डबोक. काल भैरव मंदिर मंडल डबोक चौराहा के तत्वावधान में दुर्गा अष्टमी के उपलक्ष्य में हवन. पूजन का आयोजन किया गया. मंदिर प्रधान सेवक श्री राजकुमार पालीवाल ने पालीवाल वाणी को बताया कि काल भैरव को खीर, पुड़ी और मिष्ठान का भोग लगाकर 9 कन्याओं को भोजन प्रसादी कराई गई.
नवरात्रि और दुर्गा पूजा के पावन पर्व पर माँ भगवती की उपासना आत्म-शक्ति, संयम, और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं. दुर्गा माता का पूजन-अर्चन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया व सभी के जीवन मे सुख, समृद्धि व शांति की माता रानी से कामना की.
इस अवसर पर मंदिर संरक्षक श्री लीलाधर पालीवाल, मंडल अध्यक्ष श्री कुणाल पालीवाल, श्री प्रभात पालीवाल, समाजसेवी श्री भारत सिंह राव, श्री रवि डेकाटे, श्री नकुल पालीवाल आदि ने मौजूद रहकर व्यवस्था संभाली. और भैरव मंदिर, माँ की आराधना में सहयोग प्रदान किया. माता रानी और भैरव बाबा का आशीर्वाद सदा सब पर बना रहे.
भारतीय संस्कृति में नवरात्रि को शक्ति की उपासना, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक साधना का विशेष पर्व माना जाता है. नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. मां शैलपुत्री से लेकर मां सिद्धिदात्री तक की आराधना की यह परंपरा शक्ति के विविध रूपों और जीवन के अलग-अलग मूल्यों को दर्शाती है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी के प्रत्येक स्वरूप का अपना विशिष्ट महत्व है. कोई तप और त्याग की प्रेरणा देता है, तो कोई साहस, ममता, ज्ञान, शांति और बुराई पर विजय का संदेश देता है. नौ दुर्गा की आराधना के माध्यम से भक्त आध्यात्मिक उन्नति के साथ जीवन में धैर्य, विवेक और सकारात्मकता अपनाने की प्रेरणा भी प्राप्त करते हैं.
साधना से सकारात्मक जीवन की ओर बढ़ने की प्रेरणा
मंदिर प्रधान सेवक श्री राजकुमार पालीवाल ने पालीवाल वाणी को बताया कि नवरात्रि के नौ स्वरूपों की आराधना का व्यापक संदेश यही है कि वास्तविक शक्ति केवल शारीरिक सामर्थ्य या बाहरी पराक्रम में नहीं, बल्कि धैर्य, विवेक, करुणा और सही निर्णय लेने की क्षमता में भी निहित है. मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप जीवन की चुनौतियों के बीच इन गुणों को अपनाने की प्रेरणा देते हैं. नौ दिनों की साधना भक्तों के लिए आस्था के साथ आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को मजबूत करने का अवसर बनती है. यही कारण है कि नवरात्रि को शक्ति उपासना के साथ आत्ममंथन, आत्मसंयम और बेहतर जीवन की दिशा में आगे बढ़ने का पर्व भी माना जाता है.