राजेश जैन दद्दू
इंदौर.
टीकमगढ़, म.प्र. धार्मिक नगरी टीकमगढ़ शुक्रवार 17 अप्रैल 2026 को एक ऐतिहासिक और पुण्यशाली अवसर की साक्षी बनी। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि श्रंमण संस्कृति के महामहिम*पट्टाचार्य 108 श्री विशुद्धसागर जी महाराज*संसघ के पावन सान्निध्य एवं दीक्षा प्रदाता के रूप में आज यहां चार ब्रह्मचारी मुमुक्षुओं ने सांसारिक बंधनों का त्याग कर जैनेश्वरी दीक्षा अंगीकार की।
दीक्षा महोत्सव में देशभर से हजारों गुरुभक्त, धर्मप्रेमी एवं समाजबंधु उपस्थित रहे। इस अवसर पर पंडित श्रेयांश कुमार जैन बडोद, पंडित संतोष कुमार विनोद कुमार जी रजवास पंडित जय निशांत, अतिशय जैन इंदौर।
दीक्षा का महत्व : दीक्षा समारोह में पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि "संयम का मार्ग ही मोक्ष का मार्ग है। विशुद्ध बगिया में आज चार नए पुष्प खिले हैं, जिनकी सुगंध से पूरा समाज सुवासित होगा। संसार के समस्त परिग्रहों का त्याग कर आत्म कल्याण के मार्ग पर बढ़ना सबसे बड़ा पुरुषार्थ है।"
दीक्षा विधि के पश्चात नवदीक्षित साधुओं का श्रद्धालुओं ने जय कारा लगाए और नमोस्तु शासन जयवंत हो से दीक्षा स्थल गुंजायमान कर दिया। दद्दू ने बताया कि
1. श्रमण मुनि श्री 108 सकलार्थ सागर जी महाराज
2. श्रमण मुनि श्री 108 सुबोध सागर जी महाराज
3. श्रमण मुनि श्री 108 सुप्रभात सागर जी महाराज
4. क्षुल्लक श्री 105 सुप्रसन्न सागर जी महाराज
दीक्षा प्रदाता: पट्टाचार्य 108 श्री विशुद्धसागर जी महाराज
निवेदक : सकल दिगंबर जैन समाज, टीकमगढ़, मध्यप्रदेश