Saturday, 21 February 2026

दिल्ली

अमीर और करोड़पति लोगों के देश छोड़कर विदेश जाने को लेकर चर्चाएं : टैक्स या पॉल्यूशन नहीं बल्कि ये बड़ी वजह

paliwalwani
अमीर और करोड़पति लोगों के देश छोड़कर विदेश जाने को लेकर चर्चाएं : टैक्स या पॉल्यूशन नहीं बल्कि ये बड़ी वजह
अमीर और करोड़पति लोगों के देश छोड़कर विदेश जाने को लेकर चर्चाएं : टैक्स या पॉल्यूशन नहीं बल्कि ये बड़ी वजह

नई दिल्ली. भारत में अक्सर कुछ अमीर और करोड़पति लोगों के देश छोड़कर विदेश जाने को लेकर चर्चाएं हो रहती हैं. इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के सदस्य और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री संजीव सान्याल का एक बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि करोड़पति लोगों के देश छोड़कर और विदेश में सिर्फ बेहतर जीवत स्तर या फिर टैक्स नहीं है, बल्कि भारत के बड़े कारोबारियों में बदलाव और प्रतिस्पर्धा की कमी भी इसका एक बड़ा कारण है.

एक पॉडकास्ट में शामिल हुए संजीव सान्याल ने कहा कि भारत के करोड़पति लोगों के बाहर जाने का कारण सिर्फ पॉल्यूशन या फिर अच्छी और हाई लाइफस्टाइन नहीं है, बल्कि देश के व्यावसायिक एलिट क्लास (Buismess Elite) में जरूरी बदलाव का अभाव भी एक बड़ा कारण है. बता दें कि संजीव सान्याल ईकोनॉमिक ए़डवाइजरी काउंसिल टू द प्रधानमंत्री (EAC-PM) के सदस्य हैं.

भारतीय क्यों विदेश में बसते हैं?

संजीव सान्याल का कहना है कि भारत में बड़े उद्योगों और कारोबारी घरानों में लंबे समय से लोग हावी हैं. नई कंपनियों और नए उद्यमियों को आगे बढ़ने के मौके बेहद कम ही मिल पाते हैं. वहीं उन्होंने कहा कि जब किसी देश के बिजनेस सेक्टर में नए चेहरे और नई सोच नहीं आती है तो इनोवेशन भी कमजोर पड़ जाता है. ऐसे माहौल में कई अमीर लोग अपने कारोबार और निवेश को विदेश ले जाना ज्यादा सुरक्षित समझते हैं.

संजीव सान्याल ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की तारीफ की और कहा कि युवा उद्यमी, खासकर बेंगलुरु जैसे शहरों में जोखिम लेने से नहीं डरते हैं. यही कारण है कि स्टार्टअप सेक्टर में तेजी से नए आइडिया और नई कंपनियां आ रही हैं.

वहीं, उन्होंने पुराने कारोबारियों को लेकर भी बयान दिया. उन्होंने कहा कि पुराने कारोबारी अक्सर जोखिम लेने से बचते हैं और बदलाव की बजाय अपने फायदे बचाने पर ज्यादा ध्यान देते हैं. यही वजह है कि वह दुबई जैसे देशों में फैमिली ऑफिस या फिर निवेश केंद्र बना लेते हैं.

वहीं, सान्याल ने कहा कि किसी भी मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है कि वहां पर असफलता को भी स्वीकार किया जाए. जब कोई बड़ी कंपनी काम नहीं कर पा रही है तो उसे बंद हो जाना चाहिए. ताकि नई कंपनियों को मौका मिल सके.

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