उदयपुर. 10 ऑक्टोम्बर
गीता परिवार उदयपुर द्वारा पितृ विसर्जनी अमावस्या पर आज शनिवार को प्रतिदिन की भाँति गीता साधकों द्वारा ओन लाइन 5 अध्यायों का वाचन किया गया एवं इसके बाद श्रीराम और केवट के प्रसंग का उल्लेख करते हुए संतोष दीदी ने बताया.कि भगवान के संबंध में किया गया हमारा संकल्प यदि प्रबल होता है तो वह संकल्प पूर्ण करने का दायित्व भगवान का हो जाता है।
- "अब कछु नाथ ना चाहिअ मोरे, दीनदयाल अनुग्रह तोरे" भगवान की कृपा से केवट को यह निष्काम स्थिति प्राप्त हुई। यही हमारे भी जीवन की सार्थकता है, शरणागत वत्सल भगवान की भक्ति में प्रेम को प्रवृद्ध करके प्रभु के श्री चरणों की संगति पाई जा सकती हैं। केवट ने प्रभु श्री राम के चरण प्रक्षालन करके अपनी 21 पीढ़ीयों के पूर्वजों को तार दिया और और स्वयं ने प्रभु का आशीर्वाद पाया। भक्त का संपूर्ण जीवन साधना में साकार व सफलता की दिशा में अभिप्रेत हो जाए यही हम पर भगवान की कृपा है।
भगवद्गीता की उत्पत्ति का प्रसंग बताते हुए संतोष दीदी ने पालीवाल वाणी को बताया कुरुक्षेत्र की रणभूमि में युद्ध आरंभ होने से पूर्व अर्जुन ने दुर्गम संकट से पार कराने वाली मां दुर्गा देवी की स्तुति कर विजय का वरदान प्राप्त किया था। नवरात्रि शक्ति की आराधना का पर्व है। हम भी अपने जीवन समरांगण में गीताजी के सिद्धांतों को अपना कर विजयी होकर अपनी शक्ति व सामर्थ्य बढ़ा कर सकते हैं।
परशुराम चौराहे के नजदीक अपना घर गोशाला मे गीता साधकों द्वारा ऑफ लाइन सम्पूर्ण गीता जी के 18 ही अध्यायों का वाचन कर "गो ग्रास एवं लापसी सेवा" के साथ तर्पण अनुष्ठान कार्यक्रम को विराम दिया गया। उक्त जानकारी गीता साधक विष्णु शंकर पालीवाल ने दी!
- समाचार प्रेषक : विष्णु शंकर पालीवाल
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