक शर्मा से ली जा सकती है। 

S.P.MITTAL BLOGGER

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