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अपराध

गैंगरेप की कहानी निकली झूठी : 53 लाख की प्रॉपर्टी के लिए महिला ने रची थी साजिश, गाजियाबाद पुलिस ने किए चौंकाने वाले खुलासे

📅 22 October 2022, 10:51 AM • ✍️ Pushplata • ⏱️ 5 मिनट में पढ़ें
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गैंगरेप की कहानी निकली झूठी : 53 लाख की प्रॉपर्टी के लिए महिला ने रची थी साजिश, गाजियाबाद पुलिस ने किए चौंकाने वाले खुलासे
गैंगरेप की कहानी निकली झूठी : 53 लाख की प्रॉपर्टी के लिए महिला ने रची थी साजिश, गाजियाबाद पुलिस ने किए चौंकाने वाले खुलासे

गाजियाबाद बलात्कार मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। जांच करने वाले पुलिस अधिकारियों ने कहा कि बलात्कार की शिकायत झूठी है और इसके पीछे 53 लाख रुपए का संपत्ति विवाद है। गुरुवार को पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि 2 दिन पहले जिस महिला द्वारा सामूहिक बलात्कार का आरोप लगाया गया था, वो शिकायत झूठी है।

जब मामला सामने आया था तब दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। दिल्ली महिला आयोग ने भी महिला की शिकायत का संज्ञान लेते हुए कार्यवाही के लिए दबाव डाला था।महिला के भाई ने दावा किया था कि 16 अक्टूबर को उसके जन्मदिन में शामिल होने के बाद दिल्ली वापस जाने के बाद महिला का अपहरण कर लिया गया था।

उसके बाद पांच लोगों ने महिला का बलात्कार किया और 18 अक्टूबर की सुबह वह गाजियाबाद में मिली। पुलिस ने कहा उन्होंने उसे एक बोरी के अंदर पाया। लेकिन उसके शरीर का ऊपरी आधा हिस्सा बाहर था, और वह बात कर रही थी।

वहीं जीटीबी अस्पताल (जहां महिला को इलाज के लिए ले जाया गया) के सूत्रों ने बताया कि महिला के शरीर पर कोई आंतरिक चोट के निशान नहीं थे। हालांकि कुछ चोट के निशान पाए गए। जबकि उसके अंदर से निकाली गई 5-6 सेंटीमीटर की विदेशी वस्तु को विश्लेषण के लिए पुलिस के पास भेजा गया था। जांचकर्ताओं ने इस बारे में अधिक जानकारी नहीं दी है।

पुलिस ने अब तक तीन लोगों (आज़ाद, गौरव और अफजल) को हिरासत में लिया है। कथित तौर पर साजिश रचने के लिए और एक संपत्ति विवाद के मामले को गलत तरीके से हल करने के लिए। महिला को हिरासत में नहीं लिया गया है। पुलिस का कहना है कि वह अभी भी डॉक्टरों की निगरानी में है। बता दें कि एक महीने पहले था।

सिहानी गेट के सर्किल अधिकारी आलोक दुबे ने बताया, ”एफआईआर में जिन पांच लोगों को आरोपी बनाया गया था, उनके और महिला के बीच संपत्ति का विवाद था, जो लंबे समय से चल रहा है। दो लोगों का दावा है कि यह उनकी पुश्तैनी संपत्ति थी और 40 साल से उनके पास है। आजाद प्रॉपर्टी में किराए पर रह रहा था और दूसरी तरफ के एक आदमी का उस पर 2 लाख रुपये का बकाया था। उनका दावा है कि आजाद ने उनके साथ एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए जिसके तहत उन्हें संपत्ति के दस्तावेज वापस करने के बाद राशि चुकानी थी। लेकिन वास्तव में, यह उसे पावर ऑफ अटॉर्नी देने का एक समझौता था और संपत्ति बाद में महिला के कब्जे में आ गई।”

पुलिस ने कहा कि मामले में अन्य विसंगतियां भी थीं। आजाद का मोबाइल फोन उसी समय और उसी स्थान पर बंद हो गया था, जहां कथित तौर पर महिला का अपहरण किया गया था। पुलिस ने यह भी कहा कि आरोपी भी घटना के समय गाजियाबाद के भीतर नहीं थे, बल्कि दिल्ली में थे। पुलिस ने यह भी कहा कि गौरव की कार के जीपीएस से पता चलता है कि यह उसी स्थान पर था जहां महिला को पाया गया था।

सर्किल ऑफिसर आलोक दुबे ने कहा, “आरोप में दर्शायी गई स्कॉर्पियो कार किसी भी बिंदु पर शामिल नहीं थी। महिला घर चली गई थी और चुपचाप वहीं छिप गई थी। आजाद द्वारा पेटीएम के माध्यम से किए गए भुगतान के सबूत बरामद किए गए हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ‘बलात्कार’ की खबर व्यापक रूप से प्रसारित होनी चाहिए। महिला के भाई जिसने प्रारंभिक प्राथमिकी दर्ज कराई थी

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