देश में शक्कर के थोक-खेरची भाव रिकार्ड स्तर पर उछले : क्या पेट्रोल पी गया देश की शक़्कर?
राख़ी का त्यौहार : शक़्कर 68 पार
त्यौहारों का दौर शुरू होते ही देशभर में बेतहाशा बढ़े शक़्कर के दाम
शक़्कर का थोक बाज़ार व चीनी मिल मालिक बोले- पर्याप्त स्टॉक, संकट नही, जमाखोरी न करें
नितिनमोहन शर्मा
ऐन त्यौहारों के मौके पर शक़्कर के बड़े बेतहाशा दामों में घर घर की रसोई में हाहाकार मचा दिया हैं। शक़्कर का ऐसा भाव आज तक नही हुआ। 4 माह पहले 40 रुपये किलों बिक रही शक़्कर, आज 65 रुपये पार तक उछल गई हैं। दाम के 70 रुपये प्रति किलों तक पहुचने के आसार बताये जा रहे हैं। देश का आम आदमी समझ नही पा रहा है कि ऐसा क्या हुआ हिंदुस्तान में कि शक़्कर के दाम महज चार-आठ दिनों में 20 से 25 रुपये किलों तक एकाएक बढ़ गए?
क्या ये जमाखोरी के कारण हुआ या शक़्कर के बाज़ार में कृतिम संकट पैदा कर सट्टा बाजार की हरक़त हैं? क्या ये मोदी सरकार की एथेनॉल के प्रति लाड़ का साईड इफेक्ट्स हैं, जो गन्ने से बनता हैं और पेट्रोल में मिलाया जा रहा हैं? ये दो अहम सवाल देश की हर घर की रसोई से निकलकर सरकार के सामने खड़े हैं। वह इसका जवाब दे कि आख़िर ऐसा हुआ क्या जो देश मे चीनी यानी शक़्कर के दाम रिकार्ड स्तर तक इतने बढ़ गए? वह भी तब, जब रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी के साथ त्यौहारों की एक पूरी श्रंखला शुरू हो रहीं हैं।
70 रुपये किलो की शक़्कर के साथ आम आदमी ये त्यौहार कैसे मना पायेगा? क्या ये दाम देश की ' शुगर लॉबी ' को एक मोटा मुनाफ़ा कमाने का अवसर देने का नतीज़ा तो नही? क्योंकि शक़्कर के बाज़ार ने बयान जारी कर साफ़ कर दिया है कि देश मे शक़्कर का पर्याप्त स्टॉक हैं और किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं हैं।
शक़्कर के बेतहाशा बड़े भाव से मोदी सरकार की उड़ाई नींद, सख्त एक्शन शुरू
दस साल में पहली बार बाहर से मंगवाना पड़ रही देश मे शक़्कर
देश में त्योहारी मांग, गन्ने के कम उत्पादन और एथेनॉल निर्माण में गन्ने के डायवर्जन के कारण चीनी (शक्कर) के दाम अचानक बढ़कर खुदरा बाजार में 58 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने स्टॉक सीमा घटाई है और ड्यूटी-फ्री आयात पर विचार कर रही है।त्योहारी सीजन और मांगरक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, दशहरा और दीपावली जैसे आगामी त्योहारों के कारण मिठाइयों और कन्फेक्शनरी की मांग तेजी से बढ़ी है। थोक खरीदार और कंपनियां भविष्य की कमी से बचने के लिए अधिक खरीदारी कर रहे हैं।उत्पादन में कमी और एथेनॉल का असर भी अहम कारण है।
जमाखोरी, सट्टा बाज़ार व बाज़ार में घबराहट फैलने के बाद सरकार उतरी मैदान में
कुछ प्रमुख क्षेत्रों में कम बारिश और सूखे की स्थिति के कारण गन्ने की फसल पर बुरा असर पड़ा है। पेट्रोल में मिलाने के लिए एथेनॉल के उत्पादन में गन्ने के रस और सिरप का उपयोग अधिक होने से चीनी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है। कम स्टॉक और सरकारी कदम भी इसके पीछे हैं। सीजन के अंत तक मिलों के पास बचा हुआ स्टॉक तीन दशक के सबसे निचले स्तर के करीब पहुंच गया है। कीमतों को थामने के लिए सरकार ने व्यापारियों पर स्टॉक लिमिट को घटाकर 15 दिन कर दिया है तथा बिना आयात शुल्क के चीनी मंगाने के विकल्पों पर विचार कर रही है।
शक्कर हर घर की हर रोज की जरूरत का अहम हिस्सा है। हर दिन हम किसी ना किसी रूप में चीनी का इस्तेमाल करते हैं। भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों की सूची में शामिल है, लेकिन इस बार देश में चीनी की कमी को लेकर चर्चा तेज है। घरेलू आपूर्ति बनाए रखने और चीनी की कीमत को सामान्य रखने का हवाला देते हुए केंद्र सरकार ने चीनी के निर्यात पर बैन लगा दिया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले एक महीने में कीमतों में सबसे ज्यादा तेजी महाराष्ट्र और कर्नाटक में देखने को मिली है। ये दोनों राज्य देश के प्रमुख चीनी उत्पादक हैं, लेकिन यहां अन्य राज्यों की तुलना में चीनी का स्टॉक अपेक्षाकृत कम बचा है। चीनी कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इन राज्यों में स्टॉक कम होने के कारण अब अन्य राज्यों की चीनी मिलों को ऊंची कीमतों का फायदा मिल सकता है। बाजार में सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता ने भी कीमतों में तेजी लाने में अहम भूमिका निभाई है।
उद्योग जगत-थोक कारोबारियों की अफवाहों से बचने की अपील
अब ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन ने चीनी की कमी की खबरों को निराधार बताया है, और उसने अपने सदस्यों से पूरे देश में चीनी की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उनकी ओर से यह बयान ऐसे समय में आया है जब कारखाने से चीनी की कीमतों में एक महीने से भी कम समय में लगभग 30 प्रतिशत से भी अधिक की वृद्धि हुई है।
उद्योग संगठनों ने भी अफवाहों से बचने की अपील की है। इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन नेशनल फेडरेशन ऑफ़ कॉपरेटिव शुगर फेक्ट्रीज लिमिटेड ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और घरेलू खपत को पूरा करने में किसी तरह की समस्या नहीं होगी।
शक्कर की कमी का माहौल बनाकर सट्टेबाजी, जमाखोरी पर कड़ी नज़र
व्यापारिक संगठनों ने कहा कि हाल में कीमतों में आई तेजी मांग और सप्लाई की वास्तविक स्थिति के अनुरूप नहीं है। बाजार में कमी का माहौल बनाना, सट्टेबाजी करना या गलत जानकारी फैलाना उपभोक्ताओं और चीनी पर निर्भर उद्योगों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। संगठनों ने व्यापारियों और सामान्यजन से अनावश्यक स्टॉक जमा करने और अफवाहें फैलाने से बचने की अपील की है। पिछले हफ्ते जारी भारतीय चीनी और जैव-ऊर्जा निर्माता संघ और राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना संघ के मुताबिक देश में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त चीनी भंडार मौजूद है।
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