अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर बड़ा तनाव उभर कर सामने आ रहा है। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस शांति प्रस्ताव या प्लान को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें जंग को खत्म करने की बात कही गई थी। ट्रंप का साफ कहना है कि उन्हें ईरान की शर्तें कतई मंजूर नहीं हैं, जिसके बाद अब यह सवाल गहराने लगा है कि क्या मिडटर्म चुनाव के बाद अमेरिका द्वारा फिर से भीषण बमबारी की जाएगी?
क्या था ईरान का 7 दिन का प्लान?
युद्ध को विराम देने के लिए ईरान की तरफ से एक 7 दिन की योजना अमेरिका के सामने पेश की गई थी। इस प्लान के तहत यह मांग रखी गई थी कि सभी मोर्चों पर तत्काल प्रभाव से लड़ाई रुके, ईरान के तेल पर लगाए गए तमाम प्रतिबंध हटाए जाएं और सातवें दिन सामरिक रूप से बेहद अहम होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल दिया जाए। हालांकि, अमेरिका की तरफ से इन शर्तों को मानने से साफ इनकार कर दिया गया है।
चीन की भूमिका और ड्रोनों का नया खतरा
इस पूरे घटनाक्रम के बीच चीन की रणनीति भी लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। ईरान के मामले में चीन की सोच और नीतियां सीधे तौर पर ट्रंप से आमने-सामने टकराती हुई नजर आ रही हैं। एक अमेरिकी रिपोर्ट में यह सनसनीखेज दावा किया गया है कि चीनी सैटेलाइट डेटा ने ईरान के ड्रोनों को तकनीकी रूप से और अधिक खतरनाक बना दिया है, जिससे वैश्विक सुरक्षा समीकरणों में हलचल तेज हो गई है।