जोधपुर. श्री ओम प्रकाश पालीवाल (धामट) कुई-जोधपुर ने पालीवाल वाणी को जानकारी देते हुए बताया कि पालीवाल समाज की एक अद्भूत प्रतिभाशाली बिटिया सिद्धि पुत्री श्री सांगीदान जी पालीवाल (दयाकौर) siddhi shri sangidan ji paliwal (dayakaur) ने अपनी ख्याति के अनुसार पालीवाल समाज को गौरवान्वित किया.
सिद्धि पालीवाल ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज हरिद्वार उत्तराखंड में लिथुआनियाई भाषा में प्रमाण पत्र व पात्रता हासिल करने पर कुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मया पंड्या जी का सानिध्य व आशीर्वाद मिला.
लिथुआनियाई (Lithuanian)और संस्कृत सबसे पुरानी और करीबी 'बहनों' (sister languages) के रूप में जानी जाती हैं, जिनमें सैकड़ों शब्दों, व्याकरण और उच्चारण में अद्भुत समानता है. चूँकि लिथुआनियाई भाषा ने अपने प्राचीन रूप को बनाए रखा है, इसलिए यह आधुनिक भाषाओं में संस्कृत के सबसे करीब मानी जाती है, जिसमें 100-200 से अधिक मूलभूत शब्द लगभग समान हैं. सिद्धि पालीवाल को अनेक समाजसेवियों को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं प्रेषित की.