सुधा वाणी : सुखी होना चाहते हो तो अभाव में सद्भाव का एवं दुख में सुख का आनंद लेना शुरू करो : तीर्थचक्रवती मुनि पुंगव सुधा सागर जी महाराज
राजेश जैन दद्दू
इंदौर.
दुख के दिनों में हंसना सीखो भरे पेट तो दुनिया हंसती है लेकिन जो भूखा रहकर हंसता है वह तपस्वी है। तपस्वी दुख में अभाव में भी मुस्कुराता है। तुम सुखी होना चाहते हो तो अभाव में सद्भाव का और दुख में सुख का आनंद लेना शुरू करो उसी दिन से सुखी होने लगोगे.
यह उद्गार जगत पूज्य तीर्थचक्रवती मुनि पुंगव सुधा सागर जी महाराज ने शुक्रवार को दलाल बाग स्थित विद्या सुधा सत्संग मंडप में महती धर्म सभा में प्रवचन देते हुए व्यक्त किये। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मुनि श्री ने आगे कहा कि आजकल लोग अपने दुख की ज्यादा और सुख की कहानी ज्यादा सुनाते हैं।
भगवान के दर पर दुख की कहानी नहीं सुख की कहानी सुनाओ ताकि भगवान दुखी ना हो मुनिश्री ने बात-बात पर आंसू बहाने वालों पर चुटकी लेते हुए कहा कि स्त्री का शस्त्र आंसू और पुरुष का शस्त्र तलवार है। स्वयं की पीड़ा पर आंसू आए तो जहर और दूसरों की पीड़ा देखकर आंसू आएं तो मोती है। दूसरे के सामने आंसू बहा कर उनके कृपा पात्र मत बनो। आंख में आंसू आ जाए तो गम नहीं लेकिन होठों की मुस्कान नहीं जाना चाहिए।
इस अवसर पर राहुल सेठी आकाश कोल, आनंद गोधा कमल जैन चेलेजर विपुल बाझलं एवं श्रीमती साधना दगडे, श्रीमती मुक्ता जैन, श्रीमती सोनाली बागढीया आदि समाज श्रेष्ठी उपस्थित थे।
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