📅 Friday, 30 October 2026 | 01:26 PM IST
लाइव सेंसेक्स: 74,666.35 ▲ +1,420.35 (+1.94%) • निफ्टी 50: 23,072.10 ▲ +373.30 (+1.64%) • 🪙 सोना 24K (10g): ₹140,390 • 🥈 चांदी (1kg): ₹188,200 • ☁️ उज्जैन: 25°C (बादल छाए रहेंगे)
इंदौर

भारत में 1872 से ही जैन धर्म को हिन्दू धर्म से अलग गिना जाता है- भारत सरकार की जनगणना में 150 सालों से जैनों की अलग गणना

📅 30 October 2026, 12:26 PM • ✍️ paliwalwani • ⏱️ 4 मिनट में पढ़ें
शेयर करें:
WhatsApp Facebook Twitter Telegram Instagram
भारत में 1872 से ही जैन धर्म को हिन्दू धर्म से अलग गिना जाता है- भारत सरकार की जनगणना में 150 सालों से जैनों की अलग गणना
भारत में 1872 से ही जैन धर्म को हिन्दू धर्म से अलग गिना जाता है- भारत सरकार की जनगणना में 150 सालों से जैनों की अलग गणना

भारत में 1872 से ही जैन धर्म को हिन्दू धर्म से अलग गिना जाता है-भारत सरकार के महारजिस्ट्रार कार्यालय ने RTI में दिया लिखित प्रमाण । धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि जैन धर्म स्वतंत्र धर्म है, हिन्दू धर्म से अलग है भारत सरकार की जनगणना में 150 सालों से जैनों की अलग गणना

राजेश जैन दद्दू, 

इंदौर. 

भारत में जैन समाज में अक्सर यह भ्रम फैलाया जाता है कि जैन धर्म हिन्दू धर्म का ही हिस्सा है। लेकिन भारत सरकार के सबसे बड़े और अधिकृत कार्यालय ने इस भ्रम को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है। दद्दू ने कहा कि भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय (Office of the Registrar General of India)* द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के अंतर्गत दी गई लिखित जानकारी में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि —

"हम जैन हैं, हमारा धर्म स्वतंत्र जैन धर्म है

"भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा भारत में वर्ष 1872 से धार्मिक आधार पर आरम्भ हुई जनगणना के विषय में संगठन को सूचना के अधिकार के अंतर्गत बताया था कि जैन धर्म और हिन्दू धर्म को अलग-अलग गिना जाता है।"

जैसा कि आप इस पत्र में देख रहे हैं।काले बैकग्राउंड पर सफेद अक्षरों में भारत सरकार के इस आधिकारिक उत्तर को लिखा गया है। यह कोई सामान्य कथन नहीं, बल्कि 150 साल के सरकारी रिकॉर्ड का प्रमाण है।

इसका अर्थ क्या है?*

1.  1872 से अलग पहचान: भारत में जब पहली बार 1872 में धार्मिक आधार पर जनगणना शुरू हुई, तभी से जैन धर्म को एक स्वतंत्र धर्म के रूप में गिना जा रहा है। यह हिन्दू धर्म का उप-संप्रदाय नहीं है।

2.  संवैधानिक मान्यता: भारत सरकार की जनगणना में 6 बड़े धर्मों — हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध और जैन — को अलग-अलग कोड देकर गिना जाता है। जैन धर्म का कोड हिन्दू धर्म से बिल्कुल अलग है।

3.  RTI में लिखित प्रमाण: यह जानकारी किसी भाषण या लेख में नहीं, बल्कि भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा RTI के जवाब में लिखित रूप में दी गई है, जो एक कानूनी दस्तावेज है।

जैन समाज के लिए गर्व का विषय —

यह खबर उन सभी लोगों के मुंह पर ताला लगाती है जो जैन धर्म को स्वतंत्र धर्म नहीं मानते। हमारे तीर्थंकरों की परम्परा, हमारे आगम, हमारी अहिंसा की संस्कृति बिल्कुल स्वतंत्र और विशिष्ट है। भारत सरकार भी 1872 से, यानी पिछले 153 वर्षों से इसे स्वतंत्र धर्म के रूप में मान्यता देती आ रही है। यह प्रमाण पत्र हर जैन श्रावक को अपने पास रखना चाहिए और गर्व के साथ कहना चाहिए — "हम जैन हैं, हमारा धर्म स्वतंत्र जैन धर्म है।"

📲

पालीवाल वाणी WhatsApp चैनल से जुड़ें

ताज़ा ब्रेकिंग न्यूज़ और समाज के सभी समाचार सबसे पहले अपने फोन पर पाएं।

चैनल से जुड़ें →

संबंधित खबरें

सभी देखें →
WhatsApp हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें