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इंदौर

आहूजा एंटरप्राइजेज : अरुणजी आस्था की अविरल धारा, 35 वर्षों की भक्ति साधना और समाजसेवा का संगम

📅 14 September 2026, 06:59 PM ✍️ paliwalwani ⏱️ 7 मिनट में पढ़ें
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आहूजा एंटरप्राइजेज : अरुणजी आस्था की अविरल धारा, 35 वर्षों की भक्ति साधना और समाजसेवा का संगम
आहूजा एंटरप्राइजेज : अरुणजी आस्था की अविरल धारा, 35 वर्षों की भक्ति साधना और समाजसेवा का संगम

नैवेद्य पुरोहित

1991 में 'आहूजा एंटरप्राइजेज' की शुरुआत के बाद अरुणजी ने डीटीपी और कंपोजिंग की दुनिया में अपनी धाक जमाई। 1990 के दशक के अंत में बाजार की बदलती परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने 2001 में LIC और जनरल इंश्योरेंस की अधिकृत एजेंसी ली, जो आज भी सफलतापूर्वक जारी है। साथ ही आपने जाना कि कैसे पिछले 40 वर्षों से रोज सुबह सवा सात बजे खजराना गणेश मंदिर की आरती में शामिल होना उनके जीवन का सबसे अटूट नियम बना हुआ है। अब आइए रुख करते हैं इस स्वर्णिम सफर के अंतिम पड़ाव की ओर...।

पत्रकारिता, प्रिंटिंग और इंश्योरेंस सेक्टर में सफलता की नई इबारत लिखने वाले अरुण आहूजा जी जब पीछे मुड़कर देखते हैं, तो उनके चेहरे पर एक आत्मसंतोष की मुस्कान तैर जाती है। वे मानते हैं कि अखबार की उस भागदौड़ भरी दुनिया और बाद में LIC की एजेंसी के माध्यम से मिली जनसेवा ने उन्हें जीवन की सबसे बड़ी सौगात दी वह थी, "पहचान, अटूट भरोसा और आत्मीय संबंध"।

उस दौर में भले ही कंप्यूटर ऑपरेटरों की कहानियाँ पन्नों के पीछे छिपी रह गईं, लेकिन अरुणजी ने जिस ईमानदारी से काम किया, उसकी चमक आज भी बरकरार है। इंदौर के वरिष्ठ पत्रकारों, मीडिया जगत के तमाम दिग्गज आज भी जब अरुणजी से मिलते हैं, तो वही पुराना सम्मान और आत्मीयता छलक उठती है। खजराना गणेश की अनन्य भक्ति के साथ-साथ अरुणजी के जीवन का एक और अद्भुत और प्रेरणादायक पहलू है उनकी धार्मिक यात्राएं और सेवाभाव।

साल 1991 से अरुणजी का एक और नियम बना हुआ है कि वे हर साल 3 से 4 बार माता वैष्णो देवी के दर्शन करने जम्मू-कश्मीर जरूर जाते हैं। पिछले लगभग 35 सालों में सिर्फ कोरोना महामारी के दो सालों को छोड़ दिया जाए, तो यह सिलसिला कभी नहीं रुका। अब तक वे दर्जनों बार माता के दरबार में शीश नवा चुके हैं और कई बार बाबा अमरनाथ की पवित्र गुफा के दर्शन भी कर चुके हैं। कई बार तो ऐसा हुआ कि मन में बुलावा आया, अकेले ही ट्रेन की टिकट कराई और बाबा के दर्शन के लिए निकल पड़े।

उनकी इस निष्काम भक्ति और प्रेरणा से एक और सुंदर सेवा गाथा जुड़ी हुई है। खजूरी बाजार के प्रतिष्ठित कंस्ट्रक्शन कारोबारी और समाजसेवी रमेश जोशी (गोटू भैया) को एक बार अरुणजी ने ही माता के दरबार भिजवाया था। इसके बाद गोटू भैया का भी माता के प्रति ऐसा अटूट समर्पण जागा कि वे पिछले तीन सालों से हर साल करीब 100 से 125 श्रद्धालुओं के जत्थे को माता वैष्णो देवी की यात्रा पर ले जाते हैं।

इस पूरी यात्रा का स्वरूप बेहद सेवाभावी होता है। आने-जाने के टिकट से लेकर रहने, खाने-पीने की संपूर्ण व्यवस्था गोटू भैया खुद संभालते हैं। वहीं इस भव्य यात्रा के बैकएंड का पूरा प्रबंधन, होटल-धर्मशाला की बुकिंग और यात्रा की संपूर्ण व्यवस्थाओं की बागडोर खुद अरुणजी अपने हाथों में संभालते हैं। इस साल 28 नवंबर को जाने वाले आगामी जत्थे की तैयारियाँ भी अरुणजी की देखरेख में जोरों पर हैं।

आज अरुणजी इंदौर के निपानिया क्षेत्र में अपने परिवार के साथ एक बेहद सुखद, शांत और संतुष्ट जीवन व्यतीत कर रहे हैं। एलआईसी और जनरल इंश्योरेंस के अपने काम के साथ-साथ वे अपने समाज और धर्म से गहराई से जुड़े हुए हैं।

परिवार की बात करें तो उनके दो बेटे हैं जो अपनी-अपनी जिंदगी में पूरी तरह से सफल हैं। उनका बड़ा बेटा पहले काफी समय तक गुड़गांव में कार्यरत था और अब इंदौर शिफ्ट होकर एक प्रतिष्ठित फर्म में वरिष्ठ पद पर अपनी सेवाएं दे रहा है। वहीं उनका छोटा बेटा मुंबई में प्रसिद्ध टाटा पावर में कार्यरत है।

दैनिक भास्कर इंदौर की लॉन्चिंग टीम के इस 'गुमनाम नायक' ने न केवल अपनी मेहनत से 1980 के दशक में अखबारों को नई तकनीकी दिशा दी, बल्कि जीवन के हर उतार-चढ़ाव को भी अपनी लगन, ईमानदारी, व्यावसायिक कुशलता और ईश्वर भक्ति से पार किया। आज भले ही समय बदल गया हो, तकनीक नई आ गई हो, लेकिन इंदौर की पत्रकारिता और प्रिंटिंग की मजबूत नींव में अरुण आहूजा जी जैसे कर्मठ योद्धाओं का योगदान हमेशा स्वर्ण अक्षरों में याद किया जाएगा।

  • अगली किस्त में पढ़िएगा : एक नए किरदार से मुलाकात होगी जो दैनिक भास्कर समूह से 1971 में ही जुड़ गए थे...इंदौर संस्करण की लॉन्चिंग में भी उनका योगदान अतुलनीय रहा...ऐसे ही गुमनाम नायक ऋषि कुमार शर्मा जी के जीवन संघर्ष से आप सभी रूबरू होंगे। तब तक इंतज़ार कीजिए अगली कड़ी का...।
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