नवीन पालीवाल पिपलांत्री के नए सरपंच बने, सोशल मीडिया का अहम रोल: चुनाव के दौरान मैं इस नाराजगी को समझ नहीं सका: पद्म श्री, पूर्व सरपंच श्री श्याम सुंदर पालीवाल
नवीन पालीवाल ने पद्मश्री से सम्मानित पूर्व सरपंच श्यामसुंदर पालीवाल को 492 वोटों से हरा दिया
राजस्थान के राजसमंद जिले के पिपलांत्री ग्राम पंचायत चुनाव में 28 वर्षीय नवीन पालीवाल ने पद्मश्री से सम्मानित पूर्व सरपंच श्यामसुंदर पालीवाल को 492 वोटों से हरा दिया है. नवीन को 1348 वोट मिले हैं.
इसका सीधा मतलब निकाले या फिर टेड़ा...दोनों बाते आठवां अजुबा हो जाएगी
पालीवाल वाणी से सुनील पालीवाल-अनिल बागोरा
पद्म श्री, पूर्व सरपंच श्री श्याम सुंदर पालीवाल का चुनाव हारना...कल्पना से परे, हर कोई एक ही बात कर रहा था, भाई साहब, बिना मेहनत करें, जीत जायेगें...बहुत काम किया...देश-विदेशों में पिपलांत्री मॉडल की खुब चर्चा हुई...सदी के महानायक अभिताभ बच्चन के शो कौन बनेगा करोड़पति ने एक नई ऊंचाई दी...
पालीवाल समाज के सितारे बन कर उभरे श्री नवीन पालीवाल...की जीत ने बता दिया...सम्मान दोगे तो सम्मान मिलेगा...कहीं भी कांटेदार मुकाबला नजर नहीं आया...एक तरफा जीत कहीं ना कहीं बड़ा इशारा कर रहीं हैं...
राजस्थान के राजसमंद जिले के पिपलांत्री ग्राम पंचायत चुनाव में 28 वर्षीय नवीन पालीवाल ने पद्मश्री से सम्मानित पूर्व सरपंच श्यामसुंदर पालीवाल को 492 वोटों से हरा दिया है. सीधा मतलब यहां था कि मतदाता बदलाव चाहते थे...यही बात पूर्व सरपंच नहंी समझ पाएं...जब-जब युवाओं की घड़कन बढ़ती है, तब-तब देश और गांव में बदलाव आता है...युवाओं ने बता दिया, है कि उनकी बात भी सुनी और समझी जाए...
नवीन पालीवाल ने पैनी नजर में नाराजगी भाप ली...लेकिन पूर्व सरपंच श्री श्याम सुंदर पालीवाल युवाओं और ग्रामवासियों की समस्या को नजदीक से देख नहीं पाएं...परिवाद भी पिपलांत्री मॉडल में हार-जीत का अंतर काफी कर गया...अब किया चिड़िया चुक गई...खेत...
पालीवाल समाज में सर्वप्रथम नाम से परिचय दिए जाने लगा...गांव...गांव में उनके मान-सम्मान में कसीदें गढ़े जाने लगे...एक छोटे से चुनाव में आश्चर्यचकित हार ने सालों की मेहनत बेकार कर दी...इसका सीधा मतलब निकाले या फिर टेड़ा...दोनों बाते आठवां अजुबा हो जाएगी.
हार जीत का पैमाना नहीं है, लेकिन हकीकत जानना भी जरूरी है...पालीवाल साहब ने जीततनो पर विश्वास किया...वो खरे नहीं उतरे या जानबूझकर हारने पर काम किया वो तो वहीं जाने...विकास पुरूष की हार ने बता दिया है कि जो भी काम करों...अपने बलबुते करों...हकीकत गांव की जानो...ना कि आपके आस-पास, आपको घेरे में लेकर सो कोश दुर होने पर भी कहते है, भाई साहब चांद "आसमान" में नहीं,,,अभी तो जमीन पर ही उतरा है...! तो फिर पिपलांत्री में हारना भी आठवें अजुबे से कम नहीं..., संभवता जीतने पर आज चर्चा नहीं होती, लेकिन हराने पर आज हर-गांव की चौपाल हो या फिर पालीवाल समाज हो...एक ही चर्चा प्रमुख है, जब विकास पुरूष, पिपलांत्री मॉडल हार सकता है, तो लोकतंत्र भी तो जिंदा रह सकता हैं...!
नवीन पालीवाल ने पद्मश्री से सम्मानित पूर्व सरपंच श्यामसुंदर पालीवाल को 492 वोटों से हरा दिया
राजस्थान के राजसमंद जिले के पिपलांत्री ग्राम पंचायत चुनाव में 28 वर्षीय नवीन पालीवाल ने पद्मश्री से सम्मानित पूर्व सरपंच श्यामसुंदर पालीवाल को 492 वोटों से हरा दिया है.
राजस्थान के राजसमंद जिले के पिपलांत्री ग्राम पंचायत चुनाव में 28 वर्षीय नवीन पालीवाल ने पद्मश्री से सम्मानित पूर्व सरपंच श्यामसुंदर पालीवाल को 492 वोटों से हरा दिया है.
राजसमंद: राजसमंद जिले में पंचायतीराज चुनाव 2026 के द्वितीय चरण के परिणामों के बीच एक ऐसा नतीजा सामने आया है, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा है. दुनियाभर में पिपलांत्री मॉडल को पहचान दिलाने वाले पद्मश्री श्यामसुंदर पालीवाल सरपंच का चुनाव हार गए हैं. पिपलांत्री गांव को पर्यावरण संरक्षण और हरियाली की मिसाल बनाने के लिए श्यामसुंदर पालीवाल ने वर्षों तक मेहनत की, उसी गांव के ग्रामीणों ने इस बार उन्हें सरपंच पद पर नहीं चुना है. ग्रामीणों ने श्यामसुंदर पालीवाल की जगह नवीन पालीवाल को अपना नया सरपंच चुना है.
युवाओं के बढ़ते प्रभाव का अंदाजा राजसमंद जिले के पिपलांत्री गांव के चुनाव परिणाम से लगाया जा सकता है. यहां पद्मश्री से सम्मानित सरपंच प्रत्याशी श्यामसुंदर पालीवाल को 28 वर्षीय नवीन पालीवाल ने 492 वोटों से पराजित कर दिया.
नवीन को 1348 वोट मिले हैं, पालीवाल और उनकी पत्नी अनिता पिपलांत्री के सरपंच रहे हैं. अनिता पालीवाल राजसमंद नगर परिषद की सभापति हैं. नवीन ने राजनीति में बढ़ते परिवारवाद को मुद्दा बनाया और पालीवाल को मात दे दी. पालीवाल को वर्ष 2021 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया.
बेटियों के सम्मान को लेकर एक अनूठी पहल : काम नहीं आई...!
श्यामसुंदर पालीवाल ने पिपलांत्री गांव में पर्यावरण संरक्षण और बेटियों के सम्मान को लेकर एक अनूठी पहल शुरू की थी. इस पहल के तहत गांव में बेटी के जन्म पर 111 पौधे लगाए जाते हैं. साथ ही नवजात बच्ची के नाम से पोस्ट ऑफिस में खाता भी खुलवाया जाता है. उनकी इस पहल ने पिपलांत्री गांव को देशभर में एक अलग पहचान दिलाई. दूर-दूर से लोग इस मॉडल को देखने और समझने के लिए पिपलांत्री पहुंचते हैं.
नवीन पालीवाल को पिपलांत्री का नया सरपंच चुना
लेकिन इस बार चुनावी मैदान में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. अपने गांव को देशभर में पहचान दिलाने वाले पद्मश्री श्यामसुंदर पालीवाल को ग्रामीणों ने सरपंच की कुर्सी तक नहीं पहुंचाया और नवीन पालीवाल को पिपलांत्री का नया सरपंच चुना.
चुनाव के दौरान मैं इस नाराजगी को समझ नहीं सका
चुनाव हारने के बाद श्यामसुंदर पालीवाल ने बताया कि मैंने पारंपरिक तरीके से प्रचार किया, वहीं नवीन ने सोशल मीडिया का सहारा लिया. युवाओं ने भी उसकी मदद की. मैं और मेरी पत्नी लगातार दो बार सरपंच रहे हैं. पत्नी के नगर परिषद सभापति बनने से भी कुछ लोगों में नाराजगी थी. चुनाव के दौरान मैं इस नाराजगी को समझ नहीं सका.
• नवीन पालीवाल ने चुनाव में सोशल मीडिया का भरपूर इस्तेमाल किया और परिवारवाद को मुख्य मुद्दा बनाया.
• श्यामसुंदर पालीवाल और उनकी पत्नी अनीता पालीवाल पहले भी लंबे समय तक सरपंच रहे हैं. अनीता पालीवाल वर्तमान में राजसमंद नगर परिषद की सभापति हैं, जिससे कुछ ग्रामीणों में नाराजगी थी.
• श्यामसुंदर पालीवाल ने पारंपरिक तरीके से प्रचार किया, जबकि युवाओं का समर्थन नवीन पालीवाल के साथ रहा.
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