केरल विधानसभा में निवेश परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया तेज करने वाला विधेयक पारित
तिरुवनंतपुरम. 29 अक्टूबर (भाषा) केरलम विधानसभा ने राज्य में निवेश परियोजनाओं के लिए वैधानिक मंजूरी की प्रक्रिया सरल और तेज करने के उद्देश्य से एक विधेयक पारित किया। हालांकि, विपक्ष ने यह आशंका जताते हुए सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया कि इस कानून से राज्य के आर्द्रभूमि क्षेत्रों और धान के खेतों को खतरा हो सकता है।
राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने ‘सरलीकृत एवं त्वरित नियामक मंजूरी और लाइसेंसिंग (सरल) केरलम विधेयक, 2026’ को कठोर बताते हुए कहा कि यह आपातकाल के दौर की याद दिलाता है।
उन्होंने कहा कि विधेयक में अपील करने का कोई प्रावधान नहीं है। विधेयक का बचाव करते हुए मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने कहा कि इससे दुनिया को संदेश जाएगा कि केरलम निवेश के अनुकूल राज्य है।
विधेयक पेश करने वाले राज्य के उद्योग मंत्री पी के कुन्हालीकुट्टी ने कहा कि इस पर चिंता करने की जरूरत नहीं है और इसमें किसी मौजूदा कानून को दरकिनार नहीं किया गया है।
मंत्री ने विपक्ष के बहिष्कार को नाटक करार देते हुए आरोप लगाया कि वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के शासनकाल में कृषि भूमि सहित किसी भी जगह उद्योग शुरू करने के लिए स्वत: मंजूरी दे दी जाती थी।
दूसरी ओर, संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के समर्थन से जीते निर्दलीय विधायक जी सुधाकरन ने भी विधेयक को लेकर पर्यावरण संबंधी चिंताएं जताईं। उन्होंने कृषि भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संशोधन सुझाए।
विजयन ने विधेयक का विरोध करते हुए दावा किया कि इससे नौकरशाही समितियों को व्यापक अधिकार मिलेंगे, जिससे स्थानीय निकायों की शक्तियां प्रभावित होंगी और स्थानीय स्वशासन के लिए खतरा पैदा होगा।
विजयन ने यह भी कहा कि सत्तारूढ़ यूडीएफ सरकार ने पिछले 10 वर्षों में एलडीएफ शासन के दौरान औद्योगिक क्षेत्र में हुई प्रगति का श्रेय लेने के लिए यह राजनीतिक ‘ड्रामा’ किया है।
भाषा योगेश रमण
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