आपकी कलम
कैलाश जी, शहर ने कुंठा तो खूब देख ली...अब इस्तीफा देने का साहस दिखाइये...!
कीर्ति राणा
????कीर्ति राणा
- भागीरथपुरा कांड के ‘अदृश्य’ दोषियों को तलाशने के लिए जांच समिति गठित हो गई है। इस शहर ने पहले भी इसी तरह की घटनाओं, लोगों की अकाल मौत, गबन गंगा वाले मामलों में ताबड़तोड़ जांच समितियां गठित होते देखी हैं। लोग समझ चुके हैं कि ऐसी जांच समितियां उबलते गुस्से पर ठंडे पानी का काम करती हैं।

बात करते हैं कैलाश विजयवर्गीय की। मोहन यादव के दो साल और शिवराज सिंह के 18 साल-इन बीस सालों में यह शहर करीब-करीब हर सप्ताह, आप की कुंठा कथा के दृश्य और संवादों का सार्वजनिक प्रदर्शन देखने का आदी हो चुका है। शहर की तीन पीढ़िया जानती हैं कि मंचों पर ‘मजदूर के बेटे’ वाली टैग लाइन से राजनीति की शुरुआत करने वाले पार्षद पर रामजी की कृपा ऐसी रही कि इनके साथ वाले करोड़पति-कुबेर होते चले गए।
भागीरथपुरा कांड की जांच में चाहे जितने दोषी सामने आएं लेकिन जिस शहर ने आप को कंधे पर बैठाया, ये देश है वीर जवानों पर आप के आह्वान पर कपड़ा मिल की झांकियों में झांझ-मंजीरे बजाए आज उसे आप से यह पूछने का भी हक है कि आप की ही विधानसभा के भागीरथपुरा वार्ड में इतना बड़ा कांड हुआ, आप ने क्या किया? माना कि चुल्लू भर जहरीले पानी में डूबने का साहस सरकार में तो है नहीं लेकिन उन तीन-पांच-सात-दस जितने भी लोग बेवजह अकाल मौत का शिकार हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए आप नैतिक जिम्मेदारी स्वीकारने और इस्तीफा देने का साहस दिखा कर सरकार को बता देते कि मेरी विधानसभा के मृतकों के लिये मैं मंत्री पद को … पर मारता हूं।
सरकार के दो-चार लाख की मदद से ज्यादा की राहत राशि तो आप अपने बिल्डर मित्रों से दिला सकते हैं। चाहे जितनी मदद कर दें लेकिन बद्दुओं का जो ज्वालामुखी फूटा है इसके लावे का रास्ता बदलने, मोहन यादव सरकार से हिसाक-किताब चुकता करने का इससे बेहतर अवसर तो फिर शायद ही आए।
दो दिन सोए नहीं तो आप के इस त्याग पर मोशा जी भी पीठ नहीं थपथपाएंगे। आपदा में अवसर तलाशने वाले महा मानव जी का अनुसरण करने का मौका है। सब जानते हैं आपके मंत्री पद त्यागने की पेशकश से भाजपा की राजनीति में बवंडर आना तय है लेकिन आप के कद में जो इजाफा होगा उसे वो सारे परिवार भी सराहेंगे जो सहायता का चेक लेने से इंकार कर के सरकार को अपने आक्रोश से अवगत करा रहे हैं।
बहुत संभव है कि मंत्रिमंडल के फेरबदल में उन सारे अभूतपूर्व मंत्रियों को भूतपूर्व करने का मुहूर्त मलमास में निकल आए। यह बेहतर हो सकता है कि उससे पहले आप ‘आत्मघाती’ कदम उठाने का दुस्साहस कर दिखाएं। इसी शहर में कभी दर्जनों लोग जहरीली शराब पीने से मर चुके हैं-वह कांड अब किसे याद है । लोग कुछ वर्षों में भागीरथुरा कांड भी चूहा कांड, पेंशन कांड, बेकाबू ट्रक कांड की तरह भूल जाएंगे। राजनीति का कुंड जो अभी जहरीले पानी के कारण सड़ांध मार रहा है इसे भागीरथी प्रयास की तरह पवित्र गंगाजल बनाने के लिए माया-मोह से मुक्ति की एक छलांग लगाने का निर्णय लेने में हिचकिचाहट हो तो अपने प्रिय मित्र दिग्विजय सिंह से मंत्रणा कर लीजिये।
ये शहर होमी दाजी से लेकर सुरेश सेठ तक को आज भी नहीं भूला है। भाजपा में ऐसे व्यक्तित्व का अभाव है, अब तक जो पार्टी में किसी ने नहीं किया आप तो कर दिखाइये। राष्ट्रीय राजनीति में अटल जी और लाल बहादुर शास्त्री के बाद ‘नैतिकता’ के इतिहास में कम से कम एक पन्ना अपने नाम कर लीजिये। यह भी याद रख लीजिये कि जब राजनीति में पर्ची वाले मुख्यमंत्री सत्ता के लिये योग्य माने जाएं तो आप के जैसे कद्दावर नेताओं को आज तो क्या भविष्य में भी कुंठित ही होते रहना है।
सीएम के दौरे में भी आप के सुझावों की अनदेखी से फिर सबक मिला ही होगा। कटे हाथ वाले ठाकुर की भूमिका का बहाना बहुत हुआ, आप की अकड़ का ग्रहण रमेश मेंदोला पर लगा हुआ है, इसे आप को भी समझ आ जाना चाहिए। आप इस भ्रम में जी रहे हैं कि इंदौर की राजनीति समझने वालों को यह पता नहीं है कि कोई अधिकारी आप की नहीं सुनता है।
नये साल में कुछ नया करने की हिम्मत दिखाइये। आप के दुस्साहस से बल्ला कांड और भागीरथपुरा कांड सहित और जितने भी ज्ञात-अज्ञात कांड होंगे सब धुल जाएंगे। खेद प्रकट करने से घंटे की गूंज कम नहीं होगी, इस गूंज पर आप का साहस असरकारी हो सकता है। आप के विरोधी भी आप का गुणगान करते नहीं थकेंगे कि पत्रकारिता में अनुराग द्वारी की तरह भाजपा में भी कोई एक तो रीढ़ वाला निकला।






