MP के चार वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों को दो-दो माह की सजा : नियमितीकरण से जुड़े मामले में कोर्ट की अवमानना पड़ी भारी...
प्रशासनिक लापरवाही और न्यायालयीन आदेशों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी
इंदौर. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने प्रशासनिक लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए स्वास्थ्य विभाग के चार वरिष्ठ अधिकारियों को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया है। कोर्ट ने सभी अधिकारियों को दो-दो महीने के कारावास की सजा सुनाई है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्वास्थ्य विभाग के चार वरिष्ठ अधिकारियों को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराते हुए दो-दो माह के कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी मो. सुलेमान और आईएएस तरुण राठी के साथ तत्कालीन जॉइंट हेल्थ डायरेक्टर डॉ. डी.के. तिवारी तथा मंदसौर के तत्कालीन सीएमएचओ गोविंद चौहान को सजा दी गई है।
यह आदेश प्रणय वर्मा की एकलपीठ ने स्वास्थ्य विभाग के एक वार्डबॉय के नियमितीकरण से जुड़े मामले में पूर्व आदेश का पालन न करने पर सुनाया। अदालत ने माना कि अधिकारियों ने जानबूझकर कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी की, जो अवमानना की श्रेणी में आता है।
अवमानना याचिका में प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य), आयुक्त, संयुक्त आयुक्त स्वास्थ्य विभाग और मंदसौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को पक्षकार बनाया गया था। सुनवाई के दौरान स्पष्ट हुआ कि पूर्व में दिए गए आदेश के बावजूद संबंधित अधिकारी अनुपालन करने में विफल रहे।
सरकारी तंत्र में भी कानून से ऊपर कोई नहीं
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रसन्ना आर. भटनागर ने पक्ष रखा। कोर्ट ने अपने फैसले में साफ संदेश दिया कि न्यायालयीन आदेशों की अनदेखी किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस फैसले को प्रशासनिक जवाबदेही के लिहाज से अहम माना जा रहा है, जो यह संकेत देता है कि सरकारी तंत्र में भी कानून से ऊपर कोई नहीं है।
मामले के मुख्य बिंदु:
पालीवाल वाणी WhatsApp चैनल से जुड़ें
ताज़ा ब्रेकिंग न्यूज़ और समाज के सभी समाचार सबसे पहले अपने फोन पर पाएं।
संबंधित खबरें
सभी देखें →
कर्नाटक में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू हो गया : मध्यप्रदेश में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट कब लागू होगा...?
पालीवाल समाज इंदौर द्वारा आज श्री चारभुजानाथ जी की रेवाड़ी नगर भ्रमण : ठाकुर जी भक्तों को देंगे आशीर्वाद
ऊंचा उठना है तो पहले झुकना सीखें, विनम्रता कमजोरी नहीं महानता की सीढ़ी है : मुनिपुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज