इस बार हमले में बच्चों को मोहरा बनाया : जब संसद चल रही है, तब सड़क पर हिंसा क्यों?
लेकिन भावना वही, भारत तेरे टुकड़े होंगे, सनातन धर्म नष्ट हो और देश विकसित राष्ट्र न बने
20 जुलाई 2026 को दिल्ली में संसद भवन के बाहर जो हिंसा हुई, उसे किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। कॉकरोच जनता पार्टी के आह्वान पर जो युवा संसद भवन के बाहर एकत्रित हुए उनके पथराव से पांच आईपीएस सहित पचास पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। बाद में पुलिस के बल प्रयोग से सौ प्रदर्शनकारी भी घायल हुए। भले ही यह प्रदर्शन कॉकरोच पार्टी की ओर से हुआ हो, लेकिन पीछे से कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, वाम दल आम आदमी पार्टी आदि का सहयोग रहा। पुलिस की जांच पड़ताल में सामने आया है कि प्रदर्शनकारियों में गैर छात्र भी शामिल हैं।
इससे प्रतीत होता है कि इस प्रदर्शन में ऐसे तत्व शामिल रहे जिनकी भावना देश विरोधी है। पूर्व में दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में भारत तेरे टुकड़े होंगे के नारे सार्वजनिक तौर पर लगे। इसी प्रकार सनातन धर्म को नष्ट करने की सार्वजनिक घोषणा की गई। असल में देश में ऐसे तत्व सक्रिय हैं, जो भारत को विकसित राष्ट्र बनने नहीं देना चाहते। दुनिया में युद्ध की भीषण स्थिति होने के बाद भी भारत की विकास दर 7.7 है, जो यह दर्शाती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी भारत मजबूत स्थिति में खड़ा है।
आज भारत का युवा पूरी दुनिया में अपनी दक्षता साबित कर रहा है। 19 जुलाई को ही हैदराबाद के युवाओं ने देश के निजी क्षेत्र का सैटेलाइट सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित किया। लेकिन इसके बाद भी नीट पेपर लीक को लेकर कुछ युवाओं को मोहरा बनाकर दिल्ली में हिंसा करवाई जा रही है। जो कुछ छात्र कॉकरोच पार्टी के नाम पर प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि आज भारत विकास के पथ पर दौड़ रहा है। भारत की यही मजबूती कुछ लोगों को पसंद नहीं आ रही। देश ने किसान आंदोलन में घुसे उपद्रवियों को भी देखा है, इतना ही नहीं जब नागरिकता कानून में संशोधन कर पड़ोसी मुस्लिम देशों से प्रताडि़ होकर आए हिंदुओं को नागरिकता देने की बात कही गई, तब भी हिंसा करवाई गई।
सड़क पर हिंसा क्यों?
लोकतंत्र में अपनी बात रखने का सबसे उचित व प्रभावी मंच संसद है। संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से ही शुरू हुआ है। विपक्ष चाहता तो युवाओं की मांग संसद में उठा सकता था, लेकिन संसद में बात रखने के बजाए विपक्ष के नेताओं ने संसद के बाहर सड़क पर हिंसा करवाने को प्रोत्साहित किया। कांग्रेस, सपा, आम, वाम दल के सांसद युवाओं की मांग को संसद में दोनों सदनों में उठा सकते हैं।
लेकिन 20 जुलाई को विपक्ष के सांसदों के हंगामे के कारण दोनों सदनों को 6-6 बार स्थगित करना पड़ा। यानी विपक्षी दल एक और संसद को नहीं चलने दे रहे तो वही कुछ युवाओं को मोहरा बनाकर सड़क पर हिंसा करवा रहे हैं। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी तो लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता भी है। राहुल गांधी को संसद में हर मुद्दा उठाने का संवैधानिक अधिकार है। सदन की कार्यवाही के बीच भी राहुल गांधी खड़े होकर अपनी बात को रख सकते हैं।
कॉकरोच पार्टी की मांगों को भी राहुल गांधी लोकसभा में उठा सकते हैं। यदि राहुल गांधी लोकसभा में कॉकरोच पार्टी की मांगों को रखेंगे तो सरकार पर दबाव भी बनेगा। विपक्ष को देश की जनता को यह बताना चाहिए कि जब संसद चल रही है, तब सड़क पर हिंसा क्यों करवाई जा रही है? कितनी अजीब बात है कि 20 जुलाई को सपा के सांसदों ने लोकसभा और राज्य सभा का बहिष्कार कर संसद भवन से जंतर मंतर तक पैदल मार्च किया। अच्छा होता कि सपा के सांसद युवाओं की मांग को संसद में उठाते।
S.P.MITTAL BLOGGER
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